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माई कहवा जाये लगलु (Maai Jaaye Lagalu) - Rohit Tiwari Maa Durga Bidai Geet - BhaktiLok

65 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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माँ दुर्गा की विदाई: भक्ति की गहराई

यह भजन माँ दुर्गा की विदाई का है, जो श्रद्धा और आस्था से भरा हुआ है।

माई कहवा जाये लगलु काहे बिसरिया सब हमार, बुढ़ बुढिया का कह दीखात, माई कहवा जाये लगलु। हसता मुस्काता सब छथि, काहे बिसरिया सब हमार, कागा तोरे संग ल जाउ, माई कहवा जाये लगलु। आयोध्या भोजपुर सागर, हे माई कइसे बिसराई, कि तोरे बिना मउगी जग में, माई कहवा जाये लगलु। तूझ बिन जिया, न थेरे बिन, राधा कन्हैया संग मन हरिए, किंतु माई फिर कहियौ, माई कहवा जाये लगलु। तोरे बिना सब अधुरा लागे, हे माई तोरे संग चलब, माई बिना सब बिखर जाउ, माई कहवा जाये लगलु।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में माँ दुर्गा को विदाई देते समय भक्तों के मन में उत्पन्न भावनाओं का वर्णन किया गया है। गीत के पहले चरण में भक्त कहता है, "माई कहवा जाये लगलु," जो माँ के प्रति एक गहन प्रेम और अattachment को दर्शाता है। यह भाव, जहाँ माता की अनुपस्थिति का दर्द साफ महसूस होता है, यह बताता है कि माता की विदाई केवल भौतिक रूप से नहीं बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी प्रभाव डालती है। भक्त ने अनुरोध किया है कि कृपया उन्हें छोड़कर न जाएं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि माँ का सानिध्य उनके लिए कितना महत्वपूर्ण है।

इस भजन में एक विशेष भावार्थ निहित है, जो माँ की कृपा और अपनी आवश्यकता को प्रकट करता है। बार-बार यही पंक्ति सुनाई देती है, "काहे बिसरिया सब हमार।" यह यह दर्शाता है कि माँ द्वारा दिए गए सभी आशीर्वादों के लिए उनका स्मरण करना आवश्यक है। जब भक्त माँ से दूर होते हैं, तब वे अपने जीवन में मौजूद सभी खुशियों को भी खोने का अनुभव करते हैं। यह गहन भाव भक्तों को सोचने पर मजबूर करता है कि कैसे उनसे बिछड़ना केवल शारीरिक स्तर पर नहीं, वरन आध्यात्मिक स्तर पर भी बहुत महत्वपूर्ण है।

भक्ति मार्ग का मूल कारण है सच्चे प्रेम और श्रद्धा के साथ देवी की आराधना करना। इस भजन में माँ दुर्गा का स्मरण और विदाई का दृश्य भक्त को उनकी कृपा के महत्व का आभास कराता है। यह स्पष्ट है कि भक्त का मन हमेशा माँ की उपासना में लगे रहना चाहिए, ताकि वे जीवन की कठिनाइयों में उन्हें हमेशा अनुभव कर सकें। भगवान के प्रति भक्ति का यह मार्ग बांधता है, जिससे भक्त माँ की महानता और उनके आशीर्वाद का अनुभव कर पाता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

माँ दुर्गा का यह भजन विशेषकर नवरात्रि और दुर्गा पूजा के दौरान गाया जाता है। यह देवी भगवती के विभिन्न रूपों की पूजा और उनके प्रति श्रद्धा प्रकट करता है। पुराणों में उल्लेख है कि माँ दुर्गा अपने भक्तों की मदद करने के लिए हमेशा तत्पर रहती हैं। देवी महात्म्य में भी यह बताया गया है कि जब भक्त सच्चे मन से देवी की आराधना करते हैं, तो देवी उनके सभी संकटों को दूर कर देती हैं। इसलिए यह भजन अत्यंत महत्वपूर्ण है और भक्तों के जीवन में देवी की उपस्थिति के एहसास कराता है।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। इस भजन का जाप करने से भक्त को मानसिक शांति, आश्रय, और कठिन समय में माँ की अनुपस्थिति के खालीपन को भरने की शक्ति मिलती है। यह भक्ति उनकी आस्था को और मजबूत करती है और उन्हें सकारात्मक ऊर्जा का एहसास कराती है। साथ ही, यह भजन उन्हें जीवन के रास्ते में सिद्धि और सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह सूर्योदय के समय या संध्या के समय करना आदर्श है। पूजा के समय एक दीया जलाएं और देवी को फूल, फल या मिठाई का भोग अर्पित करें। मन में श्रद्धा और समर्पण के भाव रखें। ध्यान केंद्रित रखें कि आप किस प्रकार माँ की कृपा के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या यह भजन सिर्फ नवरात्रि में गाया जाता है?

हालांकि यह भजन विशेष रूप से नवरात्रि के दौरान लोकप्रिय है, लेकिन इसे किसी भी समय, विशेषकर जब भक्त दुर्गा माता की कृपा की कामना करते हैं, गाया जा सकता है।

क्या इस भजन का कोई विशेष प्रभाव है?

इस भजन का प्रभाव भक्त के मन में शांति, निराशा को दूर करना और माँ के प्रति गहन प्रेम का अनुभव कराने में होता है। यह भक्त को सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है।

इस भजन को कौन गाता है?

यह भजन विभिन्न देवotional कलाकारों द्वारा गाया जाता है। विशेषकर रोहित तिवारी जैसे भक्ति कलाकार इसके माध्यम से माँ दुर्गा के समर्पण को गहराई से व्यक्त करते हैं।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 30 Aug 2026

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