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मैं पूजारण तेरी मां लिरिक्स (Main Pujaaran Teri Maa Lyrics in Hindi) - Alka Yagnik Vaishno Maa Bhajan - Bhaktilok

59 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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माँ वैष्णो: श्रद्धा का महापाठ

उच्च आत्मा की आराधना करने वाला यह भजन हमारे दुखों को मिटाने का बल प्रदान करता है।

मैं पूजारण तेरी मां, मैं पूजारण तेरी मां। माँ वैष्णो तेरा भजन, सबको हर दुख से दूर करे। माँ वैष्णो तेरा भजन, सबको हर दुख से दूर करे। तू धरणी का साज हो। तू धरती पर एक आग है। सब सुख में तेरा नाम। तेरी आरती से नई जगाए। मैं पूजारण तेरी मां, मैं पूजारण तेरी मां। जगत की माता तू। तेरा नाम जपने से हर संकट मिटे। राधे राधे बोलो। माँ संजीवनी, माँ संजीवनी। मैं पूजारण तेरी मां, मैं पूजारण तेरी मां। तेरा आश्रय है सबसे बड़ा। तू खुदा है सबका सच्चा। तूने ही इस जग को बनाया। तूने ही समस्त को बचाया। मैं पूजारण तेरी मां, मैं पूजारण तेरी मां। माँ वैष्णो तेरा भजन, सबको हर दुख से दूर करे।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य भाव माँ वैष्णो की महिमा और उनके प्रति श्रद्धा को व्यक्त करना है। उद्घाटन पंक्ति "मैं पूजारण तेरी मां" इस भाव को सिद्ध करती है कि भक्त माँ को एक पूजा करनेवाली मानता है। भजन में माँ वैष्णो को धरती का साज, पूजा का केंद्र बताया गया है। उनके नाम का जप करने से सभी पीड़ाएं दूर हो जाती हैं। यह एक प्रकार की संजीवनी शक्ति है, जिसका अनुभव भक्त अपनी साधना के माध्यम से करते हैं। वैष्णो देवी को शक्ति की अवतार माना जाता है और यह भजन उनके भक्तों के हृदय में विश्वास और आशा भरता है। भक्त जन माँ की आरती और भक्ति से नई जीवन ऊर्जा प्राप्त करते हैं, और माँ की उपासना नहीं केवल संकटों से रक्षा करती है, बल्कि भक्तों का मानसिक शांति भी बनाए रखती है।

माँ वैष्णो के प्रति भावुकता और आस्था इस भजन में प्रकट होती है। जब भक्त कहते हैं "तू धरणी का साज हो," तो यह स्पष्ट हो जाता है कि वे माँ को हर धरती पर अपने आशीर्वाद के रूप में अनुभव करते हैं। माँ का नाम जपना और उनकी आरती करना न केवल भक्ति का एक तरीका है, बल्कि एक तरीक़ा है जिससे भक्त खुद को उनसे जोड़ते हैं। भक्त जब 'राधे राधे' बोलते हैं, तब वे आध्यात्मिक यात्रा के लिए एक पवित्र प्रवेश करते हैं। ये शब्द संतुलन और सकारात्मकता का प्रतीक होते हैं। भजन की लय और शब्द भक्त को एकांतिकता से दूर जाकर माँ की दिशा में मोड़ते हैं और जीवन में एक नई दिशा निर्धारित करते हैं।

यह भजन भाग्य, परिश्रम और भक्ति के मार्ग को दर्शाता है। भक्तों के लिए यह स्पष्ट है कि माँ वैष्णो के प्रति भक्ति करने से जीवन की कठिनाइयों का निवारण संभव है। इसका मुख्य तत्व है - माँ की कृपा। यह विश्वास दिलाता है कि जब भक्त सच्चे मन से माँ को पुकारते हैं, तो उनके जीवन में परिवर्तन आ सकता है। यह भक्ति मार्ग न केवल व्यक्तिगत समर्पण को संदर्भित करता है, बल्कि इसे सामाजिक तथा पारिवारिक सुख शांति का भी माध्यम मानता है। ब्रह्मा, विष्णु, और महेश की आराधना के समान, माँ वैष्णो की उपासना विभिन्न आयामों को समेटती है, जिनमें जीवन के हर पहलू को प्रभावित करने की शक्ति होती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

माँ वैष्णो की पूजा का समर्थन अनेक पुराणों और ग्रंथों में मिलता है, विशेष रूप से माँ दुर्गा की उपासना में। देवी की उपासना से संबंधित कथाएँ रामायण और महाभारत में भी विस्तृत रूप से विद्यमान हैं। पौराणिक कथा में माँ को तपस्या और साधना द्वारा साक्षात दर्शन देने वाली महिमा का वर्णन मिलता है। भक्तों के लिए माँ वैष्णो की साधना संकटमोचन रूप में मानी जाती है। यह भजन माँ के प्रति अटूट विश्वास और महिमा का गान करता है, जो भक्तों को जीवन के हर संकट से उबारती है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित श्रवण मन और आत्मा को शांति प्रदान करता है। भक्तों ने अनुभव किया है कि इसके जाप से मानसिक तनाव, भय, और चिंता का निवारण होता है। आध्यात्मिक दृष्टिकोण से, यह भजन भक्ति में गहराई लाता है और भक्तों के हृदय में माँ के प्रति असीम श्रद्धा को जन्म देता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह या शाम के समय करना एक आदर्श साधना है। भक्तों को चाहिए कि वे साफ स्थान पर बैठकर एक दीया जलाएँ और फूलों की माला और भोग अर्पित करें। मन को स्थिर रखते हुए, माँ वैष्णो का ध्यान करते हुए, भजन का उच्चारण करना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन को गाने का सही समय क्या है?

इस भजन को सुबह या शाम की आरती के समय गाना श्रेष्ठ है, जब मन शांति में हो।

क्या माँ वैष्णो की उपासना सिर्फ संकट में ही करनी चाहिए?

नहीं, माँ की उपासना को हर समय करना चाहिए, क्योंकि उनका आशीर्वाद हर परिस्थिति में सहायक होता है।

इस भजन का दिव्य प्रभाव कैसे अनुभव करें?

इस भजन के भावार्थ को समझ कर व हृदय से गुनगुनाते हुए, भक्त अनुभव कर सकते हैं कि माँ का साथ सदा है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 23 Aug 2026

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