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Durga Bhajan Lyrics

मैया कृपा करदो झोली मेरी भरदो लिरिक्स (Maiya Kripa Kardo Jholi Meri Bhardo Lyrics in Hindi) - Lakhbir Singh Lakkha Durga Bhajan - Bhaktilok

57 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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माँ दुर्गा की कृपा: झोली भरने की प्रार्थना

माँ दुर्गा की भक्ति में रंगी झोली भरने के लिए इस भजन का श्रद्धा से गायन करें।

मैया कृपा करदो झोली मेरी भरदो लिरिक्स (Maiya Kripa Kardo Jholi Meri Bhardo Lyrics in Hindi) - माँ का नाम लेना कोई शर्म नहीं है इस पर कोई करम नहीं है जिसमे माता की पूजा का जिक्र ना हो ऐसा तो दुनिया में कोई धर्म नहीं है। मैया कृपा करदो झोली मेरी भरदो तेरी दया का हम सदा गुणगान करेंगे तेरा ध्यान करेंगे मैया कृपा कर दो झोली मेरी भरदो....|| भक्तो की करती हरदम रखवाली हो हर संकट को पलभर में तुम टाली हो फिर क्यों नहीं तुम पर भला अभिमान करेंगे तेरा ध्यान करेंगे मैया कृपा कर दो झोली मेरी भरदो....|| मेरी विनती सुनकर मत ठुकरा देना अपना बालक जान मुझे अपना लेना अर्पण तुम्हारी सेवा में हम प्राण करेंगे तेरा ध्यान करेंगे मैया कृपा कर दो झोली मेरी भरदो....|| दृष्टि दया शर्मा पे माँ अब तो करदो अपने भक्तो की मैया झोली भरदो हरदम तुम्हारे नाम का गुणगान करेंगे नित ध्यान करेंगे मैया कृपा करदो झोली मेरी भरदो तेरी दया का हम सदा गुणगान करेंगे तेरा ध्यान करेंगे मैया कृपा कर दो झोली मेरी भरदो....

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय माँ दुर्गा की कृपा की याचना करना है। पहले पद में यह संदेश है कि माँ का नाम लेना गौरव का विषय है, और माता की पूजा का उल्लेख सभी धर्मों में आवश्यक है। जैसे कि भजन में कहा गया है, 'माँ का नाम लेना कोई शर्म नहीं है', यह हमें सिखाता है कि माँ दुर्गा की आराधना सबसे बड़ा कार्य है। बैकग्राउंड में भक्तों की रक्षा और हर संकट को दूर करने का स्मरण किया गया है, जो यह दर्शाता है कि देवी सदैव अपने भक्तों के साथ हैं। कवि देवी से विनती करता है कि वह अपनी कृपा से उसकी झोली को भर दें। इस संदर्भ में 'कृपा' का अर्थ है दया, जो कि माँ दुर्गा की संपूर्णता का प्रतीक है।

भजन की भावनाएं भक्त की वास्तविकता को दर्शाती हैं, जो कठिनाईयों में माँ की सहायता और प्रियता की ख्वाहिश करता है। माँ से जुवां का प्रयोग कर भक्त अपनी निष्ठा दिखाता है और कहता है, 'मेरी विनती सुनकर मत ठुकरा देना।' यह व्यक्त करता है कि भक्त अपेक्षाकृत कमजोर है और अपनी असुरक्षा महसूस कर रहा है। माँ से प्राप्त होने वाली दृष्टिदया की भी अपील की गई है, जिसका अर्थ है माँ की ओर से सजगता और दया। भक्त दोहराता है, 'हरदम तुम्हारे नाम का गुणगान करेंगे', जो यह दर्शाता है कि माँ की स्तुति करने से भक्ति की गहराई और निष्ठा बढ़ती है।

इस भजन का theological essence भक्ति मार्ग की सरलता में निहित है। भक्त का दृढ़ विश्वास और अटल साधना उसे देवी के करीब लाती है। भक्ति का यह मार्ग अकेले में सच्चा ध्यान और श्रद्धा से भरा होता है। भजन का हर पद इसे दर्शाता है कि कैसे भक्त आत्मसमर्पण के भाव से माँ की सहायता की कामना करता है। यह भक्ति का एक आदर्श रूप है, जिसमें आत्मा देवी के प्रति प्रेम और विश्वास के साथ जुड़ी होती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन को हिन्दू धर्म में एक विशेष स्थान प्राप्त है, विशेष रूप से दुर्गा पूजा के अवसर पर। देवी दुर्गा की महिमा 'दुर्गा सप्तशती' और 'देवी भागवत' में वर्णित है, जहाँ उन्हें संसार के संकटों से मुक्ति दिलाने वाली देवी माना गया है। यह भजन उन भक्तों की आवाज है जो कठिनाई में हैं और देवी से सहायता की प्रार्थना कर रहे हैं। इसी प्रकार रामायण और महाभारत में भी माँ दुर्गा की उपासना का महत्व दर्शाया गया है।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। इस भजन का नियमित जाप मानसिक शांति, सकारात्मक सोच और अंतःकरण की शुद्धि के लिए फायदेमंद है। यह तनाव को कम करने, सुख-शांति लाने और एकाग्रता को बढ़ाने में सहायता करता है। भक्तों कीर्तन और समूह साधना से सामूहिक शक्ति उत्पन्न होती है, जो भक्ति में वृद्धि करने में सहायक होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह या संध्या में करना सबसे अधिक लाभदायक होता है, जब वातावरण शांति से भरा होता है। पूजा के समय घर में दीया जलाना, माता को फूल और प्रिय भोग भेंट करना चाहिए। बैठते समय ध्यान लगाना और श्रद्धा भाव के साथ भजन का पाठ करना चाहिए। यह ऐसी अवस्था है जहाँ भक्त का मन स्थिरता और श्रद्धा से भरा होता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन 'मैया कृपा करदो झोली मेरी भरदो' का अर्थ क्या है?

इस भजन का अर्थ है माँ दुर्गा से अपने जीवन की कठिनाइयों में मदद की प्रार्थना करना, झोली भरने का ध्यान रखकर उनकी कृपा की याचना करना।

किन पलों में इस भजन का पाठ करना चाहिए?

इस भजन का पाठ सुबह के समय या संध्या में किया जाना चाहिए, जब भक्त का मन शांति में होता है और देवी की कृपा प्राप्त करने की भावना प्रबल होती है।

इस भजन का भक्ति मार्ग में क्या स्थान है?

यह भजन भक्ति मार्ग का एक उदाहरण है, जहाँ भक्त अपनी सम्पूर्ण निष्ठा और श्रद्धा के साथ माँ दुर्गा से सामूहिक कृपा की याचना करते हैं।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 29 Aug 2026

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