ॐ जय लक्ष्मी रमना स्वामी जय लक्ष्मी रमणा (Om jai lakshmi ramna Lyrics in Hindi) -
ॐ जय लक्ष्मी रमना
स्वामी जय लक्ष्मी रमणा
सत्य नारायण स्वामी जन
पातक हरणा ॐ जय लक्ष्मी रमना...
रतन जड़ित सिंहासन अद्भुत छवि राजे
नारद करत निरंतर घंटा
ध्वनि बाजे ॐ जय लक्ष्मी रमना...
प्रगट भए कलि कारण
द्विज को दरश दियो
बूढो ब्राह्मण बनकर कंचन
महल कियो ॐ जय लक्ष्मी रमना...
दुर्बल भील कराल
जिन पर कृपा करी
चंद्रचूड़ एक राजा जिनकी
विपति हरी ॐ जय लक्ष्मी रमना...
वैश्य मनोरथ पायो श्रद्धा तज दिनी
सो फल भोग्यो प्रभुजी फिर
किन्ही ॐ जय लक्ष्मी रमना...
भाव भक्ति के कारण
छिन-छिन रूप धरयो
श्रद्धा धारण किन्ही तिनको
काज सरयो ॐ जय लक्ष्मी रमना...
ग्वाल बाल संग राजा
वन में भक्ति करी
मन वांछित फल दीन्हो
दीन दयाल हरी ॐ जय लक्ष्मी रमना...
चढ़त प्रसाद सवायो कदली फल मेवा
धूप दीप तुलसी से राजी
सत्यदेव ॐ जय लक्ष्मी रमना...
श्री सत्यनारायण जी की
आरती जो कोई नर गावे
तन मन सुख सम्पति मन वांक्षित
फल पावे ॐ जय लक्ष्मी रमना...
🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)
प्रस्तुत राधा-कृष्ण भजन "ॐ जय लक्ष्मी रमना स्वामी जय लक्ष्मी रमणा (Om jai lakshmi ramna Lyrics in Hindi) - Anuradha Paudwal shree satyanarayan aarti - Bhaktilok" के माध्यम से भक्त और आराध्य के परम संबंध को दर्शाया गया है। वैष्णव संप्रदाय में राधा-कृष्ण का प्रेम लौकिक प्रेम न होकर जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। इस भजन की एक-एक पंक्ति का सार यही है कि भगवान श्री कृष्ण स्वयं राधा रानी के प्रेम के अधीन हैं। बिना राधा के न तो वे मुरली बजाते हैं और न ही गोपी-गोपियों को सुख देते हैं।
भजन के पदों में यह स्पष्ट होता है कि वृंदावन की कुंज गलियों में जब तक 'राधे-राधे' नाम की गूंज नहीं होती, तब तक भगवान श्यामसुंदर का मन भी वहां नहीं रमता। भक्त राधा जी से आग्रह करता है कि वे भी कृष्ण की इस भक्ति और दिव्यता का रहस्य उजागर करें, ताकि एक सामान्य साधक भी कृष्ण प्रेम का अधिकारी बन सके।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)
ब्रह्म पुराण और विष्णु पुराण के अनुसार, भगवान कृष्ण की आराधना से पूर्व राधा जी का नाम स्मरण करना अनिवार्य माना गया है। राधा नाम की महिमा स्वयं कृष्ण गाते हैं। इस भजन को श्रद्धापूर्वक गाने या सुनने से साधक के हृदय में भक्ति रस का संचार होता है और मानसिक विकारों तथा चिंताओं का समूल नाश होता है।
श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। राधा-कृष्ण भजन के गायन से गृहक्लेश दूर होता है, दांपत्य जीवन में मधुरता आती है और पारिवारिक वातावरण सात्विक बनता है। यदि इसका नियमित संकीर्तन किया जाए, तो साधक को मानसिक एकाग्रता और दिव्य शांति की अनुभूति होती है।
🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)
इस भजन के संकीर्तन के लिए सर्वोत्तम समय प्रातःकाल (ब्रह्ममुहूर्त) अथवा संध्या आरती के समय का है। गायन के समय दीप प्रज्वलित कर, तुलसी दल अर्पित करें और शुद्ध भाव से युगल सरकार (राधा-कृष्ण) की छवि का ध्यान करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
इस भजन के मुख्य आराध्य देव कौन हैं?
इस भजन के मुख्य आराध्य देव युगल सरकार अर्थात भगवान श्री कृष्ण और श्री राधा रानी जी हैं।
राधा-कृष्ण भजन का पाठ किस दिन विशेष रूप से करना चाहिए?
यद्यपि भगवान के नाम संकीर्तन के लिए हर दिन शुभ है, किन्तु एकादशी, पूर्णिमा और शनिवार/रविवार के दिन इसका संकीर्तन विशेष फलदायी माना गया है।
क्या यह भजन पारिवारिक सुख-शांति के लिए सहायक है?
हाँ, राधा-कृष्ण के भक्तिमय भजनों को घर में नियमित रूप से गाने अथवा सुनने से दांपत्य प्रेम बढ़ता है और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।
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