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श्री दुर्गा चालीसा (Shree Durga Chalisa Lyrics in Hindi ) - Anuradha Paudwal Durga Chalisa DURGA KAWACH - Bhaktilok

80 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

 

श्री दुर्गा चालीसा (Shree Durga Chalisa Lyrics in Hindi ) -


॥ चौपाई॥


नमो नमो दुर्गे सुख करनी।

नमो नमो अम्बे दुख हरनी॥

हिंदी में अर्थ –   सुख प्रदान करने वाली मां दुर्गा को मेरा नमस्कार है। दुख हरने वाली मां श्री अम्बा को मेरा नमस्कार है।


निराकार है ज्योति तुम्हारी।

तिहूं लोक फैली उजियारी॥

हिंदी में अर्थ –   आपकी ज्योति का प्रकाश असीम है, जिसका तीनों लोको (पृथ्वी, आकाश, पाताल) में प्रकाश फैल रहा है।


शशि ललाट मुख महाविशाला।

नेत्र लाल भृकुटी विकराला॥

हिंदी में अर्थ –   आपका मस्तक चन्द्रमा के समान और मुख अति विशाल है। नेत्र रक्तिम एवं भृकुटियां विकराल रूप वाली हैं।


रूप मातु को अधिक सुहावे।

दरश करत जन अति सुख पावे॥

हिंदी में अर्थ –   मां दुर्गा का यह रूप अत्यधिक सुहावना है। इसका दर्शन करने से भक्तजनों को परम सुख मिलता है।


तुम संसार शक्ति लय कीना।

पालन हेतु अन्न धन दीना॥

हिंदी में अर्थ –   संसार के सभी शक्तियों को आपने अपने में समेटा हुआ है। जगत के पालन हेतु अन्न और धन प्रदान किया है।


अन्नपूर्णा हुई जग पाला।

तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥

हिंदी में अर्थ –   अन्नपूर्णा का रूप धारण कर आप ही जगत पालन करती हैं और आदि सुन्दरी बाला के रूप में भी आप ही हैं।


प्रलयकाल सब नाशन हारी।

तुम गौरी शिवशंकर प्यारी॥

हिंदी में अर्थ –   प्रलयकाल में आप ही विश्व का नाश करती हैं। भगवान शंकर की प्रिया गौरी-पार्वती भी आप ही हैं।


शिव योगी तुम्हरे गुण गावें।

ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥

हिंदी में अर्थ –   शिव व सभी योगी आपका गुणगान करते हैं। ब्रह्मा-विष्णु सहित सभी देवता नित्य आपका ध्यान करते हैं।


रूप सरस्वती को तुम धारा।

दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा॥

हिंदी में अर्थ –   आपने ही मां सरस्वती का रूप धारण कर ऋषि-मुनियों को सद्बुद्धि प्रदान की और उनका उद्धार किया।


धरा रूप नरसिंह को अम्बा।

प्रकट हुई फाड़कर खम्बा॥

हिंदी में अर्थ –   हे अम्बे माता! आप ही ने श्री नरसिंह का रूप धारण किया था और खम्बे को चीरकर प्रकट हुई थीं।


रक्षा करि प्रहलाद बचायो।

हिरणाकुश को स्वर्ग पठायो॥

हिंदी में अर्थ –   आपने भक्त प्रहलाद की रक्षा करके हिरण्यकश्यप को स्वर्ग प्रदान किया, क्योकिं वह आपके हाथों मारा गया।


लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं।

श्री नारायण अंग समाहीं॥

हिंदी में अर्थ –   लक्ष्मीजी का रूप धारण कर आप ही क्षीरसागर में श्री नारायण के साथ शेषशय्या पर विराजमान हैं।


क्षीरसिन्धु में करत विलासा।

दयासिन्धु दीजै मन आसा॥

हिंदी में अर्थ –   क्षीरसागर में भगवान विष्णु के साथ विराजमान हे दयासिन्धु देवी! आप मेरे मन की आशाओं को पूर्ण करें।


हिंगलाज में तुम्हीं भवानी।

महिमा अमित न जात बखानी॥

हिंदी में अर्थ –   हिंगलाज की देवी भवानी के रूप में आप ही प्रसिद्ध हैं। आपकी महिमा का बखान नहीं किया जा सकता है।


मातंगी धूमावति माता।

भुवनेश्वरि बगला सुखदाता॥

हिंदी में अर्थ –   मातंगी देवी और धूमावाती भी आप ही हैं भुवनेश्वरी और बगलामुखी देवी के रूप में भी सुख की दाता आप ही हैं।


श्री भैरव तारा जग तारिणि।

छिन्न भाल भव दुख निवारिणि॥

हिंदी में अर्थ –   श्री भैरवी और तारादेवी के रूप में आप जगत उद्धारक हैं। छिन्नमस्ता के रूप में आप भवसागर के कष्ट दूर करती हैं।


केहरि वाहन सोह भवानी।

लांगुर वीर चलत अगवानी॥

हिंदी में अर्थ –   वाहन के रूप में सिंह पर सवार हे भवानी! लांगुर (हनुमान जी) जैसे वीर आपकी अगवानी करते हैं।


कर में खप्पर खड्ग विराजे।

जाको देख काल डर भाजे॥

हिंदी में अर्थ –   आपके हाथों में जब कालरूपी खप्पर व खड्ग होता है तो उसे देखकर काल भी भयग्रस्त हो जाता है।


सोहे अस्त्र और त्रिशूला।

जाते उठत शत्रु हिय शूला॥

हिंदी में अर्थ –   हाथों में महाशक्तिशाली अस्त्र-शस्त्र और त्रिशूल उठाए हुए आपके रूप को देख शत्रु के हृदय में शूल उठने लगते है।


नगरकोट में तुम्हीं विराजत।

तिहूं लोक में डंका बाजत॥

हिंदी में अर्थ –   नगरकोट वाली देवी के रूप में आप ही विराजमान हैं। तीनों लोकों में आपके नाम का डंका बजता है।


शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे।

रक्तबीज शंखन संहारे॥

हिंदी में अर्थ –   हे मां! आपने शुम्भ और निशुम्भ जैसे राक्षसों का संहार किया व रक्तबीज (शुम्भ-निशुम्भ की सेना का एक राक्षस जिसे यह वरदान प्राप्त था की उसके रक्त की एक बूंद जमीन पर गिरने से सैंकड़ों राक्षस पैदा हो जाएंगे) तथा शंख राक्षस का भी वध किया।


महिषासुर नृप अति अभिमानी।

जेहि अघ भार मही अकुलानी॥

हिंदी में अर्थ –   अति अभिमानी दैत्यराज महिषासुर के पापों के भार से जब धरती व्याकुल हो उठी।


रूप कराल कालिका धारा।

सेन सहित तुम तिहि संहारा॥

हिंदी में अर्थ –   तब काली का विकराल रूप धारण कर आपने उस पापी का सेना सहित सर्वनाश कर दिया।


परी गाढ़ सन्तन पर जब जब।

भई सहाय मातु तुम तब तब॥

हिंदी में अर्थ –   हे माता! संतजनों पर जब-जब विपदाएं आईं तब-तब आपने अपने भक्तों की सहायता की है।


अमरपुरी अरु बासव लोका।

तव महिमा सब रहें अशोका॥

हिंदी में अर्थ –   हे माता! जब तक ये अमरपुरी और सब लोक विधमान हैं तब आपकी महिमा से सब शोकरहित रहेंगे।


ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी।

तुम्हें सदा पूजें नर नारी॥

हिंदी में अर्थ –   हे मां! श्री ज्वालाजी में भी आप ही की ज्योति जल रही है। नर-नारी सदा आपकी पुजा करते हैं।


प्रेम भक्ति से जो यश गावे।

दुख दारिद्र निकट नहिं आवे॥

हिंदी में अर्थ –   प्रेम, श्रद्धा व भक्ति सेजों व्यक्ति आपका गुणगान करता है, दुख व दरिद्रता उसके नजदीक नहीं आते।


ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई।

जन्म-मरण ताको छूटि जाई॥

हिंदी में अर्थ –   जो प्राणी निष्ठापूर्वक आपका ध्यान करता है वह जन्म-मरण के बन्धन से निश्चित ही मुक्त हो जाता है।


जोगी सुर मुनि क़हत पुकारी।

योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी॥

हिंदी में अर्थ –   योगी, साधु, देवता और मुनिजन पुकार-पुकारकर कहते हैं की आपकी शक्ति के बिना योग भी संभव नहीं है।


शंकर आचारज तप कीनो।

काम अरु क्रोध जीति सब

हिंदी में अर्थ –   शंकराचार्यजी ने आचारज नामक तप करके काम, क्रोध, मद, लोभ आदि सबको जीत लिया।


निशिदिन ध्यान धरो शंकर को।

काहु काल नहिं सुमिरो तुमको॥

हिंदी में अर्थ –   उन्होने नित्य ही शंकर भगवान का ध्यान किया, लेकिन आपका स्मरण कभी नहीं किया।


शक्ति रूप को मरम न पायो।

शक्ति गई तब मन पछतायो॥

हिंदी में अर्थ –   आपकी शक्ति का मर्म (भेद) वे नहीं जान पाए। जब उनकी शक्ति छिन गई, तब वे मन-ही-मन पछताने लगे।


शरणागत हुई कीर्ति बखानी।

जय जय जय जगदम्ब भवानी॥

हिंदी में अर्थ –   आपकी शरण आकार उनहोंने आपकी कीर्ति का गुणगान करके जय जय जय जगदम्बा भवानी का उच्चारण किया।


भई प्रसन्न आदि जगदम्बा।

दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा॥

हिंदी में अर्थ –   हे आदि जगदम्बा जी! तब आपने प्रसन्न होकर उनकी शक्ति उन्हें लौटाने में विलम्ब नहीं किया।


मोको मातु कष्ट अति घेरो।

तुम बिन कौन हरै दुख मेरो॥

हिंदी में अर्थ –   हे माता! मुझे चारों ओर से अनेक कष्टों ने घेर रखा है। आपके अतिरिक्त इन दुखों को कौन हर सकेगा?


आशा तृष्णा निपट सतावें।

मोह मदादिक सब विनशावें॥

हिंदी में अर्थ –   हे माता! आशा और तृष्णा मुझे निरन्तर सताती रहती हैं। मोह, अहंकार, काम, क्रोध, ईर्ष्या भी दुखी करते हैं।


शत्रु नाश कीजै महारानी।

सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी॥

हिंदी में अर्थ –   हे भवानी! मैं एकचित होकर आपका स्मरण करता हूँ। आप मेरे शत्रुओं का नाश कीजिए।


करो कृपा हे मातु दयाला।

ऋद्धि सिद्धि दे करहु निहाला॥

हिंदी में अर्थ –   हे दया बरसाने वाली अम्बे मां! मुझ पर कृपा दृष्टि कीजिए और ऋद्धि-सिद्धि आदि प्रदान कर मुझे निहाल कीजिए।


जब लगि जिऊँ दया फल पाऊँ।

तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊँ॥

हिंदी में अर्थ –   हे माता! जब तक मैं जीवित रहूँ सदा आपकी दया दृष्टि बनी रहे और आपकी यशगाथा (महिमा वर्णन) मैं सबको सुनाता रहूँ।


दुर्गा चालीसा जो नित गावै।

सब सुख भोग परम पद पावै॥

हिंदी में अर्थ –   जो भी भक्त प्रेम व श्रद्धा से दुर्गा चालीसा का पाठ करेगा, सब सुखों को भोगता हुआ परमपद को प्राप्त होगा।


देविदास शरण निज जानी।

करहु कृपा जगदम्ब भवानी॥

हिंदी में अर्थ –   हे जगदमबा! हे भवानी! ‘देविदास’ को अपनी शरण में जानकर उस पर कृपा कीजिए।


श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

प्रस्तुत राधा-कृष्ण भजन "श्री दुर्गा चालीसा (Shree Durga Chalisa Lyrics in Hindi ) - Anuradha Paudwal Durga Chalisa DURGA KAWACH - Bhaktilok" के माध्यम से भक्त और आराध्य के परम संबंध को दर्शाया गया है। वैष्णव संप्रदाय में राधा-कृष्ण का प्रेम लौकिक प्रेम न होकर जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। इस भजन की एक-एक पंक्ति का सार यही है कि भगवान श्री कृष्ण स्वयं राधा रानी के प्रेम के अधीन हैं। बिना राधा के न तो वे मुरली बजाते हैं और न ही गोपी-गोपियों को सुख देते हैं।

भजन के पदों में यह स्पष्ट होता है कि वृंदावन की कुंज गलियों में जब तक 'राधे-राधे' नाम की गूंज नहीं होती, तब तक भगवान श्यामसुंदर का मन भी वहां नहीं रमता। भक्त राधा जी से आग्रह करता है कि वे भी कृष्ण की इस भक्ति और दिव्यता का रहस्य उजागर करें, ताकि एक सामान्य साधक भी कृष्ण प्रेम का अधिकारी बन सके।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

ब्रह्म पुराण और विष्णु पुराण के अनुसार, भगवान कृष्ण की आराधना से पूर्व राधा जी का नाम स्मरण करना अनिवार्य माना गया है। राधा नाम की महिमा स्वयं कृष्ण गाते हैं। इस भजन को श्रद्धापूर्वक गाने या सुनने से साधक के हृदय में भक्ति रस का संचार होता है और मानसिक विकारों तथा चिंताओं का समूल नाश होता है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। राधा-कृष्ण भजन के गायन से गृहक्लेश दूर होता है, दांपत्य जीवन में मधुरता आती है और पारिवारिक वातावरण सात्विक बनता है। यदि इसका नियमित संकीर्तन किया जाए, तो साधक को मानसिक एकाग्रता और दिव्य शांति की अनुभूति होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन के संकीर्तन के लिए सर्वोत्तम समय प्रातःकाल (ब्रह्ममुहूर्त) अथवा संध्या आरती के समय का है। गायन के समय दीप प्रज्वलित कर, तुलसी दल अर्पित करें और शुद्ध भाव से युगल सरकार (राधा-कृष्ण) की छवि का ध्यान करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन के मुख्य आराध्य देव कौन हैं?

इस भजन के मुख्य आराध्य देव युगल सरकार अर्थात भगवान श्री कृष्ण और श्री राधा रानी जी हैं।

राधा-कृष्ण भजन का पाठ किस दिन विशेष रूप से करना चाहिए?

यद्यपि भगवान के नाम संकीर्तन के लिए हर दिन शुभ है, किन्तु एकादशी, पूर्णिमा और शनिवार/रविवार के दिन इसका संकीर्तन विशेष फलदायी माना गया है।

क्या यह भजन पारिवारिक सुख-शांति के लिए सहायक है?

हाँ, राधा-कृष्ण के भक्तिमय भजनों को घर में नियमित रूप से गाने अथवा सुनने से दांपत्य प्रेम बढ़ता है और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 29 Aug 2026

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