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Durga Bhajan Lyrics

अगर माँ ने ममता लुटाई ना होती लिरिक्स (Agar maa ne mamta lutayi na hoti Lyrics in Hindi) - Durga Bhajan - Bhaktilok

106 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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माँ की ममता: एक भक्ति गीत

इस भजन में माँ दुर्गा की ममता और करुणा का बखान किया गया है। भक्तों का हृदय छू लेने वाला गीत।

अगर माँ ने ममता लुटाई ना होतीतो ममतामयी माँ कहाई ना होती.........द्वारे पे आए माँ हमको निहारोसोई हुई तक़दीर संवारोद्वारे पे आए माँ हमको निहारोसोई हुई तक़दीर संवारोअगर माँ की ज्योति जलाई ना होतीतो ममतामयी माँ कहाई ना होतीतो ममतामयी माँ कहाई ना होतीअगर मां ने ममता.......हमें क्या पड़ी है हम तुम्हे मनाएहमारा तो हक़ है की हम रूठ जाएहमें क्या पड़ी है हम तुम्हे मनाएहमारा तो हक़ है की हम रूठ जाएअगर माँ मनाने तू आई ना होतीतो ममतामयी माँ कहाई ना होतीतो ममतामयी माँ कहाई ना होतीअगर मां ने ममता.......फटकार देना माँ दुत्कार देनामगर भोली माँ लाल को प्यार देनाफटकार देना माँ दुत्कार देनामगर भोली माँ लाल को प्यार देनाअगर माँ ने बिगड़ी बनाई ना होतीतो ममतामयी माँ कहाई ना होतीतो ममतामयी माँ कहाई ना होतीअगर मां ने ममता.......

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय माँ की ममता और उसकी महिमा है। भजन में भक्त यह प्रकट करते हैं कि यदि माँ ने हमें अपने वात्सल्य से ना भरा होता, तो वह 'ममतामयी' कैसे कहलातीं। कई स्थानों पर कहा गया है कि अगर माँ की ज्योति, जो जीवन का मार्ग प्रशस्त करने वाली है, ना जलती तो मानवता का उद्धार कैसे होता। एक विशेष उल्लेख जो होने वाला है, वह इस बात का है कि 'हमें क्या पड़ी है हम तुम्हें मनाए,' यह समर्पण और विश्वास दर्शाता है कि माँ की कृपा से ही सब कुछ संभव है। यह भजन भक्तों को माँ के प्रति प्रेम व्यक्त करने के लिए प्रेरित करता है और उनकी आवश्यकताओं और सुख-दुख को माँ की गोद में समर्पित कर देता है।

भजन में भक्त अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करते हुए माँ से अनुरोध करते हैं। 'अगर माँ ने बिगड़ी बनाई ना होती तो ममतामयी माँ कहाई ना होती', यह पंक्ति दर्शाती है कि माँ का प्यार हमें हर कठिनाई से उबारता है। माँ की नकारात्मकता को भी सकारात्मकता में बदलने की क्षमता है। फटकार देने की बात भी एक ऐसी भावना है जो दिखाती है कि माँ का प्यार सच्चा और शुद्ध होता है, जो हमें सही मार्ग की ओर ले जाता है। इस प्रकार से यह भजन भक्तों को यह समझाता है कि माँ का प्यार ही उन्हें आत्मिक सौंदर्य और मानसिक स्थिरता प्रदान करता है।

इस भजन में भक्ति मार्ग का प्रतीक है कि भक्त जब माँ से समर्पित होते हैं, तो हर प्रकार की मुश्किल से उबर जाते हैं। भक्ति केवल प्रार्थना नहीं, बल्कि एक जीवन के प्रति नजरिया है। 'सोई हुई तक़दीर संवारो' यह बताता है कि माँ की कृपा से हमारे भाग्य का पुनर्निमाण संभव है। इस प्रकार की भक्ति हमें यह सिखाती है कि हमें अपने कर्मों को माँ के प्रति समर्पित करना चाहिए, ताकि उनकी ममता और कृपा से हमारे जीवन की हर कठिनाई दूर हो सके।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन हिंदू धर्म में माँ दुर्गा की ममता को संदर्भित करता है, जो भक्तों के लिए असीम प्रेम और संरक्षण का प्रतीक है। पुराणों में माँ दुर्गा को सृष्टि की रक्षक और अंधकार से उजाले की ओर लाने वाली देवी माना गया है। जैसे मां अपने बच्चों की भलाई के लिए समर्पित होती है, ठीक वैसे ही माँ दुर्गा भक्तों के संकटों को दूर करती हैं। यह भजन उनके प्रति असीम श्रद्धा और भक्ति को व्यक्त करता है, जिसे भक्ति और साधना के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। इस भजन का पाठ करने से मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। जब भक्त माँ की ममता का अनुभव करते हैं, तो वो अपने दुख-दर्द को भुलाकर अपनी चिंताओं से मुक्त हो जाते हैं। इससे आत्मबोध और अध्यात्मिक उन्नति में भी सहायता मिलती है। नियमित रूप से इस भजन का गान करने से भक्त के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जप प्रात: या संध्या के समय करना सबसे उपयुक्त होता है। पूजा के समय एक दीप जलाना और माँ के प्रति आराधना करना जरूरी है। एक शुद्ध मन और भावना से भजन का पाठ करें, ताकि माँ की कृपा का पूर्ण अनुभव हो सके। भजन की सही भावना से गान करना आवश्यक है ताकि भक्त का संबंध माँ से दृढ़ हो सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इस भजन का मुख्य उद्देश्य माँ दुर्गा की ममता और स्नेह को अभिव्यक्त करना है। यह भक्तों को उनके प्रेम और संरक्षण के संकल्प के लिए प्रेरित करता है।

क्या इस भजन का पाठ करने से कोई विशेष लाभ होता है?

हाँ, इस भजन का पाठ करने से मानसिक शांति, आत्म-विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है। यह भक्तों के जीवन में खुशियाँ और संतोष लेकर आता है।

इस भजन का सही समय क्या है?

इस भजन का सही पाठ सुबह या शाम के समय करना चाहिए, जब वातावरण शांत और दिव्य हो। इससे भक्त का मन एकाग्रता से भजन गाने में लगा रहता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 27 Aug 2026

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