मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
जगजननी जय जय माँ (Jagjanni jai jai Maa Lyrics in Hindi) -
जगजननी जय जय माँ जगजननी जय जय ॥
भयहारिणि भवतारिणि भवभामिनि जय जय ॥
तू ही सत चित सुखमय शुद्ध ब्रह्मरूपा ।
सत्य सनातन सुंदर परशिव सुर भूपा ॥1॥
आदि अनादि अनामय अविचल अविनाशी ।
अमल अनंत अगोचर अज आनंदराशी ॥2॥
अविकारी अघहारी अकल कलाधारी ।
कर्ता विधि भर्ता हरि हर संहारकारी ॥3॥
तू विधिवधू रमा तू उमा महामाया ।
मूल प्रकृति विद्या तू तू जननी जाया ॥4॥
राम कृष्ण तू सीता वृजरानी राधा ।
तू वाञ्छाकल्पद्रुम हारिणि सब बाधा ॥5॥
दशविद्या नवदुर्गा नाना शस्त्र करा ।
अष्ट मातृका योगिनि नव नव रूप धरा ॥6॥
तू परधामनिवासिनि महाविलासिनि तू।
तू ही श्मशान विहारिणि ताण्डवलासिनि तू ॥7॥
सुर मुनि मोहिनि सौम्या तू शोभाआ्धारा।
विवसन विकट सरूपा प्रलयमयी धारा ॥8॥
तू ही स्नेह सुधामयि तू अति गरलमना ।
रत्नविभूषित तू ही तू ही अस्थितना ॥9॥
मूलाधार निवासिनि इह पर सिद्धिप्रदे ।
कालातीता काली कमला तू वरदे ॥10॥
शक्ति शक्तिधर तू ही नित्य अभेदमयी ।
भेद प्रदर्शनी वाणी विमले वेदत्रयी ॥11॥
हम अति दीन दुखी मां विपत जाल घेरे ।
हैं कपूत अति कपटी पर बालक तेरे ॥12॥
निज स्वभाव वश जननी दया दृष्टि कीजे ।
करुणा कर करुणामयी चरण शरण दीजे ॥13॥
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ
आदिशक्ति माता दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती को समर्पित यह भजन "जगजननी जय जय माँ (Jagjanni jai jai Maa Lyrics in Hindi) - Durga Ma Bhajan - Bhaktilok" जगत जननी की कृपा और महिमा का गान करता है। सनातन परंपरा में स्त्री शक्ति को सृष्टि का आदि कारण माना गया है। इस भजन की एक-एक पंक्ति माता के ममतामयी और दुष्टनाशिनी रूप का वर्णन करती है।
भजन का मूल स्वर माता के प्रति समर्पण का है। जब भक्त माता के चरणों में प्रणाम कर अपनी प्रार्थना रखता है, तो देवी मां उसके समस्त कष्टों को हर लेती हैं। यह भजन साधक के भीतर शक्ति, करुणा, तेज और पवित्रता का संचार करता है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ
देवीभागवत पुराण के अनुसार, माता की उपासना से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की सिद्धि होती है। विशेषकर नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के भजनों का संकीर्तन करने से घर में रिद्धि-सिद्धि और सुख-समृद्धि का वास होता है।
मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। देवी भजनों के संकीर्तन से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है, दरिद्रता का नाश होता है और व्यापार तथा नौकरी में उन्नति के द्वार खुलते हैं। यह जीवन में सुख, शांति और सुरक्षा का अनुभव कराता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि
माता की पूजा के लिए शुक्रवार, अष्टमी तिथि और नवरात्रि का काल सर्वोत्तम है। पूजा स्थान पर लाल फूल, धूप-दीप अर्पित कर मां के सामने घी का अखण्ड ज्योत जलाएं और भक्तिभाव से संकीर्तन करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
मां दुर्गा के भजनों का संकीर्तन विशेष रूप से कब करना चाहिए?
यद्यपि नियमित संकीर्तन उत्तम है, किन्तु शुक्रवार के दिन और शारदीय व चैत्र नवरात्रि के पावन दिनों में मां दुर्गा के भजन असीम सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं।
देवी पूजा में किस रंग के वस्त्रों का उपयोग करना शुभ माना जाता है?
माता दुर्गा और शक्ति स्वरूपा देवी पूजा में लाल, पीले अथवा नारंगी (भगवा) रंग के वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ माना गया है।
क्या देवी उपासना से व्यापारिक बाधाएं दूर होती हैं?
हाँ, मां लक्ष्मी और मां दुर्गा की कृपा से व्यापार में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और आर्थिक तंगी से मुक्ति मिलती है।
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