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Durga Bhajan Lyrics

ओ माँ मेरी पत रखियो सदा लिरिक्स (O Maa Meri Pat Rakhiyo Sada Lyrics in Hindi) - Durga Bhajan - Bhaktilok

76 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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माँ दुर्गा की अनुग्रह: सदा रखिये मेरी पत

इस भजन में माँ दुर्गा की कृपा की याचना है, जो भक्तों के हर दुख का निवारण करती हैं।

ओ माँ मेरी पत रखियो सदा लाटा वालीये दुखिया को पापन को दे दे सहारा तेरा मंदिर है न्यारा मुझे भी दे उजियारा मिटे मन का अंधियारा ओ माँ मेरी ओ माँ मेरी… मोह माया के तोड़ के बंधन तेरे द्वारे आ गई जोगन कोई नही मेरा तेरे सिवा लाटा वालीये कोई नही मेरा…कोई नही मेरा तेरे सिवा लाटा वालीये मे दुखियारी शरण तिहारी झोली है खाली में आयी बन के सवाली ओ माता लाटावाली उचे मंदिरावली ओ मा मेरी पत रखियो सदा लाटावालीये… सुनी सुनी गोद भरे तू माता सब के कष्ट हरे तू कोई nahi मेरा तेरे सिवा लाटावालीये कोई नहीं मेरा-2 तेरे सिवा लाटावालीये पूजा के श्रद्धा के जो फूल लाए वो जो माँगे सो पाए तू बिगड़ी बात बनाए तू सब के भाग्य जगाए ओ मा मेरी पत रखियो सदा लाटावालीये… माता तुहे शक्ति शाली जग मे तेरी ज्योत निराली कोई नहीं मेरा तेरे सिवा लाटावालीये कोई नहीं मेरा-2 तेरे सिवा लाटावालीये युग युग से भक्तो के दुखड़े निवारे शहंशाह आए द्वारे और जैसे अटक नज़ारे तेरी शक्ति से हारे ओ मा मेरी पत रखियो सदा लाटावालीये… दुखियाँ को पापन को दे दे सहारा तू बिगड़ी बात बनाए तू सब के भाग्य जगाए ओ माता लाटावालि ओ उचे मंदिरावाली ओ मा मेरी पत रखियो सदा लाटावालीये… ओ माँ मेरी पत रखियो सदा लाटावालीये दुखिया को पापन को दे दे सहारा तेरा मंदिर है न्यारा मुझे भी दे उजियारा मिटे मन का अंधियारा ओ माँ मेरी ओ माँ मेरी…

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य थीम माँ दुर्गा के प्रति भक्ति और आस्था को दर्शाता है। 'ओ माँ मेरी पत रखियो सदा' लाइन में भक्त ने माँ से प्रार्थना की है कि वह हमेशा उसकी रक्षा करें। भजन में दुखियों और पापियों की मदद का उल्लेख है, जिससे भक्तों की कठिनाइयों के समाधान के लिए माँ की शक्ति का आह्वान किया गया है। भक्त ने अपनी झोली को खाली बताते हुए माँ से अनुरोध किया है कि वह उसे भर दें, जो दर्शाता है कि वह माँ पर निर्भर है। इस संदर्भ में माता का मंदिर, जो 'न्यारा' है, उनकी दिव्यता और अनंत शक्ति को व्यक्त करता है। इसमें मोक्ष की प्राप्ति के लिए मोह-माया के बंधनों को तोड़ने की भी बात की गई है, जो भक्त की सच्ची साधना की ओर इशारा करता है।

भावार्थ के अनुसार, यह भजन उन भक्तों की मनोदशा को व्यक्त करता है, जो अपनी दुर्दशा और कठिनाइयों से अवगत हैं। भक्त कहता है कि 'कोई नहीं मेरा तेरे सिवा,' जो यह दर्शाता है कि उसने सभी आसाओं को त्याग कर केवल माँ की ओर देखा है। यहाँ भक्त ने माँ के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा और विश्वास को व्यक्त किया है। 'सुनी सुनी गोद भरे तू माता' का अर्थ है कि माँ सभी दुखों को har करके भक्तों को आशीर्वाद व समृद्धि देती हैं। इस तरह, यह भजन भक्ति मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है और भक्तों को आंतरिक शक्ति देता है। भक्त की हर शरणागति माँ के दरबार में अपने सुख-दुख को साझा करने का माध्यम बनती है।

यह भजन भक्ति मार्ग (Bhakti Marg) की सार्थकता को प्रकट करता है। इसमें भक्त का आत्मसमर्पण बेहद महत्वपूर्ण है। 'तेरे सिवा' का उच्चारण उन भावनाओं को गहरा करता है, जिनसे भक्त केवल माँ के चरणों में शरण लेते हैं। इस भजन में माँ की शक्ति, कृपा और अनुग्रह की अनंतता को रेखांकित किया गया है। ठीक जैसे पुराणों में माँ दुर्गा को दुर्गम परिस्थितियों में सहायता करने वाली बताया गया है, यह भजन भी उन सभी भक्तों को प्रेरित करता है जो माँ के सामने अपनी समस्याएँ प्रस्तुत कर रहे हैं। अंत में, भक्त की विनम्रता और श्रद्धा केवल यही दर्शाती है कि वह माँ की महानता की अनुभूति और अनुग्रह का चाहत रखता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन व्यापक रूप से माँ दुर्गा के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है, जिन्हें शक्ति और साहस की देवी माना जाता है। पुराणों में माँ दुर्गा के अनेक रूपों का वर्णन किया गया है, जैसे कि दुर्गा सप्तशती में माँ ने असुरों का वध करके संसार को रक्षा दी। काली, पार्वती और दुर्गा के विभिन्न रूप इस भक्ति में समाहित हैं। भक्त इस भजन में माँ से प्रज्वलित होने की कामना करते हैं, जिससे संपूर्ण जीवन में संकटों का निवारण हो सके। यह भजन भक्तों को यह सिखाता है कि जब भी वे दुर्गा के चरणों में आते हैं, उन्हें संतोष और शांति अवश्य मिलती है।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। यह भजन मानसिक और आध्यात्मिक रूप से असाधारण लाभ प्रदान करता है। इसके जाप से मन का शांत होना और तनाव का निवारण होता है। भक्त को आंतरिक शक्ति मिलती है, जिससे वह अपने जीवन की कठिनाइयों का सामना कर सकता है। यह निरंतर पढ़ने से शारीरिक स्वास्थ्य में भी सुधार होता है, और भक्त के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह या शाम को करना अत्यंत फलदायी होता है। ध्यान करते समय एक शुद्ध स्थान पर बैठें, जहाँ आपको शांति मिले। दीया जलाकर श्रद्धा पूर्वक माँ दुर्गा की चित्र की पूजा करें और फूल अर्पित करें। मन को एकाग्र करते हुए इस भजन का उच्चारण करें, जिससे भावनाएँ और अधिक गहन हो सकें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या यह भजन केवल माँ दुर्गा के लिए ही है?

यह भजन पूर्ण रूप से माँ दुर्गा की महिमा और कृपा का गुणगान करता है, जिन्हें शक्ति और साहस की देवी माना जाता है।

क्या मैं इस भजन का जाप अकेले कर सकता हूँ?

जी हाँ, आप इस भजन का जाप अकेले भी कर सकते हैं। यह आपकी व्यक्तिगत भक्ति और साधना का हिस्सा बन सकता है।

इस भजन का पाठ किस समय करना चाहिए?

इस भजन का पाठ सुबह या शाम को, विशेष कर नवरात्रों में करना अधिक प्रभावी होता है, जब माँ दुर्गा की आराधना की जाती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 24 Aug 2026

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