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राम रक्षा स्तोत्र लिरिक्स (Ram Raksha Stotra Lyrics in Hindi) - Ram Raksha Stotra by Anuradha Paudwal - Bhaktilok

78 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

 

राम रक्षा स्तोत्र लिरिक्स (Ram Raksha Stotra Lyrics in Hindi) - Ram Raksha Stotra by Anuradha Paudwal - 

विनियोग:

अस्य श्रीरामरक्षास्त्रोतमन्त्रस्य बुधकौशिक ऋषिः ।

श्री सीतारामचंद्रो देवता ।

अनुष्टुप छंदः। सीता शक्तिः ।

श्रीमान हनुमान कीलकम ।

श्री सीतारामचंद्रप्रीत्यर्थे रामरक्षास्त्रोतजपे विनियोगः ।


अथ ध्यानम्:

ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपदमासनस्थं,

पीतं वासो वसानं नवकमल दल स्पर्धिनेत्रम् प्रसन्नम ।

वामांकारूढ़ सीता मुखकमलमिलल्लोचनम्नी,

रदाभम् नानालंकारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डलम् रामचंद्रम ॥


राम रक्षा स्तोत्रम्:

चरितं रघुनाथस्य शतकोटि प्रविस्तरम् ।

एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम् ॥1॥


ध्यात्वा नीलोत्पलश्यामं रामं राजीवलोचनम् ।

जानकीलक्ष्मणोपेतं जटामुकुटमण्डितं ॥2॥


सासितूणधनुर्बाणपाणिं नक्तंचरान्तकम् ।

स्वलीलया जगत्त्रातुमाविर्भूतमजं विभुम् ॥3॥


रामरक्षां पठेत प्राज्ञः पापघ्नीं सर्वकामदाम् ।

शिरो मे राघवः पातु भालं दशरथात्मजः ॥4॥


कौसल्येयो दृशो पातु विश्वामित्रप्रियः श्रुति ।

घ्राणं पातु मखत्राता मुखं सौमित्रिवत्सलः ॥5॥


जिह्वां विद्यानिधिः पातु कण्ठं भरतवन्दितः ।

स्कन्धौ दिव्यायुधः पातु भुजौ भग्नेशकार्मुकः ॥6॥


करौ सीतापतिः पातु हृदयं जामदग्न्यजित ।

मध्यं पातु खरध्वंसी नाभिं जाम्बवदाश्रयः ॥7॥


सुग्रीवेशः कटी पातु सक्थिनी हनुमत्प्रभुः ।

उरु रघूत्तमः पातु रक्षःकुलविनाशकृताः ॥8॥


जानुनी सेतुकृत पातु जंघे दशमुखांतकः ।

पादौ विभीषणश्रीदः पातु रामअखिलं वपुः ॥9॥


एतां रामबलोपेतां रक्षां यः सुकृति पठेत ।

स चिरायुः सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत् ॥10॥


पातालभूतल व्योम चारिणश्छद्मचारिणः ।

न द्रष्टुमपि शक्तास्ते रक्षितं रामनामभिः ॥11॥


रामेति रामभद्रेति रामचंद्रेति वा स्मरन ।

नरौ न लिप्यते पापैर्भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति ॥12॥


जगज्जैत्रैकमन्त्रेण रामनाम्नाभिरक्षितम् ।

यः कण्ठे धारयेत्तस्य करस्थाः सर्वसिद्धयः ॥13॥


वज्रपञ्जरनामेदं यो रामकवचं स्मरेत ।

अव्याहताज्ञाः सर्वत्र लभते जयमंगलम् ॥14॥


आदिष्टवान् यथा स्वप्ने रामरक्षामिमां हरः ।

तथा लिखितवान् प्रातः प्रबुद्धो बुधकौशिकः ॥15॥


आरामः कल्पवृक्षाणां विरामः सकलापदाम् ।

अभिरामस्त्रिलोकानां रामः श्रीमान स नः प्रभुः ॥16॥


तरुणौ रूपसम्पन्नौ सुकुमारौ महाबलौ ।

पुण्डरीकविशालाक्षौ चीरकृष्णाजिनाम्बरौ ॥17॥


फलमूलाशिनौ दान्तौ तापसौ ब्रह्मचारिणौ ।

पुत्रौ दशरथस्यैतौ भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ ॥18॥


शरण्यौ सर्वसत्वानां श्रेष्ठौ सर्वधनुष्मताम् ।

रक्षःकुलनिहन्तारौ त्रायेतां नो रघूत्तमौ ॥19॥


आत्तसज्जधनुषाविषुस्पृशा वक्ष याशुगनिषङ्गसङ्गिनौ ।

रक्षणाय मम रामलक्ष्मणावग्रतः पथि सदैव गच्छताम ॥20॥


सन्नद्धः कवची खड्गी चापबाणधरो युवा ।

गच्छन् मनोरथान नश्च रामः पातु सलक्ष्मणः ॥21॥


रामो दाशरथी शूरो लक्ष्मणानुचरो बली ।

काकुत्स्थः पुरुषः पूर्णः कौसल्येयो रघूत्तमः ॥22॥


वेदान्तवेद्यो यज्ञेशः पुराणपुरुषोत्तमः ।

जानकीवल्लभः श्रीमानप्रमेयपराक्रमः ॥23॥


इत्येतानि जपन नित्यं मद्भक्तः श्रद्धयान्वितः ।

अश्वमेधाधिकं पुण्यं सम्प्राप्नोति न संशयः ॥24॥


रामं दुर्वादलश्यामं पद्माक्षं पीतवाससम ।

स्तुवन्ति नामभिर्दिव्यैर्न ते संसारिणो नरः ॥25॥


रामं लक्ष्मणपूर्वजं रघुवरं सीतापतिं सुन्दरं,

काकुत्स्थं करुणार्णवं गुणनिधिं विप्रप्रियं धार्मिकम ।

राजेन्द्रं सत्यसंधं दशरथतनयं श्यामलं शांतमूर्तिं,

वन्दे लोकाभिरामं रघुकुलतिलकं राघवं रावणारिम ॥26॥


रामाय रामभद्राय रामचंद्राय वेधसे ।

रघुनाथाय नाथाय सीतायाः पतये नमः ॥27॥


श्रीराम राम रघुनन्दनराम राम,

श्रीराम राम भरताग्रज राम राम ।

श्रीराम राम रणकर्कश राम राम,

श्रीराम राम शरणं भव राम राम ॥28॥


श्रीराम चन्द्रचरणौ मनसा स्मरामि,

श्रीराम चंद्रचरणौ वचसा गृणामि ।

श्रीराम चन्द्रचरणौ शिरसा नमामि,

श्रीराम चन्द्रचरणौ शरणं प्रपद्ये ॥29॥


माता रामो मत्पिता रामचन्द्रः स्वामी,

रामो मत्सखा रामचन्द्रः ।

सर्वस्वं मे रामचन्द्रो दयालुर्नान्यं,

जाने नैव जाने न जाने ॥30॥


दक्षिणे लक्ष्मणो यस्य वामे च जनकात्मज ।

पुरतो मारुतिर्यस्य तं वन्दे रघुनन्दनम् ॥31॥


लोकाभिरामं रणरंगधीरं राजीवनेत्रं रघुवंशनाथं ।

कारुण्यरूपं करुणाकरं तं श्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये ॥32॥


मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम ।

वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीराम दूतं शरणं प्रपद्ये ॥33॥


कूजन्तं रामरामेति मधुरं मधुराक्षरम ।

आरुह्य कविताशाखां वन्दे वाल्मीकिकोकिलम ॥34॥


आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसम्पदाम् ।

लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नमाम्यहम् ॥35॥


भर्जनं भवबीजानामर्जनं सुखसम्पदाम् ।

तर्जनं यमदूतानां रामरामेति गर्जनम् ॥36॥


रामो राजमणिः सदा विजयते,

रामं रमेशं भजे रामेणाभिहता,

निशाचरचमू रामाय तस्मै नमः ।

रामान्नास्ति परायणं परतरं,

रामस्य दासोस्म्यहं रामे चित्तलयः,

सदा भवतु मे भो राम मामुद्धराः ॥37॥


राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे ।

सहस्त्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ॥38॥


श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

प्रस्तुत राधा-कृष्ण भजन "राम रक्षा स्तोत्र लिरिक्स (Ram Raksha Stotra Lyrics in Hindi) - Ram Raksha Stotra by Anuradha Paudwal - Bhaktilok" के माध्यम से भक्त और आराध्य के परम संबंध को दर्शाया गया है। वैष्णव संप्रदाय में राधा-कृष्ण का प्रेम लौकिक प्रेम न होकर जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। इस भजन की एक-एक पंक्ति का सार यही है कि भगवान श्री कृष्ण स्वयं राधा रानी के प्रेम के अधीन हैं। बिना राधा के न तो वे मुरली बजाते हैं और न ही गोपी-गोपियों को सुख देते हैं।

भजन के पदों में यह स्पष्ट होता है कि वृंदावन की कुंज गलियों में जब तक 'राधे-राधे' नाम की गूंज नहीं होती, तब तक भगवान श्यामसुंदर का मन भी वहां नहीं रमता। भक्त राधा जी से आग्रह करता है कि वे भी कृष्ण की इस भक्ति और दिव्यता का रहस्य उजागर करें, ताकि एक सामान्य साधक भी कृष्ण प्रेम का अधिकारी बन सके।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

ब्रह्म पुराण और विष्णु पुराण के अनुसार, भगवान कृष्ण की आराधना से पूर्व राधा जी का नाम स्मरण करना अनिवार्य माना गया है। राधा नाम की महिमा स्वयं कृष्ण गाते हैं। इस भजन को श्रद्धापूर्वक गाने या सुनने से साधक के हृदय में भक्ति रस का संचार होता है और मानसिक विकारों तथा चिंताओं का समूल नाश होता है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। राधा-कृष्ण भजन के गायन से गृहक्लेश दूर होता है, दांपत्य जीवन में मधुरता आती है और पारिवारिक वातावरण सात्विक बनता है। यदि इसका नियमित संकीर्तन किया जाए, तो साधक को मानसिक एकाग्रता और दिव्य शांति की अनुभूति होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन के संकीर्तन के लिए सर्वोत्तम समय प्रातःकाल (ब्रह्ममुहूर्त) अथवा संध्या आरती के समय का है। गायन के समय दीप प्रज्वलित कर, तुलसी दल अर्पित करें और शुद्ध भाव से युगल सरकार (राधा-कृष्ण) की छवि का ध्यान करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन के मुख्य आराध्य देव कौन हैं?

इस भजन के मुख्य आराध्य देव युगल सरकार अर्थात भगवान श्री कृष्ण और श्री राधा रानी जी हैं।

राधा-कृष्ण भजन का पाठ किस दिन विशेष रूप से करना चाहिए?

यद्यपि भगवान के नाम संकीर्तन के लिए हर दिन शुभ है, किन्तु एकादशी, पूर्णिमा और शनिवार/रविवार के दिन इसका संकीर्तन विशेष फलदायी माना गया है।

क्या यह भजन पारिवारिक सुख-शांति के लिए सहायक है?

हाँ, राधा-कृष्ण के भक्तिमय भजनों को घर में नियमित रूप से गाने अथवा सुनने से दांपत्य प्रेम बढ़ता है और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 23 Aug 2026

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