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माँ दुर्गा जी के 108 नाम (Durga ji ke 108 naam Lyrics) - 108 naam Ki Durga Mala By Anuradha Paudwal दुर्गा जी के 108 नाम का कैसे करें इनका जाप - Bhaktilok

154 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
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माँ दुर्गा जी के 108 नाम (Durga ji ke 108 naam Lyrics) - 108 naam Ki Durga Mala By Anuradha Paudwal दुर्गा जी के 108 नाम का कैसे करें इनका जाप - 

माँ दुर्गा जी के 108 नाम (Durga ji ke 108 naam Lyrics) - 108 naam Ki Durga Mala By Anuradha Paudwal दुर्गा जी के 108 नाम का कैसे करें इनका जाप -


माँ दुर्गा जी के 108 नाम (Durga ji ke 108 naam Lyrics) -


दुर्गा जी के 108 नाम का कैसे करें इनका जाप:-

दुर्गा माँ शक्ति का रूप हैं - जो भी भक्तजन माँ को सच्चे मन से उनका स्मरण करते हैं तो माँ उसके सारे कष्टों का निवारण करती हैं | जातक अगर दुर्गा जी के 108 नाम जाप करता है तो उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं | नवरात्रि के सभी नौ दिनों में इन नामों जाप करें तो इसका महत्व और बढ़ जाता है | इस जाप को करने से आपके बिगड़े काम बनने आरंभ हो जाते हैं दुर्गा माँ के नामों का जप करने से मन शांत होता है | साथ ही यदि आप माँ के चरणों में पूर्णतः समर्पित होकर यह जाप जाप करेंगे तो निश्चित ही धन धान्य, कीर्ति में बढ़ोतरी होगी | 


माँ दुर्गा जी के 108 नाम (Durga ji ke 108 naam Lyrics) - 


1.सती

2.साध्वी

3.भवप्रीता

4. भवानी

5. भवमोचनी

6. आर्या

7. दुर्गा

8. जया

9. आद्या

10. त्रिनेत्रा

11. शूलधारिणी

12. पिनाक धारिणी

13. चित्रा

14. चन्द्रघण्टा

15. महातपा

16. मन:

17. बुद्धि

18. अहंकारा

19. चित्तरुपा

20. चिता

21. चिति

22. सर्वमन्त्रमयी

23. सत्ता

24. सत्यानन्द

25. अनन्ता

26. भाविनी

27. भाव्या

28. भव्या

29. अभव्या

30. सदागति

31. शाँभवी

32. देवमाता

33. स्वरुपणी चिन्ता

34. रत्नप्रिया

35. सर्वविद्या

36. दक्षकन्या

37. दक्षयज्ञविनाशिनी

38.अपर्णा

39. अनेकवर्णा

40. पाटला

41. पाटलावती

42. पट्टाम्बरपरीधाना

43. कलमंजीररंजीनी

44. अमेय विक्रमा

45. क्रूरा

46. सुन्दरी

47. सुरसुन्दरी

48. वनदुर्गा

49. मातंगी

50. मतंगमुनिपूजिता

51. ब्राह्मी

52. माहेश्वरी

53. ऎन्द्री

54. कौमारी

55. वैष्णवी

56. चामुण्डा

57. वाराही

58. लक्ष्मी

59. पुरुषाकृति

60. विमला

61. उत्कर्षिनी

62. ज्ञाना

63. क्रिया

64. नित्या

65. बुद्धिदा

66. बहुला

67. बहुलप्रेमी

68. सर्ववाहनवाहना

69. निशुम्भशुम्भहननी

70. महिषासुरमर्दिनी

71. मधुर्कटभहन्त्री

72. चण्डमुण्डविनाशिनी

73. सर्वअसुरविनाशा

74. सर्वदानवघातिनी

75. सत्या

76. सर्वास्त्रधारिणी

77. अनेकशस्त्रहस्ता

78. अनेकास्त्रधारिणी

79. कुमारी

80. एक कन्या

81.कैशोरी

82. युवती

83. यति:

84. अप्रौढ़ा

85. प्रौढ़ा

86. वृद्धमाता

87. बलप्रदा

88. महोदरी

89. मुक्तकेशी

90. घोररुपा

91. महाबला

92. अग्निज्वाला

93. रौद्रमुखी

94. कालरात्रि

95. तपस्विनी

96. नारायणी

97. भद्रकाली

98. विष्णुमाया

99. जलोदरी

100. शिवदूती

101. कराली

102. अनन्ता

103. परमेश्वरी

104. कात्यायनी

105. सावित्री

106. प्रत्यक्षा

107. ब्रह्मवादिनी

108. सर्वशास्त्रमयी

 

🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)

प्रस्तुत राधा-कृष्ण भजन "माँ दुर्गा जी के 108 नाम (Durga ji ke 108 naam Lyrics) - 108 naam Ki Durga Mala By Anuradha Paudwal दुर्गा जी के 108 नाम का कैसे करें इनका जाप - Bhaktilok" के माध्यम से भक्त और आराध्य के परम संबंध को दर्शाया गया है। वैष्णव संप्रदाय में राधा-कृष्ण का प्रेम लौकिक प्रेम न होकर जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। इस भजन की एक-एक पंक्ति का सार यही है कि भगवान श्री कृष्ण स्वयं राधा रानी के प्रेम के अधीन हैं। बिना राधा के न तो वे मुरली बजाते हैं और न ही गोपी-गोपियों को सुख देते हैं।

भजन के पदों में यह स्पष्ट होता है कि वृंदावन की कुंज गलियों में जब तक 'राधे-राधे' नाम की गूंज नहीं होती, तब तक भगवान श्यामसुंदर का मन भी वहां नहीं रमता। भक्त राधा जी से आग्रह करता है कि वे भी कृष्ण की इस भक्ति और दिव्यता का रहस्य उजागर करें, ताकि एक सामान्य साधक भी कृष्ण प्रेम का अधिकारी बन सके।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)

ब्रह्म पुराण और विष्णु पुराण के अनुसार, भगवान कृष्ण की आराधना से पूर्व राधा जी का नाम स्मरण करना अनिवार्य माना गया है। राधा नाम की महिमा स्वयं कृष्ण गाते हैं। इस भजन को श्रद्धापूर्वक गाने या सुनने से साधक के हृदय में भक्ति रस का संचार होता है और मानसिक विकारों तथा चिंताओं का समूल नाश होता है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। राधा-कृष्ण भजन के गायन से गृहक्लेश दूर होता है, दांपत्य जीवन में मधुरता आती है और पारिवारिक वातावरण सात्विक बनता है। यदि इसका नियमित संकीर्तन किया जाए, तो साधक को मानसिक एकाग्रता और दिव्य शांति की अनुभूति होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)

इस भजन के संकीर्तन के लिए सर्वोत्तम समय प्रातःकाल (ब्रह्ममुहूर्त) अथवा संध्या आरती के समय का है। गायन के समय दीप प्रज्वलित कर, तुलसी दल अर्पित करें और शुद्ध भाव से युगल सरकार (राधा-कृष्ण) की छवि का ध्यान करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन के मुख्य आराध्य देव कौन हैं?

इस भजन के मुख्य आराध्य देव युगल सरकार अर्थात भगवान श्री कृष्ण और श्री राधा रानी जी हैं।

राधा-कृष्ण भजन का पाठ किस दिन विशेष रूप से करना चाहिए?

यद्यपि भगवान के नाम संकीर्तन के लिए हर दिन शुभ है, किन्तु एकादशी, पूर्णिमा और शनिवार/रविवार के दिन इसका संकीर्तन विशेष फलदायी माना गया है।

क्या यह भजन पारिवारिक सुख-शांति के लिए सहायक है?

हाँ, राधा-कृष्ण के भक्तिमय भजनों को घर में नियमित रूप से गाने अथवा सुनने से दांपत्य प्रेम बढ़ता है और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 17 Aug 2026

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