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Durga Bhajan Lyrics

श्री दुर्गा स्तुति लिरिक्स (Shree Durga Stuti Lyrics in Hindi) - Ma Durga Stuti - Bhaktilok

102 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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श्री दुर्गा स्तुति: माँ दुर्गा की महिमा

यह स्तुति माँ दुर्गा की असीम कृपा और शक्ति को दर्शाती है। माता की आराधना से परिपूर्ण इस भजन का स्मरण करें।

 श्री दुर्गा स्तुति लिरिक्स (Shree Durga Stuti Lyrics in Hindi) - [ मंत्र ]सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके | शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोऽस्तुते ||जय जग जननी आदि भवानीजय महिषासुर मारिणी मांउमा रमा गौरी ब्रह्माणीजय त्रिभुवन सुख कारिणी मांहे महालक्ष्मी हे महामायातुम में सारा जगत समायातीन रूप तीनों गुण धारिणीतीन काल त्रैलोक बिहारिणीहरि हर ब्रह्मा इंद्रादिक केसारे काज संवारिणी माँजय जग जननी आदि भवानीजय महिषासुर मारिणी मांशैल सुता मां ब्रह्मचारिणीचंद्रघंटा कूष्मांडा माँस्कंदमाता कात्यायनी माताशरण तुम्हारी सारा जहां।।कालरात्रि महागौरी तुम होसकल रिद्धि सिद्धि धारिणी मांजय जग जननी आदि भवानीजय महिषासुर मारिणी मांअजा अनादि अनेका एकाआद्या जया त्रिनेत्रा विद्यानाम रूप गुण कीर्ति अनंतागावहिं सदा देव मुनि संता।अपने साधक सेवक जन परसुख यश वैभव वारिणी मांजय जगजननी आदि भवानीजय महिषासुर मारिणी मां।।दुर्गति नाशिनी दुर्मति हारिणी दुर्ग निवारण दुर्गा मांभवभय हारिणी भवजल तारिणी सिंह विराजिनी दुर्गा मांपाप ताप हर बंध छुड़ाकर जीवो की उद्धारिणी माँजय जग जननी आदि भवानी जय महिषासुर मारिणी मां।*** SINGER - MOHINI DWIVEDI ***

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

श्री दुर्गा स्तुति देवी दुर्गा की अनंत महिमा का गुणगान करती है। इस स्तुति की आरंभिक पंक्तियाँ 'सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सबर्थ साधिके' माँ दुर्गा की समस्त मंगल कामनाओं में सहायक होने का संकेत देती हैं। 'जय जग जननी आदि भवानी' के शब्दों से यह स्पष्ट होता है कि देवी अन्न, संतान, ज्ञान और भक्ति की संरक्षिका हैं। माँ के द्वारा महिषासुर जैसे दुष्टों पर विजय प्राप्त करने की गाथाएँ इस स्तुति में बड़े गर्व के साथ सुनाई जाती हैं। यहाँ देवी की शरण में आने का जो संदेश है, वह बताता है कि माता हमें सभी भयों से मुक्त करने में सक्षम हैं।

इस भजन में विभिन्न रूपों अर्थात 'शैलपुत्री', 'कात्यायनी', 'महागौरी' आदि मातृ स्वरूपों का वर्णन किया गया है। प्रत्येक रूप में देवी का अलग-अलग विशेष कार्य और शक्ति सामने आती है, जैसे 'महाकालरात्रि' जीवन में समस्त कष्टों का नाश करती हैं। इस प्रकार, इस स्तुति में भक्तों का आह्वान किया जाता है कि वे अपनी सभी समस्याओं और दुर्गतियों को दूर करने हेतु माँ दुर्गा का ध्यान करें। भक्तों की मनोकामनाओं का पूर्ति महिला शक्ति के माध्यम से होती है।

श्री दुर्गा स्तुति भक्ति मार्ग की एक सुनहरी कड़ी है। यह भजन देवी की अद्वितीय शक्ति का प्रतीक है जो सृष्टि के त्रासदियों का अंत कर सकती है। 'सिंह विराजिनी दुर्गा मां' की संभावना सन्देश देती है कि देवी की शक्ति हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। इसमें भक्तों की आस्था और श्रद््धा की महत्ता को प्रदर्शित किया गया है। यह भक्ति की खूबसूरत यात्रा है, जिसमें साधक अपने अंतर्मन को जगाता है और माँ दुर्गा के प्रति समर्पित होता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस स्तुति का महत्त्व भारतीय पौराणिक कथाओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। देवी दुर्गा की पूजा का उल्लेख देवी भागवत एवं मार्कंडेय पुराण में मिलता है, जहाँ उन्हें आद्या शक्ति कहा गया है। महिषासुर मर्दिनी की कथा से यह भी प्रमाणित होता है कि उन्होंने दुष्टों का संहार किया और संसार की रक्षा की। इस प्रकार, भक्तों को माँ दुर्गा की स्तुति करना परम विशेष फलदायक माना गया है।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। श्री दुर्गा स्तुति का जाप मानसिक शांति, वस्त्र और धन के सुख प्रदान करता है। इसके निरंतर पाठ से आत्म-संयम में वृद्धि होती है और तनाव एवं चिंता को दूर करने में मदद मिलती है। यह भजन आत्म-विश्वास और साहस प्रदान करता है, सफलताओं का मार्ग प्रशस्त करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस स्तुति का पाठ करने के लिए सुबह के समय उचित रहता है। पूजा स्थान पर स्वच्छता और शांति का ध्यान रखें। दीप जलाएं और माँ दुर्गा के चित्र के सामने बैठें। मन में श्रद्धा और भक्ति भाव रखते हुए इस भजन का गहनता से पाठ करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस स्तुति का पाठ किस समय करना चाहिए?

इस भजन का पाठ सूर्योदय से पूर्व या संध्या काल में करना विशेष लाभकारी होता है, जब मन शांत और निष्कलंक हो।

क्या इस प्रार्थना से किसी विशेष दुःख का निवारण किया जा सकता है?

हाँ, श्री दुर्गा स्तुति का पाठ विशेषतः मानसिक तनाव, पदार्थों की कमी तथा व्यक्तिगत समस्याओं के निवारण हेतु किया जाता है।

क्या यह स्तुति केवल दुर्गा पूजा के समय ही गाई जाती है?

नही, श्री दुर्गा स्तुति का पाठ किसी भी शुभ अवसर पर किया जा सकता है। यह निरंतर संकल्प एवं श्रद्धा के साथ की जा सकती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 25 Aug 2026

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