सनातन श्रेणी संग्रह · पृष्ठ 60
1,240+ पावन रचनाएँ

Krishna Bhajan
पावन भक्ति संग्रह

भक्तिलोक पर Krishna Bhajan के अंतर्गत सभी भक्ति रचनाओं, लोकप्रिय भजनों, आरतियों, चालीसा और मंत्रों का प्रामाणिक संकलन सरल हिंदी भावार्थ एवं शास्त्रीय संदर्भ सहित पढ़ें।

शास्त्र-सम्मत एवं संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

शुद्ध पाठ, व्याकरणिक स्पष्टता, पौराणिक संदर्भ और भावार्थ सहित भक्ति साहित्य।

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Krishna Bhajan परिचय एवं आध्यात्मिक महत्व

सनातन संस्कृति और भक्ति परंपरा में Krishna Bhajan का स्थान अत्यंत पावन है। कलियुग में नाम संकीर्तन और प्रभु वंदना को समस्त क्लेशों से मुक्ति तथा आत्मिक शांति का सबसे सुलभ साधन बताया गया है।

भक्तिलोक के संपादकीय मंडल द्वारा इस संग्रह के प्रत्येक भजन, पद, स्तुति एवं कथा को शुद्धता, व्याकरणिक स्पष्टता, पौराणिक संदर्भ और भावार्थ के साथ प्रस्तुत किया गया है ताकि श्रद्धालुजन सुगमता से भक्ति रस का अनुभव कर सकें।

Krishna Bhajan संग्रह (1240)

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जरूर सुनना ये भजन |Shyam Bhajan 2021| New Superhit Krishna Bhajan 2021| Superhit Bhajan|भजन |bhajan - BhaktiLok

सनातन धर्म की समृद्ध परंपरा में संकीर्तन और भजन गायन को कलयुग में मोक्ष प्राप्ति और मानसिक शांति का सबसे सुगम मार्ग माना गया है। "…

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कान्हा तेरा मंदिर अब मेरा है ये घर भक्ति इन हिंदी लिरिक्स

कान्हा तेरा मंदिर अब मेरा है ये घर भक्ति इन हिंदी लिरिक्सकान्हा तेरा मंदिर अब मेरा है ये घर तू ही नज़र आये देखूं ??

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कान्हा तोहे मईया से पिटवा दूँगी (Kanha Tohe Maiya Se Pitwa Dungi) - Radha Krishna Bhajan - Bhaktilok

"कान्हा तोहे मईया से पिटवा दूँगी" एक अत्यंत लोकप्रिय और भावपूर्ण राधा-कृष्ण भजन है, जो ब्रज की बाल-लीलाओं और राधा-कृष्ण के मधुर प्…

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कन्हैया की याद आ गई लिरिक्स भजन (Kanhaiya Ki Yaad Aa Gayi) - Krishna Bhajan Nand Kishore Sharma - Bhaktilok

 कन्हैया की याद आ गई लिरिक्स भजन (Kanhaiya Ki Yaad Aa Gayi) -कन्हैया की याद आ गईदिल करे मिलने कोलागे ना कहीं मन मन रे चल वृन्…

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कान्हा क्यों चुरा के माखन खावे से (Kanha Kyu Chura Ke Maakhan Khaawe Se) - Krishna Bhajan - Bhaktilok

"कान्हा क्यों चुरा के माखन खावे से" एक अत्यंत लोकप्रिय और हृदयस्पर्शी ब्रजभाषा भजन है, जो भगवान श्री कृष्ण की बाल-लीलाओं और उनकी न…

Krishna Bhajan से जुड़े मुख्य प्रश्न (FAQs)

भगवान कृष्ण के सबसे लोकप्रिय भजनों में "अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं", "यशोमती मैया से बोले नंदलाला", "राधे राधे जपा करो", "मीठे रस से भरोरी राधा रानी लागे", और "हरे कृष्ण महामंत्र" प्रमुख हैं।

कृष्ण भजन और ध्यान के लिए सुबह का ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से पूर्व) एवं संध्या काल सबसे उत्तम माना जाता है, परंतु निष्काम भक्ति और नाम संकीर्तन किसी भी समय किया जा सकता है।

अष्टछाप महाप्रभु वल्लभाचार्य और गोस्वामी विट्ठलनाथ द्वारा स्थापित आठ प्रमुख कृष्णभक्त कवियों का समूह था, जिसमें सूरदास, कुम्भनदास, परमानन्ददास आदि शामिल थे। इन्होंने ब्रजभाषा में मधुर कृष्ण पदों की रचना की।

“हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे, हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे” महामंत्र कलियुग में मानसिक शांति और प्रभु प्राप्ति का सबसे सरल व प्रभावशाली साधन माना गया है।