झूठे सुख को सुख कहे मानत है मन मोद दोहे का अर्थ(Jhuthe Sukh Ko Sukh Kahe Manat Hai Man Mod Dohe Ka Arth in Hindi) - Bhaktilok
महान समाज सुधारक, क्रांतिकारी कवि और निर्गुण भक्ति धारा के प्रणेता संत कबीरदास जी के दोहे केवल साहित्यिक रचनाएँ नहीं हैं, बल्कि वे…