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लट खोल के नाचो मेरी माँ (lat khol ke naacho meri maa lyrics in hindi) - Bhaktilok

4,379 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
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लट खोल के नाचो मेरी माँ (lat khol ke naacho meri maa lyrics in hindi)

लट खोल के नाचो मेरी माँ (lat khol ke naacho meri maa lyrics in hindi) - Bhaktilok


लट खोल के नाचो मेरी माँ

कि नैना रतन जड़े – 2

रतन जड़े रे मैया, रतन जड़े-2

लट खोल के नाचो मेरे माय,कि नैना रतन जड़े,


कौन दये मैया मुंडन माला-2

कौन दिए रे मैया हार,

ओ मैया मोरी कोन दिये रे हार, कि नैना रतन जड़े,


लट खोल के,नाचो मेरी माँ

कि नैना रतन जड़े – 2

रतन जड़े रे मैया, रतन जड़े-2

लट खोल के नाचो मेरे माय,कि नैना रतन जड़े,


महामाया दी मुंडन माल-2

क्षीर सागर दये हार,

ओ मैया मोरी क्षीर सागर दये हार

कि नैना रतन जड़े,


लट खोल के,नाचो मेरी माँ

कि नैना रतन जड़े – 2

रतन जड़े रे मैया, रतन जड़े-2

लट खोल के नाचो मेरे माय,कि नैना रतन जड़े,


कौन दिये री मैया कमल की माला-2

कौन ने धनुष बाण ,

ओ मैया मोरी कोन ने धनुष बाण

कि नैना रतन जड़े,


लट खोल के,नाचो मेरी माँ

कि नैना रतन जड़े – 2

रतन जड़े रे मैया, रतन जड़े-2

लट खोल के नाचो मेरे माय,कि नैना रतन जड़े,


विश्वकर्मा दिए कमल की माला – 2

राम ने धनुष बाण,

ओ मैया मोरी राम ने धनुष-बाण

कि नैना रतन जड़े,


लट खोल के,नाचो मेरी माँ

कि नैना रतन जड़े – 2

रतन जड़े रे मैया, रतन जड़े-2

लट खोल के नाचो मेरे माय,कि नैना रतन जड़े,


कौन दिए रे मैया त्रिशूल भाला-2

कौन दिए तलवार,

ओ मैया मोरी कोन दिए तलवार

कि नैना रतन जड़े,


लट खोल के,नाचो मेरी माँ

कि नैना रतन जड़े – 2

रतन जड़े रे मैया, रतन जड़े-2

लट खोल के नाचो मेरे माय,कि नैना रतन जड़े,


शंकर जी ने मैया त्रिशूल भाला-2

काल ने भेंटी तलवार,

ओ मैया मोरी काल ने भेंटी तलवार

कि नैना रतन जड़े,


लट खोल के,नाचो मेरी माँ

कि नैना रतन जड़े – 2

रतन जड़े रे मैया, रतन जड़े-2

लट खोल के नाचो मेरे माय,कि नैना रतन जड़े,


कौन दिए री मैया चक्र सुदर्शन-2

कौन दिए रे असवार,

ओ मैया मोरी कोन दिये रे असवार

कि नैना रतन जड़े,


लट खोल के,नाचो मेरी माँ

कि नैना रतन जड़े – 2

रतन जड़े रे मैया, रतन जड़े-2

लट खोल के नाचो मेरे माय,कि नैना रतन जड़े,


विष्णु जी ने दिए चक्र सुदर्शन-2

राजा हिमांचल असवार,

ओ मैया मोरी राजा हिमांचल असवार

कि नैना रतन जड़े, लट खोल के…


कौन चमकाए मैया लट्टो की धारा-2

कौन ने नैना लाल,

ओ मैया मोरी कोन ने नैना लाल

कि नैना रतन जड़े,


लट खोल के,नाचो मेरी माँ

कि नैना रतन जड़े – 2

रतन जड़े रे मैया, रतन जड़े-2

लट खोल के नाचो मेरे माय,कि नैना रतन जड़े,


यम चमकाये मैया ने लट्टो की धारा-2

अग्नि ने नैना लाल,

ओ मैया मोरी अग्नि ने नैना लाल

कि नैना रतन जड़े,


लट खोल के,नाचो मेरी माँ

कि नैना रतन जड़े – 2

रतन जड़े रे मैया, रतन जड़े-2

लट खोल के नाचो मेरे माय,कि नैना रतन जड़े,


कब-कब नाची मैया लट्टो को खोल-2

कौन की सुनी रे पुकार ,

ओ मैया मोरी कोन की सुनी रे पुकार,

कि नैना रतन जड़े,


लट खोल के,नाचो मेरी माँ

कि नैना रतन जड़े – 2

रतन जड़े रे मैया, रतन जड़े-2

लट खोल के नाचो मेरे माय,कि नैना रतन जड़े,


दैत्यन मार नाची लट खोल के-2

देवों की सुनो पुकार,

ओ मैया मोरी देवों की सुनी रे पुकार

कि नैना रतन जड़े,


लट खोल के,नाचो मेरी माँ

कि नैना रतन जड़े – 2

रतन जड़े रे मैया, रतन जड़े-2

लट खोल के नाचो मेरे माय,कि नैना रतन जड़े


सुमर सुमर मैया तेरे जैसे गाएं-2,

जग जननी आधार,

ओ मैया मोरी जग जननी आधार

कि नैना रतन जड़े,


लट खोल के,नाचो मेरी माँ

कि नैना रतन जड़े – 2

रतन जड़े रे मैया, रतन जड़े-2

लट खोल के नाचो मेरे माय,कि नैना रतन जड़े



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यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 11 Aug 2026

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(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
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