सर्ग का संक्षिप्त परिचय एवं प्रसंग
प्रसंग सार संक्षेप
राम और रावण के मध्य भीषण युद्ध के पश्चात राम ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कर रावण का वध कर देते हैं। रावण के मरते ही देवतागण पुष्पवर्षा करते हैं और राम की स्तुति करते हैं।
सर्ग की विस्तृत पृष्ठभूमि
आध्यात्मिक व्याख्या एवं कथा
📖 श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण – युद्धकाण्ड – सर्ग ६६
(रावण का वध)
🔆 प्रस्तावना : राम और रावण के बीच घमासान युद्ध चल रहा है। रावण अनेक मायावी अस्त्रों का प्रयोग करता है, किन्तु राम के बाण उन्हें विफल कर देते हैं। अन्ततः राम ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कर रावण का वध कर देते हैं। देवतागण पुष्पवर्षा कर राम की स्तुति करते हैं।
⚔️ राम-रावण अंतिम युद्ध (श्लोक १-१५)
घोररूपं महाभीमं देवासुररणोपमम् ॥
रावणो रथमास्थाय मायाभिः समवस्थितः ।
ववर्ष शरवर्षाणि रामस्योपरि दारुणम् ॥
रामोऽपि रथमास्थाय दिव्येनास्त्रेण राक्षसम् ।
जघान निशितैर्बाणैः कालाग्निसमतेजसा ॥
🏹 ब्रह्मास्त्र का प्रयोग (श्लोक १६-३५)
मन्त्रपूतं महाघोरं रावणान्तकरं तदा ॥
आदित्यमिव तेजोभिः ज्वलन्तं भीमनिस्वनम् ।
संधाय च धनुः श्रेष्ठे मुमोच रिपुहृदये ॥
तदस्त्रं वेगवत् भित्त्वा रावणस्य महोरसम् ।
प्राणानादाय निर्गत्य पुनरायात् धनुः शरम् ॥
🌺 देवताओं की स्तुति (श्लोक ३६-४८)
पुष्पवर्षं प्रकीर्णं च रामस्योपरि चाकिरन् ॥
जय राम जय देवेश जय लोकाभिरक्षक ।
इति वादः सुमधुरः सर्वतः समजायत ॥
🔍 सर्ग का गूढ़ार्थ एवं शिक्षा
📘 गूढ़ार्थ : रावण का वध अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। ब्रह्मास्त्र ब्रह्मज्ञान का प्रतीक है, जो अहंकार (रावण) को नष्ट करता है।
💡 शिक्षा : असीमित बल और माया भी सत्य एवं धर्म के समक्ष टिक नहीं सकते। राम का संयम एवं धर्मपालन ही उनकी विजय का कारण बना।
सर्ग के पावन श्लोक (मूल पाठ व अर्थ)
नीचे महर्षि वाल्मीकि रचित इस सर्ग के सभी श्लोक, उनके मूल देवनागरी छंद, सरल हिंदी अनुवाद एवं व्याख्या सहित प्रस्तुत किए गए हैं।
इस सर्ग के श्लोक वर्तमान में अद्यतन किए जा रहे हैं। कृपया कुछ समय पश्चात देखें।
आचार्य रामानन्द त्रिपाठी
संस्कृत वाङ्मय एवं वाल्मीकि रामायण के शोधार्थी। संदर्भ-आधारित एवं प्रामाणिक ग्रंथों के अध्ययन का २०+ वर्षों का अनुभव।
महंत रामशरण दास
अयोध्या वेद पीठ के वयोवृद्ध धर्माचार्य। उपलब्ध शास्त्रीय संदर्भों के आधार पर सामग्री का अंतिम प्रमाणीकरण।