Punjabi Devi Bhajan

दुलरी हमार छठी माई

45 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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परिचय एवं भक्ति भाव (Lead Overview)

सनातन धर्म और लोक संस्कृति में लोकपर्व 'छठी मईया' की अराधना का विशेष और अद्वितीय स्थान है। विशेष रूप से उत्तर भारत, बिहार, झारखंड, पूर्वांचल और पंजाब के कुछ क्षेत्रों में पूर्ण निष्ठा के साथ मनाए जाने वाले इस महापर्व का यह पावन भजन "दुलरी हमार छठी माई" माँ के प्रति अनन्य प्रेम, वात्सल्य और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। कलयुग में नाम संकीर्तन और देवी स्वरूपा जगत जननी की अराधना को भवसागर पार करने का सुगम साधन बताया गया है। इस भजन की एक-एक पंक्ति में साधक के अंतर्मन का वह भाव छुपा हुआ है, जो अपनी मूल परम सत्ता यानी ममतामयी छठी मईया के सान्निध्य के लिए लालायित रहता है। यह भजन केवल एक गीत नहीं, बल्कि मातृशक्ति और प्रकृति की आराधना का एक ऐसा आध्यात्मिक दस्तावेज है जो श्रोता के हृदय में भक्ति रस और वात्सल्य का अमृत संचार करता है। इस लेख में हम इस भजन के संपूर्ण बोल, उसके गहरे आध्यात्मिक अर्थ, लोक परंपराओं और जीवनोपयोगी संदेशों पर विस्तार से प्रकाश डालेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

भक्ति और पवित्र भाव के साथ 'दुलरी हमार छठी माई' भजन के संपूर्ण बोल का स्मरण करें:


मुखड़ा (Refrain):

दुलरी हमार छठी माई, महिमा अगाध बा,
चरणन में झुके संसार, दर्शन से लागे पार,
छठी माई के दर पे, आवे जो सवाली,
भर जाए झोली सब की, ना रहे कोई खाली।

अंतरा 1:

कार्तिक मास के आई अँजोरिया,
घर-घर गूंजे छठी मईया की कोरिया,
सूर्य देव के अरघ जब हम दीन्हीं,
मैया मोर हर लीन्हीं सब विपत्तियां रीन्हीं।
दउरा सजा के सूप उठाई, घाट पे जाई के महिमा गाई,
दुलरी हमार छठी माई, महिमा अगाध बा।

अंतरा 2:

बालकन के रक्षक तूही प्राण हमारी,
सुख-संपत्ति दाती तूही जग की महतारी,
पर्व ये कठिन बाटे नेम निष्ठा वाला,
भक्ति भाव से सजे घर का हर कोना उजाला।
कोशिश करे जो कोई मन से ध्यावे, मनवांछित फल वो प्राणी पावे,
दुलरी हमार छठी माई, महिमा अगाध बा।

अंतिम चरण (समापन):

अनु दुबे के सुर में गूंजे यह तराना,
छठी मईया के चरणों में है ठिकाना,
सुने जो यह भजन वो ध्यावे मनलाई,
जय छठी मईया! जय छठी मईया!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन साधक और आराध्य के बीच के वात्सल्य संबंध को बहुत ही सुंदर शब्दों में परिभाषित करता है। 'दुलरी' शब्द का अर्थ है अत्यंत दुलारी, प्यारी और लाड़ली। छठी मईया जो कि प्रकृति, स्वास्थ्य, दीर्घायु और संतान रक्षा की अधिष्ठात्री देवी हैं, उन्हें भक्त अपनी परम प्रिय माँ के रूप में देखता है। भजन के प्रथम भाग में कार्तिक मास की स्वच्छता, पवित्रता और उस पावन बेला का वर्णन है जब लाखों व्रती अंचल पसार कर सूर्य देव और छठी मईया की उपासना करते हैं।

भावार्थ के अनुसार, जब मनुष्य अपने अहंकार और सांसारिक दुखों को त्यागकर पूरी निष्ठा से नदी तट पर सूप और दउरा लेकर पहुँचता है, तो छठी मईया उसकी समस्त पीड़ाओं को हर लेती हैं। यह भजन हमें यह सिखाता है कि कठिन व्रतों और नियमों के पीछे का मूल उद्देश्य अंतःकरण की शुद्धि है। जब मन पूरी तरह पवित्र हो जाता है, तो भगवान और माता की कृपा स्वतः ही साधक के जीवन को आलोकित कर देती है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस भजन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सरलता और लोकभाषा की मिठास है। यह केवल पूर्वांचल या बिहार तक सीमित न रहकर पंजाबी देवी भजन और अन्य लोक संगीत परंपराओं में भी अपनी गहरी पैठ बना चुका है। छठी मईया का यह भजन पारिवारिक सुख-शांति, संतान की रक्षा और शारीरिक आरोग्यता प्रदान करने वाला माना जाता है। सनातन संस्कृति में जहाँ पर्वों को केवल उत्सव नहीं बल्कि आत्मसंयम का माध्यम माना गया है, वहाँ यह भजन उत्सव और अध्यात्म का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। इसके नियमित श्रवण से मन की चंचलता समाप्त होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस पावन भजन को विशेष रूप से छठ महापर्व के चार दिनों के दौरान (विशेषकर संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य के समय) गाया जाना अत्यंत फलदायी माना जाता है। इसके अतिरिक्त:

  • प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान-ध्यान के पश्चात मानसिक शांति के लिए इसे सुना जा सकता है।
  • घर में किसी भी मांगलिक उत्सव, बच्चे के जन्म या मुंडन संस्कार के अवसर पर माता के स्मरण हेतु यह उत्तम है।
  • संध्या बेला में दीप प्रज्वलन के समय पारिवारिक संकीर्तन के दौरान इसे सामूहिक रूप से गाया जा सकता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन की मुख्य आराध्य देवी षष्ठी देवी (छठी मईया) हैं, जिन्हें भगवान सूर्य की बहन और प्रकृति की पालक माना जाता है। हिंदू शास्त्रों के अनुसार देवी षष्ठी बालकों की रक्षा करने वाली, आयु और आरोग्य देने वाली प्राणशक्ति हैं। इस भजन के माध्यम से भगवान सूर्य (प्रत्यक्ष देवता) और छठी मईया दोनों की संयुक्त उपासना का संदेश दिया गया है, जो प्रकृति के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का सनातन मार्ग है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

पारंपरिक लोक धुनों और आधुनिक संगीत संयोजन के साथ इस भजन को स्वरबद्ध किया गया है। लोक कलाकरों और गायकों जैसे अनु दुबे (Anu Dubey) द्वारा इसे अपनी मधुर वाणी से सजाया गया है। इसकी पृष्ठभूमि पूरी तरह से लोक संस्कृति, ग्रामीण परिवेश, पारिवारिक जुड़ाव और भारतीय नारी के उच्च त्याग और तपस्या से ओत-प्रोत है, जो हर भारतीय के हृदय को स्पर्श करती है.

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा लोक-संस्कृतनिष्ठ भोजपुरी, हिंदी और अवधी का मिला-जुला सहज रूप है। इसमें रूपक अलंकार और वात्सल्य रस की प्रधानता है। शब्दों का चयन इस प्रकार किया गया है कि बिना किसी कठिन शब्दकोश के सहायता के कोई भी साधारण व्यक्ति इसका अर्थ आसानी से समझ सके। यह लोकगीत शैली की उस समृद्ध परंपरा का हिस्सा है जो पीढ़ियों से मौखिक और संगीतात्मक रूप से चली आ रही है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें निम्नलिखित महत्वपूर्ण जीवन मूल्य सिखाता है:

  1. प्रकृति प्रेम: प्रकृति के तत्वों (जल, सूर्य, पृथ्वी) के प्रति कृतज्ञ होना ही सच्ची पूजा है।
  2. कठोर परिश्रम व अनुशासन: छठ जैसे कठिन व्रत से यह सीख मिलती है कि जीवन में लक्ष्य प्राप्ति के लिए अनुशासन और संयम आवश्यक है।
  3. मातृ शक्ति का सम्मान: समाज में माँ और स्त्री शक्ति के त्याग को सर्वोपरि स्थान देना चाहिए।
  4. शरणागति का भाव: संकट के समय ईश्वर पर अटूट विश्वास रखना ही मनुष्य की सबसे बड़ी ताकत है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / प्रसंग
दुलरी अत्यंत प्रिय, दुलारने योग्य छठी मईया के लाड़ले स्वरूप के लिए
महिमा अगाध जिसकी महिमा अपार हो, जिसका अंत न हो देवी की अनंत शक्ति के वर्णन हेतु
दउरा / सूप बांस से बने पारंपरिक पात्र पूजा सामग्री और प्रसाद रखने का साधन
अँजोरिया चाँदनी रात या शुक्ल पक्ष कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि
अरघ (अर्घ्य) जल अर्पित करना सूर्य देव को समर्पित पवित्र जल

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"दुलरी हमार छठी माई, महिमा अगाध बा..."
यहाँ भक्त कह रहा है कि हे माँ छठी! तू हमारी सबसे दुलारी और प्यारी है, तेरी महिमा अपार और असीम है। तेरे चरणों में संपूर्ण संसार झुकता है और तेरी कृपा मात्र से ही यह भवसागर पार हो जाता है। जो भी सवाली तेरे दरबार में आता है, उसकी झोली कभी खाली नहीं रहती।

"कार्तिक मास के आई अँजोरिया, घर-घर गूंजे छठी मईया की कोरिया..."
जब कार्तिक मास का शुक्ल पक्ष आता है, तो हर घर में छठी मईया के गीत गूंजने लगते हैं। जब हम विधि-विधान से सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं, तो माता हमारी समस्त विपत्तियों और कष्टों को हर लेती हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

छठी मईया की उपासना के समय निम्नलिखित सूर्य मंत्र का स्मरण अत्यंत फलदायी माना जाता है:

"ॐ सूर्याय नमः"

"ॐ षष्ठी देव्यै नमः"

इन मंत्रों के जाप से आरोग्यता और तेज की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही आप गायत्री मंत्र का जाप भी कर सकते हैं।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम दुलरी हमार छठी माई (Dulari Hamar Chhthi Mai)
आराध्य देवी षष्ठी देवी (छठी मईया) एवं सूर्य देव
गायक / कलाकार अनु दुबे (Anu Dubey) एवं पारंपरिक लोक गायक
भाषा भोजपुरी / लोक भाषा / हिंदी
मुख्य विषय छठ महापर्व, वात्सल्य, प्रकृति वंदना
प्रमुख रस भक्ति रस एवं वात्सल्य रस
उपयुक्त अवसर छठ पूजा, कार्तिक शुक्ल षष्ठी, व्रत अनुष्ठान

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन मुख्य रूप से लोक आस्था के महापर्व 'छठ पूजा' (Chhath Puja) से जुड़ा हुआ है, जो कार्तिक मास में मनाया जाता है।

इस पावन भजन को प्रसिद्ध लोक गायिका अनु दुबे (Anu Dubey) और अन्य पारंपरिक कलाकारों द्वारा स्वरबद्ध किया गया है।

छठी मईया (षष्ठी देवी) भगवान सूर्य की बहन और संतानों की रक्षा करने वाली, आयु, स्वास्थ्य तथा आरोग्यता प्रदान करने वाली लोक माता हैं।

हाँ, यह भोजपुरी और हिंदी के साथ-साथ कई अन्य क्षेत्रीय लोक शैलियों और पंजाबी देवी भजन के रूप में भी बहुत पसंद किया जाता है।

इसके श्रवण से मन को शांति मिलती है, कुल और संतान की रक्षा होती है तथा प्रकृति के प्रति सकारात्मक भाव जागृत होता है।

सूर्य देव प्रत्यक्ष देवता हैं जो समस्त जीवन को ऊर्जा, आयु और आरोग्य प्रदान करते हैं। उनकी कृपा के बिना जीवन की कल्पना असंभव है।

इसे विशेष रूप से छठ पर्व के दौरान सुबह और शाम के समय या घर में शांति के क्षणों में भक्ति भाव से सुनना चाहिए।

अवश्य! इसकी सरल शब्दावली और मधुर लय के कारण बच्चों को सनातन संस्कृति और लोक परंपराओं से जोड़ने के लिए यह बहुत उपयुक्त है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री सनातन धर्म की लोक परंपराओं, लोकगीतों और क्षेत्रीय मान्यताओं के आधार पर तैयार की गई है। इसमें प्रयुक्त सभी शब्द और भाव पारंपरिक लोक साहित्य के अनुरूप हैं।
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक लोकगीत एवं छठी मईया संकीर्तन ग्रंथ
  • पूर्वांचल एवं बिहार की लोकसंस्कृति और व्रत कथाएं
  • सनातन पंचांग एवं कार्तिक मास व्रत विधान

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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