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भक्ति रस काव्य व भजन

Shyam Sarkar (श्याम सरकार ) Bhajan by Harsh Vashisht करम करते हैं जब बाबा तो पुश्तें तार देते हैं - BhaktiLok

54 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
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Shyam Sarkar (श्याम सरकार ) Bhajan by Harsh Vashisht करम करते हैं जब बाबा तो पुश्तें तार देते हैं - BhaktiLok




Shyam Sarkar (श्याम सरकार ) Bhajan by Harsh Vashisht करम करते हैं जब बाबा तो पुश्तें तार देते हैं



यूँ तो क्या क्या नज़र नहीं आता कोई बाबा सा नज़र नहीं आता झोलियाँ सबकी भर दी जाती हैमगर देने वाला श्याम बाबा नज़र नहीं आता ओ प्रेमी जो भी मांगते हैं श्याम सर्कार देते हैं करम करते हैं जब बाबा तो पुश्तें तार देते हैं सजाते हैं जो बाबा को उन्हें बाबा सजाते हियँ रिझाते हैं जो बाबा को उन्हें सारे रिझाते हियँ शहंशाह है त्रिलोकी का ठाठ और बाट देते है करम करते हैं जब बाबा तो पुश्तें तार देते हैं ओ प्रेमी जो भी मांगते हैं .................. जो खाता ठोकर दुनिया की उसे बाबा संभाले हैं कोई ना जिसका होता है गले उसको लगाते हैं करिश्मा श्याम प्रभु का ये भगत महसूस करते हैं करमा करते हैं जब बाबा तो पुश्तें तार देते हैं ओ प्रेमी जो भी मांगते हैं .................. वो अपने प्रेमी की खातिर वो करता लीले की असवारी जब जब भीड़ पड़ी भक्तों पर आ जाते हैं तीन बाणधारी ओ दिखता नहीं है पर बाबा वो रक्षा सब की करते हैं करम करते हैं जब बाबा तो पुश्तें तार देते हैं ओ प्रेमी जो भी मांगते हैं .................. नमन करता हूँ मैं बाबा मुझे तेरी आस है गुज़ारा प्रेमियों का तू प्रेमियूं की तू जान है वो कहता हर्ष दीवाना ये श्याम सब वार देते हैं करम करते हैं जब बाबा तो पुश्तें तार देते हैं ओ प्रेमी जो भी मांगते हैं ..................




🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "Shyam Sarkar (श्याम सरकार ) Bhajan by Harsh Vashisht करम करते हैं जब बाबा तो पुश्तें तार देते हैं - BhaktiLok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 10 Aug 2026

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