Ram Navami Special

चंदन के पलने में झूले रघुराई | ChandanKe Palne Mein Jhule Raghurai | RamBhajan triptishakya ram navami - Bhaktilok

75 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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भगवान श्री रामचंद्र जी के बाल स्वरूप को समर्पित यह भजन "चंदन के पलने में झूले रघुराई" सनातन धर्म की वात्सल्य भक्ति का एक अनुपम उदाहरण है। राम नवमी के पावन पर्व पर जब भक्त अपने आराध्य के जन्मोत्सव को मनाते हैं, तब यह भजन साकेत लोक की दिव्य चेतना को पृथ्वी पर अवतरित करने का माध्यम बनता है। गोस्वामी तुलसीदास जी की भक्ति परंपरा में राम केवल राजा नहीं, अपितु भक्त के हृदय में विराजमान 'बालक राम' हैं। इस भजन का गायन मन को शांत करता है और साधक को मर्यादा पुरुषोत्तम के उस कोमल स्वरूप से जोड़ता है, जहाँ ईश्वर स्वयं भक्त के प्रेम के बंधन में बंधकर झूलते हैं। यह भजन न केवल एक संगीतमय प्रस्तुति है, बल्कि यह शरणागति और वात्सल्य भाव का एक आध्यात्मिक अनुष्ठान है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

चंदन के पलने में झूले रघुराई,
झूले रघुराई, मेरे प्रभु जी की आई बधाई।
चंदन के पलने में झूले रघुराई॥

रेशम की डोरी, मोती जड़ित पलना,
झूला झुलावे कौशल्या माई।
चंदन के पलने में झूले रघुराई॥

देवता आए, पुष्प बरसाए,
गगन से गूँजी मधुर शहनाई।
चंदन के पलने में झूले रघुराई॥

भक्तों के मन में आनंद छायो,
राम नाम की महिमा गाई।
चंदन के पलने में झूले रघुराई॥

तुलसी के प्रभु, भक्तन के स्वामी,
सबके हृदय में बसें रघुराई।
चंदन के पलने में झूले रघुराई॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन में माता कौशल्या द्वारा प्रभु श्री राम को चंदन के बने पालने में झुलाने का दृश्य अत्यंत भावपूर्ण है। 'चंदन' शीतलता और पवित्रता का प्रतीक है, जो प्रभु के शांत और शीतल स्वभाव को दर्शाता है। रेशम की डोरी और मोती जड़ित पलना यह संकेत देता है कि ईश्वर का स्वागत करने के लिए भक्त अपनी सर्वोत्तम श्रद्धा और प्रेम को समर्पित करता है। जब भगवान का जन्म होता है, तो केवल पृथ्वी ही नहीं, अपितु संपूर्ण ब्रह्मांड आनंदित हो उठता है। देवताओं द्वारा पुष्प वर्षा और आकाश से गूँजती शहनाई यह दर्शाती है कि राम का अवतरण धर्म की स्थापना और अधर्म के विनाश का सूचक है। भक्त के लिए राम का नाम ही संसार का सबसे बड़ा आधार है, और इस भजन का भाव यही है कि जो प्रभु ब्रह्मांड के स्वामी हैं, वे भक्त के प्रेम के वशीभूत होकर उसके हृदय रूपी पालने में झूलने को तैयार हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • वात्सल्य भाव: यह भजन भगवान के प्रति माता के प्रेम और भक्त के समर्पण को दर्शाता है।
  • राम नवमी का उत्सव: राम नवमी के दिन इस भजन का विशेष महत्व है, क्योंकि यह प्रभु के जन्म के आनंद को व्यक्त करता है।
  • आध्यात्मिक शांति: इस भजन के शब्दों में एक विशेष लय है जो मन को एकाग्र करने में सहायक है।
  • धर्म की स्थापना: यह भजन स्मरण कराता है कि राम का जन्म लोक कल्याण के लिए हुआ था।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को राम नवमी के शुभ अवसर पर, घर में होने वाले सत्संग में, या नित्य पूजा के समय गाया जा सकता है। इसे गाते समय मन में प्रभु के बाल स्वरूप का ध्यान करना चाहिए। यदि संभव हो, तो राम नवमी के दिन पालना सजाकर इस भजन को गाते हुए प्रभु को झूला झुलाना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द सरल अर्थ संदर्भ
रघुराई रघुवंश के स्वामी (श्री राम) प्रभु का संबोधन
पलना झूला बाल स्वरूप का प्रतीक
बधाई शुभ समाचार/उत्सव जन्म का आनंद
गगन आकाश ब्रह्मांडीय उत्सव

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम चंदन के पलने में झूले रघुराई
आराध्य भगवान श्री राम
मुख्य भाव वात्सल्य एवं भक्ति
उपयुक्त अवसर राम नवमी, जन्मोत्सव
भाषा हिंदी/अवधी मिश्रित

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

राम नवमी प्रभु श्री राम का जन्मोत्सव है, और यह भजन उनके बाल स्वरूप के आनंद को समर्पित है, जो उत्सव के भाव को बढ़ाता है।

हाँ, इसे घर पर पूजा के दौरान या परिवार के साथ मिलकर गाना अत्यंत शुभ और भक्तिपूर्ण होता है।

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समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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