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गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु गुरुर देवो महेश्वरा (Gurur Brahma Gurur Vishnu Lyrics in Hindi)

1,294 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

सम्पूर्ण मूल पाठ एवं पवित्र श्लोक

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु गुरुर देवो महेश्वरा (Gurur Brahma Gurur Vishnu Lyrics in Hindi)

प्रस्तावना एवं परिचय

आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा और व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। कहते है कि इसी पूर्णिमा पर महर्षि वेद व्यास का जन्म हुआ था। यही वजह है कि इनकी जयंती के कारण ही गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है। वेद व्यास जी को वेदों का ज्ञान था। इसलिए उनका नाम वेदव्यास पड़ा। महाभारत जैसे श्रेष्ठ ग्रंथ की रचना भी उन्होंने ही की थी। इस दिन लोग अपने गुरू की पूजा करते है और उन्हें आदर-सम्मान के साथ कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। दरअसल गुरू के लिए कहा गया है कि गुरु ब्रह्मा है, गुरु विष्णु है, गुरु ही शंकर है व गुरु ही साक्षात परब्रह्म है और उन्हीं सद्गुरु को हम प्रणाम करते हैं।
आपको बता दें कि पुराणों की कुल संख्या 18 है और उन सभी 18 पुराणों के रचयिता महर्षि वेदव्यास को माना जाता है। इन्होंने वेदों को विभाजित किया है, जिसके कारण इनका नाम वेदव्यास पड़ा था। वेदव्यास जी को आदिगुरु भी कहा जाता है इसलिए गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।

Gurur Brahma Gurur Vishnu Lyrics in English :- 

GururBrahma GururVishnu GururDevo Maheshwaraha
Guru Saakshaat ParaBrahma Tasmai Sri Gurave Namaha

Gurur Brahma Gurur Vishnu Lyrics in Sanskrit :-

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु र्गुरुर्देवो महेश्वरः
गुरु साक्षात परब्रह्मा तस्मै श्रीगुरवे नमः

Gurur Brahma Gurur Vishnu Meaning in English :- 

Guru is the Creator (Brahma), Guru is the Preserver(Vishnu), Gurudeva is Destroyer(Maheshwara)
Guru is the absolute (singular) Lord himself, Salutations to that Sri Guru

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गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु गुरुर देवो महेश्वरा

गुरुः साक्षात्परब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नमह।

ज्ञान ना उपजे गुरु बिना बिन गुरु भक्ति ना होय

मन का शंशय ना मिटे बिन गुरु मुक्ति ना होय।

गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु गुरुर देवो महेश्वरा

गुरुः साक्षात्परब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नमह।

समदर्शी गुरु एक है देता विद्या ज्ञान,

छल कपट रखता नहीं, और नहीं अभिमान

गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु गुरुर देवो महेश्वरा

गुरुः साक्षात्परब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नमह।

कृपा गुरु की जब होवे नर नारायण जान

गुरु है ब्रह्मा गुरु है विष्णु गुरु को शिव तू मान

गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु गुरुर देवो महेश्वरा

गुरुः साक्षात्परब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नमह। 

  • Song - Swar Samadhi-Guru Brahma
  • Album - Guru Tattva
  • Singer -Saket Kakkar
  • Lyrics: Traditional.
  • The Art Of Living

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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

शिरडी के साईं बाबा को समर्पित यह भजन "गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु गुरुर देवो महेश्वरा (Gurur Brahma Gurur Vishnu Lyrics in Hindi)" सबका मालिक एक होने के सिद्धांत को प्रतिपादित करता है। साईं बाबा का जीवन काल सादगी, प्रेम, सहिष्णुता और मानवता का संदेश देता है। इस भजन की सरल पंक्तियां भक्त को सीधे बाबा के दिव्य आशीर्वाद और करुणा से जोड़ती हैं।

भजन का मुख्य भाव श्रद्धा और सबूरी (धैर्य) का है। साईं बाबा अपने भक्तों को वचन देते हैं कि जो भी उनके द्वार पर आएगा, वह कभी खाली हाथ नहीं जाएगा। बाबा की उदी (भस्म) और उनके वचनों का स्मरण ही इस भजन का सार है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

साईं बाबा के भजनों के संकीर्तन से भक्तों के मन में धर्म-जाति के भेद से ऊपर उठकर प्राणी मात्र के प्रति प्रेम की भावना जागृत होती है। बाबा की पूजा में सादगी और शुद्ध अंतःकरण का विशेष महत्त्व है।

संतों और ऋषियों के आध्यात्मिक इतिहास की गहरी समझ के लिए संत एवं ऋषि ज्ञानकोश अवश्य पढ़ें। साईं बाबा के भजन से पारिवारिक शांति प्राप्त होती है, मन के द्वेष और कलह दूर होते हैं और साधक में संतोष तथा धैर्य का विकास होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

साईं बाबा की आराधना के लिए गुरुवार का दिन विशेष रूप से फलदायी है। साईं बाबा की मूर्ति या चित्र के सम्मुख दीप जलाकर, उदी का तिलक लगाएं और श्रद्धापूर्वक भजन गाएं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

शिरडी साईं बाबा की उपासना के दो मुख्य स्तंभ क्या हैं?

बाबा ने अपने भक्तों को 'श्रद्धा' (विश्वास) और 'सबूरी' (धैर्य) को जीवन का मूल आधार बनाने की शिक्षा दी थी।

साईं भजनों के संकीर्तन के लिए कौन सा दिन उत्तम है?

गुरुवार (गुरु दिवस) का दिन साईं बाबा के पूजन, व्रत और भजन संकीर्तन के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।

साईं बाबा की 'उदी' का क्या महत्त्व है?

उदी बाबा की धूनी की पवित्र भस्म है। भक्तों का अटूट विश्वास है कि उदी धारण करने से शारीरिक बीमारियां और मानसिक कष्ट दूर होते हैं।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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