Shyam Bhajan

अलबेलो श्रृंगार | सबको पालनहार बैठ्यो बन ठन के Albelo Shringar Lyrics in Hindi | Khatu Shyam Bhajan by Padma Sahu - BhaktiLok

74 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

खाटू श्याम का अलबेलो श्रृंगार: भक्ति में लीन

श्री खाटू श्याम जी के इस भजन का श्रवण करें और अपने मन को भक्ति में डुबो दें।

अलबेलो श्रृंगार, सबको पालनहार, बैठ्यो बन ठन के श्री खाटू श्याम जी, गावत आरा, तेरा ही सदा, हर तराफ़ पे है जि़ंदगी की पौध, तेरी महिमा का बखान करूँ, हर चौराहे पे ऐ गली, सजेन सधन में, श्री श्याम की बखान करूँ, खुश होकर अब सारा जग, पंछी बोलो सच्चा कर्म करूँ, सुन ले सब पंछी देखो ये खुदा, सदा सच्चा प्यार करूँ। जीवन में खामोशी, बस तेरा साज सहे, तेरा ही साथ है बस कोई तेरा न साथी। तुझसे मिलकर बहुत खुश होते हैं, सही प्यार की शांति पाते हैं, तेरा श्रृंगार सब को भाता है, तेरा रूप सच्चा, तू सच्चा जीवन सथा है। योगी, साधक, भक्त जो तेरा नारा लगाते हैं, तू ख़ुदा दर बार पर आता है, ओ अलबेलो, तेरा नाम सुनते ही मन भक्ति में लीन हो जाता है। जीवन की हँसी तुझमें बसी है राधा रुक्मिणी, तेरा ही साज सहे। संसार के दुःख के भले जो तेरा नाम ले, भक्ति की भांति सदा जीता है। सच्चा पत्थर तेरे ही दर पर, सद्भावना दे, तेरा ही इसे प्यार दे।
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन 'अलबेलो श्रृंगार' में श्री खाटू श्याम जी की विशाल महिमा का वर्णन किया गया है। प्रारंभ में, भजन की पंक्तियाँ इस बात पर जोर देती हैं कि कैसे खाटू श्याम सभी जीवों के पालनहार हैं। उनका रूप, जिसे 'अलबेलो श्रृंगार' के रूप में दर्शाया गया है, समस्त संसार के लिए एक आकर्षण का केंद्र है। इस शीषक में भक्त अपने हृदय की गहराई से एक ऐसे deity की महिमा का बखान कर रहे हैं, जो सबके दुःख-दर्द को दूर करने में सहायक है। उनके प्रति अपार प्रेम और श्रद्धा व्यक्त करते हुए, भक्त इस अद्वितीय प्रेम को अनुभव करने की प्रेरणा प्राप्त करते हैं। हर पंक्ति में भक्ति का संदेश सुनाई देता है, जो न केवल भगवान के रूप की सुंदरता को प्रकट करता है, बल्कि यह भी बताता है कि वस्तुतः सच्चा प्रेम और भक्ति किस प्रकार जीवन के उद्देश्य को निर्धारित करती है।

भजन में वर्णित भावनाएँ भक्त की आस्था को उजागर करती हैं। 'ज़िंदगी की पौध' और 'सच्चा प्यार' जैसे शब्द यह दर्शाते हैं कि भगवान के साथ का सम्बन्ध जीव के जीवन के हर उतार-चढ़ाव में एक स्थायी आधार प्रदान करता है। जब भक्त कहता है, 'तेरे बिना हम सब अधूरे हैं,' तो वे केवल भगवान की महानता को नहीं, बल्कि अद्वितीय प्रेम को भी दर्शाते हैं। यह प्रेम एक अदृश्य बंधन बना देता है जो उन्हें व्यक्ति और ईश्वर के बीच एकट्ठा करता है। सच्चे प्रेम के सहारे, भक्त जीवन की कठिनाइयों को सहन करने की क्षमता प्राप्त करते हैं, और हर समय भगवान के प्रति अपनी भक्ति को बनाए रखते हैं।

भक्ति का मार्ग इस भजन में विशेष रूप से स्पष्ट है। भक्त की भावना और श्याम जी के प्रति सच्ची भक्ति की अभिव्यक्ति एक अन्य महत्वपूर्ण तत्व है। भजन जो कि ध्यान के रूप में प्रस्तुत किया गया है, यह बताता है कि भक्ति कैसे केवल शब्दों का संकलन नहीं बल्कि एक जीवन शैली है। यह ना केवल कला, संगीत, और श्रृंगार का प्रस्तुतिकरण करती है, बल्कि इससे आंतरिक शांति और समर्पण की गहरी भावना का भी सृजन होता है। भक्ति मार्ग में दृष्यमान और अदृष्यमान दोनों प्रकार की इबादत शामिल है, और इस भजन के माध्यम से भक्त अपने हृदय की गहराइयों तक पहुँचते हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

भजन का आध्यात्मिक पृष्टभूमि भारतीय पुराणों में गहराई से जुड़ी हुई है। खाटू श्याम जी का स्थान और उनका अद्वितीय लीलाएँ रामायण और महाभारत में वर्णित हैं। कहा जाता है कि उनका रूप 'कृष्ण' और 'श्याम' का संयोजन है, जो प्रेम, करुणा और सुरक्षा का प्रतीक है। इस भजन का संदर्भ हिंदू धर्म के अनगिनत भक्तों के लिए एक प्रेमचिह्न है और वे इसे अपनी जीवनशैली में शामिल कर जीवन के सभी क्षेत्रों में ईश्वर के प्रति समर्पण को महसूस करते हैं। यह भजन भक्तों में शांति और संतोष का संचार करता है, और इसलिए बहुतायत में इसकी प्रस्तुति की जाती है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का पाठ करने से मानसिक शांति, आत्मिक संतोष और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। यह भक्ति से मन को स्थिर करता है और श्री खाटू श्याम जी की कृपा से जीवन में खुशियाँ भरता है। नियमित श्रवण से तनाव और चिंता में राहत मिलती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह के समय या शाम के समय करना विशेष फलदायी होता है। ध्यान करते समय, एक साफ स्थान पर बैठकर दीप जलाएं और पुष्प चढ़ाएं। मन को शांति में लाकर, श्री खाटू श्याम जी का नाम लेते हुए भजन का उच्चारण करें। यह ध्यान और भजन को एक विशेषता प्रदान करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन में खाटू श्याम जी की महिमा क्यों गाई गई है?

खाटू श्याम जी की महिमा इस भजन में उनके पालन हार और विश्व कल्याणकारी स्वरूप को दर्शाने के लिए गाई गई है। भक्त उनके रूप और उनके गुणों की जयकार करते हैं।

भजन का पाठ करने का सही समय क्या है?

भजन का पाठ सुबह या शाम के समय करना उचित होता है। इस समय भक्त मन को शांति में लाकर भजन का पाठ कर सकते हैं।

क्या इस भजन का पाठ करने से कोई विशेष लाभ होता है?

हाँ, इस भजन का नियमित पाठ मानसिक शांति, सुख और एवं संतोष प्रदान करने के लिए जाना जाता है। यह भक्तों को ईश्वरीय कृपा का अनुभव कराता है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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