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श्री रामचंद्र कृपालु भजमन (Shri Ram Chandra Kripalu Bhajman) - Raju Mehra Ram Stuti - Bhaktilok

100 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

श्री राम चंद्र कृपालु की प्रार्थना

इस भजन के ऊँचे भाव से श्री राम का स्मरण करें और अपनी साँसे राम भक्ति में ढालें।

श्री रामचंद्र कृपालु भजमन। हरण भवभय दारुणं। रामायण की कथा सुनाय। चित्त में रंगे भजन गाय। श्री रामचंद्र कृपालु भजमन। चरणों में लीन रहूं मेरा। भक्ति में साजे मन मेरा। राम रति सुमिरन करूं। भव बंधन को चूर करूं। श्री रामचंद्र कृपालु भजमन। सीता राम की कृपा से। मिटा देता सब संकट ये। ये तो हैं सच्चे सुखदाता। मन में जगाकर राम न याद। श्री रामचंद्र कृपालु भजमन। माया-मोह से तजना होगा। राम-कथा में मन हरना होगा। भक्ति में रात्रि दिन बिताई। राम की संगत सब सुखदाई। श्री रामचंद्र कृपालु भजमन। भक्तों का धर्म है भक्ति में। सुख सब मिले बिन संकोच में। करो ध्यान और बस राम याद। भक्ति से ही जीवन होगा बड़ाद। श्री रामचंद्र कृपालु भजमन। दुस्तर भव की राजनीति। राम भक्तों का साथ मिलता। श्री राम के चरणों में जो है। वो पाता परम सुख तृप्ति। श्री रामचंद्र कृपालु भजमन।
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

श्री रामचंद्र कृपालु भजमन भजन में भक्त का समर्पण और श्री राम के प्रति अपार श्रद्धा प्रदर्शित की गई है। पहले पद में श्री राम का गुणगान करते हुए कहा गया है कि उन्होंने भौतिक और आध्यात्मिक समस्याओं से मुक्ति दिलाई है। ‘हरण भवभय दारुणं’ का अर्थ है कि वे सभी प्रकार के भय और संकटों को हर लेते हैं। इस संबंध में यह स्पष्ट है कि भक्ति के माध्यम से भक्त को अनेक प्रकार की मानसिक और भौतिक कठिनाइयों से पार पाया जा सकता है। भजन का आगे में 'रामायण की कथा सुनाय, चित्त में रंगे भजन गाय' में यह संदेश है कि श्री राम की कथा सुनने और गाने से मन को आनंद और शांति मिलती है।

भावार्थ में यह स्पष्ट है कि श्री राम के चरणों में लीन होते हुए भक्त का मन भक्ति में डूब जाता है। 'भक्ति में साजे मन मेरा' से यह संकेत मिलता है कि भक्ति का साधन मन को शुद्ध करता है और जीवन को सुखमय बनाता है। भक्त के लिए यह अनिवार्य है कि वह 'राम रति सुमिरन करूं' का ध्यान रखे, ताकि संसारिक बंधनों का चूर होना संभव हो सके। यह भक्ति भक्त को संतोष और आंतरिक शक्ति प्रदान करती है, जिससे वह जीवन के विभिन्न संकटों का सामना कर सके।

इस भजन में भक्ति मार्ग का महत्व और श्री राम की दिव्यता को विशेष महत्व दिया गया है। ‘माया-मोह से तजना होगा’ का इंगित यह है कि भक्त को भौतिकAttachments को छोड़कर आध्यात्मिक दिशा में अग्रसर होना चाहिए। भक्ति के माध्यम से मन की शांति और आत्मिक उत्कर्ष प्राप्त होता है। राम की संगति में रहकर भक्त जीवन के समस्त दुःखों को दूर कर सकता है और उच्चतम सुख की प्राप्ति कर सकता है। यह भजन संपूर्ण जीवन को एक नई दिशा और उद्देश्य प्रदान करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

भक्ति में डूबी इस प्रार्थना का उल्लेख श्री राम के जीवन से जुड़ी पौराणिक कथाओं में मिलता है। रामायण में भगवान राम को आदर्श पुरुष के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो सत्य, धर्म और न्याय का प्रतीक हैं। भक्तों का विश्वास है कि राम का नाम जपने से जीवन के सारे संकट समाप्त हो जाते हैं। इस प्रार्थना में ऐसे सामर्थ्य की प्रगति का वर्णन किया गया है, जो भक्तों के स्मरण से राम के अनुग्रह का अनुभव कराती है।

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। इस भजन का पाठ करके मानसिक शांति, आत्मविश्वास, और आंतरिक बल प्राप्त होता है। जो भक्त नियमित रूप से इस भजन का गायन करते हैं, उनके जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का संचार होता है। यह भक्ति व्यक्ति को निराशा से निकालकर आशा की किरण देती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

श्री रामचंद्र कृपालु भजमन का पाठ प्रतिदिन प्रातः या संध्या काल में करना सर्वोत्तम है। इस दौरान एक पवित्र स्थान पर बैठकर दिया जलाएं और श्री राम के प्रति अपने मन की भक्ति और प्रेम व्यक्त करें। ध्यान लगाने के दौरान भक्त को एकाग्रता से यथासंभव ध्यान देने की कोशिश करनी चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

श्री रामचंद्र कृपालु भजमन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश है कि श्री राम की भक्ति से सभी प्रकार के बाधाएँ और दुख दूर हो जाते हैं। उनकी कृपा प्राप्त करने से भक्त को सुख, शांति और संतोष मिलता है।

क्यों इस भजन का पाठ करना चाहिए?

इस भजन का पाठ करने से मानसिक तनाव कम होता है और आत्मिक शक्ति में वर्धन होता है। यह भक्त को भक्ति के मार्ग पर दृढ़ बनाता है और आध्यात्मिक उन्नति करता है।

इस भजन का पाठ कब करना सबसे लाभकारी है?

इस भजन का पाठ प्रातः और संध्या दोनों समय करना लाभदायक है, क्योंकि यह समय चित्त को शांति प्रदान करता है और दिनभर की थकान को मिटाता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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