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शनिदेव मंत्र जाप (Shani Dev Mantra Lyrics in Hindi) - Nilanjana Samabhasam by Suresh Wadkar 108 times - Bhaktilok

1,871 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

श्री शनिदेव की आराधना: कल्याणकारी मंत्र जाप

इस मंत्र जाप से शनि देव की कृपा प्राप्त होती है, जीवन में शांति और समृद्धि के लिए इसे श्रद्धा से गाएं।

ॐ निलान्जन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम।छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम॥ॐ -ओम ओंकार ओम्।ॐ ईश्वर की दिव्य ध्वनि है जो समस्त ब्रह्माण्ड का सार है। ओउ्म (ॐ) शब्द तीनस शब्दों से 'अ' 'उ' 'म' से मिलकर बना है जो ब्रह्मा विष्णु और महेश तथा त्रिलोक भूर्भुव: स्व: भूलोक भुव: लोक तथा स्वर्ग लोक के प्रतीक के रूप में माना जाता है।नीलांजन-नीले रंग का ताम्बे के रंग का तूतिया। यह संस्कृत भाषा का मूल शब्द है।समाभासं - के समान (शनि देव नीले रंग में चमक रहे हैं )रविपुत्रं - रवि के पुत्र सूर्य के पुत्र (आप श्री शनि रवि पुत्र हैं )यमाग्रजम-यम के अग्रज (भाई) हैं।छाया-छाया (श्री शनि देव की माता)मार्तण्ड-भगवान सूर्य (श्री सूर्य देव का एक नाम )सम्भूतं-उत्पन्न होना पैदा होना तं - को।नमामि -अभिवादन झुककर सम्मान प्रकट करना नमन करना शनैश्चरम् - श्री शनि देव (धीरे धीरे गमन करने वाले )मैं श्री शनि देव को नमन करता हूँ। मैं भगवान शनि देव को नमन करता हूं जो एक नीले पर्वत के रूप में चमक रहे हैं नीले रंग के समान चमक रहे हैं। श्री शनि देव काले रंग के हैं। सूर्य देव मार्तण्ड (सूर्य देव का दूसरा नाम) के पुत्र हैं। श्री शनि देव छाया (माता )से पैदा हुए हैं। श्री शनि देव यम देव के भाई हैं जो बहुत ही धीरे धीरे चलते हैं।
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस मंत्र का मुख्य विषय भगवान शनिदेव की आराधना है, जिन्हें नीलांजन समाभासं के रूप में वर्णित किया गया है। 'नीलांजन' शब्द शनि देव के नीले रंग को दर्शाता है जो उनके अद्भुत और प्रभावशाली स्वरूप का प्रतीक है। 'रविपुत्रं' वाक्यांश से यह संकेत मिलता है कि शनिदेव सूर्य के पुत्र हैं, जो न केवल सूर्य के गुण को अपनाते हैं बल्कि उसे अपने जीवन में लागू करते हैं। 'यमाग्रजम' का अर्थ है यम का अग्रज, यह दर्शाता है कि शनिदेव यम देव के भाई हैं। इन सभी विशेषणों से यह स्पष्ट होता है कि शनि एक ऐसे देवता हैं, जो सदैव न्याय का पालन करते हैं और जिस प्रकार खुद को धारण करते हैं, उसी के अनुसार उनके अनुयायी भी उनके मार्ग पर चलने का प्रयास करते हैं।

इस मंत्र में 'छायामार्तंड संभूतं' शब्दों द्वारा यह संकेत दिया गया है कि शनिदेव की माता छाया हैं और वे भगवान सूर्य के लिए एक संकेत हैं। श्रद्धा पूर्वक शनिदेव को नमन करने से हमारे भीतर नकारात्मकता और संकटों का निवारण होता है। यह मंत्र शांति और मन की स्थिरता प्रदान करता है, जिससे भक्त अपने जीवन के कठिन दौर से गुजरने में सक्षम हो पाते हैं। 'नमामि शनैशचरम्' वाक्यांश से यह स्पष्ट है कि भक्ते इस अद्भुत देवता की आराधना में झुकते हैं और उनके प्रति नतमस्तक होते हैं, जिससे शांति तथा सौम्यता की प्राप्ती होती है।

भगवान शनिदेव से जुड़े ये मंत्र स्पष्ट रूप से भक्ति मार्ग के सिद्धांतों को दर्शाते हैं। सत्य, न्याय और कर्म के सिद्धांतों पर जोर देते हुए, ये हमें सिखाते हैं कि जीवन में जो भी कार्य हम करते हैं, उसका फल हमें अवश्य भुगतना होगा। यह भक्ति साधना हमें शांति, सरलता और संतोष की ओर ले जाती है। भक्ति मार्ग पर चलने वाले व्यक्ति के लिए शनिदेव का अद्वितीय स्वरूप एक उच्चतम आदर्श का उदाहरण प्रस्तुत करता है, जिसकी आराधना से व्यक्ति का आध्यात्मिक और मानसिक विकास होता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्री शनिदेव का मंत्र जाप 'महाभारत' और 'पुराणों' में उल्लेखित है, जहाँ शनि को न्याय और सदाचार का प्रतीक माना गया है। शनि देव की पूजा का इतिहास सदियों पुराना है, और भारतीय संस्कृति में उन्हें कर्मों का फल देने वाला देवता माना जाता है। उनका नाम 'शनि' संस्कृत में 'शनैश्चर' या 'धीरे-धीरे चलने वाला' से आता है, जो उनके प्रभाव की गहराई को दर्शाता है। भक्त जब शनिदेव की आराधना करते हैं, तो उन्हें मानसिक शांति और जीवन में स्थिरता प्राप्त होती है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। शनि देव का मंत्र जाप मानसिक तनाव को कम करता है और आत्मविश्वास को बढ़ाता है। नियमित रूप से इस मंत्र का जाप करने से जीवन में संतुलन और सकारात्मकता आती है, जिससे व्यक्ति कठिनाइयों का सामना बेहतर तरीके से कर पाता है। यह स्वास्थ्य, समृद्धि और मानसिक स्पष्टता के लिए भी लाभकारी है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस मंत्र का जाप सुबह के समय सूर्योदय के पूर्व या शनिवार को किया जाना उत्तम रहता है। पूजा के समय एक दीपक जलाएं और भगवान शनिदेव को तिल या काले तिल का भोग अर्पित करें। साधक को ध्यान मुद्रा में बैठकर श्रद्धा भाव से मंत्र का उच्चारण करना चाहिए। ध्यान के दौरान मन को एकाग्र करने का प्रयास करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

शनिदेव का मंत्र जाप करने का सबसे अच्छा समय क्या है?

शनिदेव का मंत्र जाप सुबह सूर्योदय से पूर्व या शनिवार को किया जाना चाहिए। यह समय विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

क्या शनिदेव की कृपा पाने के लिए कोई विशेष पूजा विधि अपनानी चाहिए?

हां, शनिदेव की कृपा पाने के लिए साधक को उन्हें काले तिल और सरसों के तेल का भोग अर्पित करके मंत्र जाप करना चाहिए। यह अर्पण उनके प्रति श्रद्धा और सम्मान दर्शाता है।

इस मंत्र का जाप करने से कौन-कौन से लाभ होते हैं?

इस मंत्र का जाप करने से मानसिक शांति, बेहतर स्वास्थ्य, और कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति मिलती है। यह आर्थिक समृद्धि और समग्र जीवन में संतुलन का भी संचार करता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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