Parvati Stotram

श्री खाटू श्याम चालीसा हिंदी (Shri Khatu Shyam Chalisa Lyrics in Hindi) - Kumar Vishu Rajasthani Bhajan - Bhaktilok

96 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

सम्पूर्ण मूल पाठ एवं पवित्र श्लोक

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

( श्री खाटू श्याम चालीसा लिरिक्स हिंदी ) -

|| दोहा ||

श्री गुरु चरण ध्यान धर सुमिरि सच्चिदानन्द।

श्याम चालीसा भजत हूँ रच चैपाई छन्द।।

|| चौपाई ||

श्याम श्याम भजि बारम्बारा सहज ही हो भवसागर पारा।

इन सम देव न दूजा कोई दीन दयालु न दाता होई।

भीमसुपुत्र अहिलवती जाया कहीं भीम का पौत्र कहाया।

यह सब कथा सही कल्पान्तर तनिक न मानों इनमें अन्तर।

बर्बरीक विष्णु अवतारा भक्तन हेतु मनुज तनु धारा।

वसुदेव देवकी प्यारे यशुमति मैया नन्द दुलारे।

मधुसूदन गोपाल मुरारी बृजकिशोर गोवर्धन धारी।

सियाराम श्री हरि गोविन्दा दीनपाल श्री बाल मुकुन्दा।

दामोदर रणछोड़ बिहारी नाथ द्वारिकाधीश खरारी।

नरहरि रूप प्रहलद प्यारा खम्भ फारि हिरनाकुश मारा।

राधा वल्लभ रुक्मिणी कंता गोपी बल्लभ कंस हनंता।

मनमोहन चितचोर कहाये माखन चोरि चोरि कर खाये।

मुरलीधर यदुपति घनश्याम कृष्ण पतितपावन अभिराम।

मायापति लक्ष्मीपति ईसा पुरुषोत्तम केशव जगदीशा।

विश्वपति त्रिभुवन उजियारा दीनबन्धु भक्तन रखवारा।

प्रभु का भेद कोई न पाया शेष महेश थके मुनियारा।

नारद शारद ऋषि योगिन्दर श्याम श्याम सब रटत निरन्तर।

कवि कोविद करि सके न गिनन्ता नाम अपार अथाह अनन्ता।

हर सृष्टि हर युग में भाई ले अवतार भक्त सुखदाई।

हृदय माँहि करि देखु विचारा श्याम भजे तो हो निस्तारा।

कीर पड़ावत गणिका तारी भीलनी की भक्ति बलिहारी।

सती अहिल्या गौतम नारी भई श्राप वश शिला दुखारी।

श्याम चरण रच नित लाई पहुँची पतिलोक में जाई।

अजामिल अरु सदन कसाई नाम प्रताप परम गति पाई।

जाके श्याम नाम अधारा सुख लहहि दुख दूर हो सारा।

श्याम सुलोचन है अति सुन्दर मोर मुकुट सिर तन पीताम्बर।

गल वैजयन्तिमाल सुहाई छवि अनूप भक्तन मन भाई।

श्याम श्याम सुमिरहुं दिनराती शाम दुपहरि अरु परभाती।

श्याम सारथी सिके रथ के रोड़े दूर होय उस पथ के।

श्याम भक्त न कहीं पर हारा भीर परि तब श्याम पुकारा।

रसना श्याम नाम पी ले जी ले श्याम नाम के हाले।

संसारी सुख भोग मिलेगा अन्त श्याम सुख योग मिलेगा।

श्याम प्रभु हैं तन के काले मन के गोरे भोले भाले।

श्याम संत भक्तन हितकारी रोग दोष अघ नाशै भारी।

प्रेम सहित जे नाम पुकारा भक्त लगत श्याम को प्यारा।

खाटू में है मथुरा वासी पार ब्रह्म पूरण अविनासी।

सुधा तान भरि मुरली बजाई चहुं दिशि नाना जहाँ सुनि पाई।

वृद्ध बाल जेते नारी नर मुग्ध भये सुनि वंशी के स्वर।

दौड़ दौड़ पहुँचे सब जाई खाटू में जहाँ श्याम कन्हाई।

जिसने श्याम स्वरूप निहारा भव भय से पाया छुटकारा।

|| दोहा ||

श्याम सलोने साँवरे बर्बरीक तनु धार।

इच्छा पूर्ण भक्त की करो न लाओ बार।।

वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें।

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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

संकटमोचन हनुमान जी का यह भजन "श्री खाटू श्याम चालीसा हिंदी (Shri Khatu Shyam Chalisa Lyrics in Hindi) - Kumar Vishu Rajasthani Bhajan - Bhaktilok" बल, बुद्धि, विद्या और भक्ति का संचार करने वाला है। कलयुग के जागृत देव श्री हनुमान जी की महिमा अपार है। इस भजन का मुख्य उद्देश्य साधक के भीतर के भय को दूर कर उसमें आत्मगौरव और निष्काम सेवा भाव जागृत करना है।

भजन की चौपाइयों और पंक्तियों में हनुमान जी की लंका दहन, संजीवनी बूटी लाना और प्रभु श्री राम के प्रति अनन्य प्रेम का वर्णन होता है। हनुमान जी की शरण में जाने पर बड़े से बड़ा संकट भी क्षण भर में समाप्त हो जाता है, यही इस भजन की मूल भावना है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

हनुमान चालीसा और सुंदरकांड की भांति ही हनुमान भजनों का विशेष धार्मिक महत्त्व है। हनुमान जी को अष्ट सिद्धि और नौ निधियों के दाता के रूप में पूजा जाता है। इस पावन भजन के गायन से भूत-पिशाच, नकारात्मक ऊर्जा और सभी प्रकार के ऊपरी बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें। हनुमान भजन से आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि होती है, मानसिक रोग जैसे तनाव, अनिद्रा और डिप्रेशन दूर होते हैं। यह छात्रों की बुद्धि और परीक्षा में सफलता के लिए भी रामबाण है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

हनुमान जी की पूजा के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन विशेष रूप से निर्धारित है। लाल आसन पर बैठकर, हनुमान जी के सम्मुख चमेली के तेल का दीपक जलाएं और पूरे मनोयोग से इस भजन का संकीर्तन करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

हनुमान जी को किस दिन चमेली का तेल चढ़ाना चाहिए?

शनिवार और मंगलवार के दिन हनुमान जी को सिंदूर में चमेली का तेल मिलाकर चढ़ाना अत्यंत शुभ और संकट निवारक माना गया है।

क्या हनुमान भजन परीक्षा के भय को दूर करने में सहायक है?

हाँ, हनुमान जी के भजनों और मंत्रों के संकीर्तन से मन एकाग्र होता है, भय का नाश होता है और याददाश्त बढ़ती है।

शनि दोषों की शांति के लिए हनुमान उपासना क्यों की जाती है?

हनुमान जी ने शनिदेव को रावण के बंधन से मुक्त कराया था, जिसके कारण शनिदेव ने वचन दिया था कि जो हनुमान जी की भक्ति करेगा, उसे शनि जनित पीड़ा नहीं भोगनी पड़ेगी।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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