Hanuman Bhajan

कथा राम भक्त हनुमान की लिरिक्स हिंदी ( Katha Ram Bhakt Hanuman Ki Lyrics in Hindi ) - HARIHARAN Hanuman Katha - Bhaktilok

475 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

सम्पूर्ण मूल पाठ एवं पवित्र श्लोक

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

कथा राम भक्त हनुमान की  लिरिक्स हिंदी ( Katha Ram Bhakt Hanuman Ki Lyrics in Hindi ) -

जय सीताराम

जय बजरंग बली।

पुराणों में इस कथा का उल्लेख है कि अश्वमेघ यज्ञ के पूर्ण होने के पश्चात श्री राम ने एक बड़ी सभा का आयोजन किया। सभी राजाओं को उसमें आमंत्रित किया गया। 

सभा में आए नारद जी के भड़काने पर एक राजा ने भरी सभा में ऋषि विश्वामित्र को छोड़कर सभी को प्रणाम किया। 

ऋषि विश्वामित्र गुस्से से भर उठे और उन्होंने राम से कहा कि अगर सूर्यास्त से पहले श्रीराम ने उक्त राजा को मृत्यु दंड नहीं दिया तो वो राम को शाप दे देंगे। 

श्राप के भयभीत होकर श्रीराम ने उस राजा को सूर्यास्त से पहले मारने का प्रण ले लिया।

श्रीराम के प्राण की खबर पाते ही राजा भागा भागा हनुमान जी की माता अंजनी के पास गया और पूरी बात बताए बिना उनसे प्राण रक्षा का वचन मांगा। 

माता अंजनी ने हनुमान जी को राजा की जान बचाने का आदेश दिया। हनुमान जी ने श्रीराम की कसम खाकर कहा कि कोई भी राजा का बाल भी बांका नहीं कर पाएगा। 

लेकिन जब राजा ने बताया कि श्रीराम ने ही उन्हें मारने का प्रण किया है तो हनुमान धर्म संकट में फंस गए। हनुमान के सामने धर्म संकट खड़ा हो गया कि वो राजा के प्राण कैसे बचाएं। 

अगर राजा को मौत मिलती है तो माता का दिया हुआ वचन पूरा नहीं हो पाएगा। अगर राजा को बचाया तो श्री राम का प्रण पूरा नहीं हो पाएगा और उन्हें शाप मिलेगा।

उलझन में फंसे हनमान जी को एक युक्ति सूझी। हनुमान जी ने राजा से सरयू तट पर जाकर राम नाम जपने के लिए कहा। हनुमान जी खुद सूक्ष्म रूप में राजा के पीछे छिप गए। 

जब श्री राम राजा को खोजते हुए सरयू तट पर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि राजा राम-राम जप रहा है। राम जी ने सोचा अरे! ये तो मेरा भक्त है मैं कैसे इस पर बाण चला सकता हूं। 

श्री राम महल को लौट गए और विश्वामित्र से अपनी दुविधा कही। विश्वामित्र अपनी बात पर अड़े रहे और श्रीराम को फिर से राजा के प्राण लेने के लिए सरयू तट पर लौटना पड़ा।

सारा राज्य देख रहा था कि कैसे श्रीराम दुविधा में फंसे हैं। एक तरफ राजा राम नाम जप रहा है और श्रीराम अपने ही भक्त को मारने के लिए मजबूर हैं। 

सभी सोच रहे थे कि ऐसे वक्त में हनुमान को राम के साथ होना चाहिए था। लेकिन हनुमान जी थे कहां वो तो अपने ही आराध्य के विरुद्ध सूक्ष्म रूप से एक धर्मयुद्ध का संचालन कर रहे थे। 

हनुमान जानते थे कि राम नाम जपते हु‌ए राजा को कोई भी नहीं मार सकता खुद मर्यादा पुरुषोत्तम राम भी नहीं।

राम जी जब फिर से सरयू तट लौटे तो राजा को मारने के लिए शक्ति बाण निकाला लेकिन तब तक राजा हनुमान जी के कहने पर सिया राम सिया राम जपने लगा। 

राम जानते थे कि सिया राम जपने वाले पर शक्तिबाण असर नहीं करता। वो बेबस हो गए और महल को लौट पड़े। उधर विश्वामित्र उन्हें लौटा देखकर शाप देने को उतारू हो गए और राम को फिर सरयू तट पर जाना पड़ा। 

इस बार राजा हनुमान जी के इशारे पर जय‌ सियाराम जय जय हनुमान गा रहा था। राम ने सोचा कि मेरे नाम के साथ साथ ये राजा शक्ति और भक्ति की जय बोल रहा है। ऐसे में मेरा कोई अस्त्र इसे मार नहीं पाएगा।

इस संकट को देखकर श्रीराम को मूर्छा आने लगी तो अयोध्या के साध‌ु संतों में खलबली मच गई। तब ऋषि व‌शिष्ठ ने ऋषि विश्वामित्र को सलाह दी कि राम को इस तरह संकट में नहीं डालना चाहिए। 

उन्होंने कहा कि राम चाह कर भी राम नाम जपने वाले को नहीं मार सकते क्योंकि जो बल राम के नाम में है और खुद राम में नहीं है।संकट बढ़ता देखकर ऋषि विश्वामित्र ने राम को संभाला और अपने वचन से मुक्त कर दिया। 

मामला संभलते देखकर राजा के पीछे छिपे हनुमान वापस अपने रूप में आ गए और श्रीराम को प्रणाम किया।

तब श्रीराम ने कहा कि हनुमान ने इस प्रसंग से साबित किया है कि भक्त की शक्ति हमेशा आराध्य की ताकत बनी है और सच्चा भक्त हमेशा भगवान से बड़ा ही रहेगा।

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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

भगवान श्री रामचंद्र जी को समर्पित यह भजन "कथा राम भक्त हनुमान की लिरिक्स हिंदी ( Katha Ram Bhakt Hanuman Ki Lyrics in Hindi ) - HARIHARAN Hanuman Katha - Bhaktilok" मर्यादा पुरुषोत्तम के पावन चरित्र का स्मरण कराता है। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस के सिद्धांतों के अनुसार, राम का नाम स्वयं राम से भी अधिक सामर्थ्यवान है। इस भजन की लय और शब्द भक्त को सीधे साकेत धाम की पावन चेतना से जोड़ते हैं।

भजन का प्रमुख भाव शरणागति का है। जब जीव समस्त सांसारिक प्रपंचों से थककर भगवान राम के चरणों में शरण लेता है, तो उसे परम अभय की प्राप्ति होती है। राम नाम की ध्वनि से वातावरण शुद्ध होता है और अंतःकरण में धर्म और सत्य के प्रति निष्ठा दृढ़ होती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

सनातन ग्रंथों के अनुसार, राम नाम का जाप कलयुग का सर्वश्रेष्ठ साधन माना गया है। वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस में राम नाम की असीम महिमा गाई गई है। यह भजन साधक के मन में वैराग्य, संयम, दया और कर्तव्य परायणता जैसे नैतिक मूल्यों का संचार करता है।

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। राम नाम के संकीर्तन से व्यक्ति का आत्मबल जागृत होता है, भय तथा शंकाओं का नाश होता है और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी धैर्य रखने की शक्ति प्राप्त होती है। यह पारिवारिक सौहार्द और मर्यादा की स्थापना में सहायक है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

राम भजन का संकीर्तन प्रातःकाल स्नान के पश्चात राम दरबार की प्रतिमा के सम्मुख घी का दीपक जलाकर करें। तुलसी की माला से राम नाम का जप करने के पश्चात इस भजन का गायन अत्यंत फलदायी होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

राम भजन के गायन से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?

राम भजन के संकीर्तन से मानसिक शांति, उत्तम चरित्र, और विपत्तियों में धैर्य बनाए रखने का आत्मबल प्राप्त होता है।

राम नाम जप के लिए सर्वश्रेष्ठ माला कौन सी है?

भगवान श्री राम के मंत्र जाप और संकीर्तन के लिए तुलसी की माला को सर्वश्रेष्ठ और अत्यंत पवित्र माना गया है।

क्या राम भजन बच्चों के संस्कारों के लिए उपयोगी है?

हाँ, भगवान राम के मर्यादापूर्ण चरित्र के भजन सुनने से बच्चों में बड़ों के प्रति सम्मान, सत्यप्रियता और उच्च नैतिक संस्कारों का विकास होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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