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नगरी हो अयोध्या सी रघुकुल सा घराना हो लिरिक्स भजन ( Nagari Ho Ayodhya Si Raghukul Sa Gharana Ho Lyrics in Hindi ) - Ram Bhajan - Bhaktilok

147 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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भगवान श्री रामचंद्र जी की मर्यादा, अयोध्या नगरी की पावनता और रघुकुल की परंपरा को अपने जीवन में उतारने की प्रेरणा देने वाला यह भजन "नगरी हो अयोध्या सी रघुकुल सा घराना हो" भक्ति साहित्य की एक अत्यंत लोकप्रिय रचना है। यह भजन केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि एक आदर्श जीवन जीने की कामना है, जिसमें भक्त अपने घर-परिवार और नगर को अयोध्या और रघुकुल के समान पवित्र बनाने की प्रार्थना करता है। जब भक्त इस भजन को गाता है, तो उसका मन सीधे त्रेतायुग की ओर चला जाता है, जहाँ मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम विराजमान हैं। इस भजन की लय और भावना भक्त के अंतःकरण को शुद्ध करती है और उसमें धर्म, सत्य और करुणा के प्रति निष्ठा जागृत करती है। यह भजन विशेष रूप से राम नवमी, विवाह पंचमी, दीपावली और सामान्य सत्संगों में गाया जाता है। इसका मुख्य भाव शरणागति, आदर्श जीवन शैली और प्रभु श्री राम के चरणों में समर्पण का है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

नगरी हो अयोध्या सी रघुकुल सा घराना हो

नगरी हो अयोध्या सी, रघुकुल सा घराना हो।
हर मन में राम बसें, हर दिल दीवाना हो।।

सरयू की धारा सी, पावन हर बोली हो।
राम नाम की रटन, हर जीभ पे होली हो।।

माता कौशल्या सी, ममता जिसमें भारी हो।
पिता दशरथ जैसा, सत्य का अधिकारी हो।।

भाई लक्ष्मण सा, सेवा में तत्पर हो।
भरत सा भाई, त्याग का सागर हो।।

सीता सी नारी हो, पतिव्रता महान हो।
हनुमत सा सेवक, प्रभु का गुणगान हो।।

अयोध्या सी नगरी, रघुकुल सा घराना हो।
हर घर में राम बसें, यही तो वरदाना हो।।

जन्म ले हर घर में, राम सा बालक हो।
मर्यादा का पालन, हर इक चालक हो।।

नगरी हो अयोध्या सी, रघुकुल सा घराना हो।
हर मन में राम बसें, हर दिल दीवाना हो।।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का मुख्य भाव यह है कि भक्त अपने जीवन, अपने घर और अपने समाज को आदर्श बनाने की कामना करता है। भक्त कहता है कि हे प्रभु! मेरी नगरी अयोध्या के समान पवित्र हो, जहाँ कभी असत्य, अधर्म और पाप का वास न हो। मेरा घराना रघुकुल के समान हो, जहाँ मर्यादा, सत्य, त्याग और सेवा का वास हो। भजन में भक्त यह भी कहता है कि हर मन में राम का वास हो और हर दिल राम के प्रेम में दीवाना हो। यह भजन केवल एक प्रार्थना नहीं, बल्कि एक जीवन दर्शन है, जो हमें बताता है कि यदि हम अपने जीवन में राम के आदर्शों को अपना लें, तो हमारा जीवन भी अयोध्या के समान पवित्र हो सकता है।

भजन में सरयू की धारा का उल्लेख करके भक्त यह कहता है कि हमारी वाणी भी सरयू के जल के समान पवित्र हो, जिसमें कभी कटुता न हो। राम नाम की रटन हर जीभ पर हो, अर्थात हर व्यक्ति राम नाम का जाप करे। माता कौशल्या की ममता, पिता दशरथ का सत्य, लक्ष्मण की सेवा, भरत का त्याग, सीता की पतिव्रता और हनुमान की भक्ति—ये सभी आदर्श हमारे जीवन में उतरने चाहिए। भजन का यह भाव अत्यंत गहरा है कि यदि हमारे घर में राम जैसा बालक जन्म ले, तो हमारा जीवन धन्य हो जाए। यह भजन भक्त को आत्म-सुधार की प्रेरणा देता है और उसे रामराज्य की स्थापना के लिए प्रेरित करता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन भगवान श्री राम को समर्पित है और इसमें रघुकुल की परंपरा, अयोध्या की महिमा और रामराज्य की कल्पना को बड़े ही सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया गया है। इस भजन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह भक्त को केवल भावुक नहीं करता, बल्कि उसे आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा देता है। भजन में राम, लक्ष्मण, भरत, सीता और हनुमान—सभी के आदर्शों का वर्णन है, जो हमें बताता है कि रामायण केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है।

इस भजन को सुनने और गाने से मन को अपार शांति मिलती है। यह भजन कलयुग में राम नाम की महिमा को दर्शाता है। सनातन ग्रंथों के अनुसार, कलयुग में राम नाम का जाप ही सबसे सरल और प्रभावी साधन है। इस भजन को गाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और पारिवारिक कलह दूर होती है। यह भजन भक्त को शरणागति का पाठ पढ़ाता है और उसे प्रभु श्री राम के चरणों में समर्पित करता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को किसी भी शुभ अवसर पर गाया जा सकता है, लेकिन विशेष रूप से राम नवमी, विवाह पंचमी, दीपावली, नवरात्रि और सामान्य सत्संगों में इसका गायन अत्यंत फलदायी माना जाता है। इसके अतिरिक्त प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को भी इस भजन का गायन किया जा सकता है। सर्वोत्तम समय प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त या संध्या आरती का समय होता है।

भजन गाने की विधि अत्यंत सरल है। सर्वप्रथम स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। फिर राम दरबार या अपने इष्ट स्थान पर दीपक प्रज्वलित करें। इसके पश्चात हाथ में घंटी या करताल लेकर भक्ति भाव से इस भजन का गायन करें। भजन गाते समय मन में श्री राम का ध्यान करें और उनके चरणों में अपनी भावनाएं समर्पित करें। भजन के बाद राम रक्षा स्तोत्र या हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: "नगरी हो अयोध्या सी" भजन किसने लिखा है?

उत्तर: यह भजन पारंपरिक रूप से भक्ति परंपरा में प्रचलित है और इसके रचयिता के बारे में स्पष्ट प्रमाण उपलब्ध नहीं है। यह भजन पीढ़ी-दर-पीढ़ी भक्तों के माध्यम से प्रचलित हुआ है।

प्रश्न 2: इस भजन का मुख्य भाव क्या है?

उत्तर: इस भजन का मुख्य भाव यह है कि भक्त अपने जीवन, घर और समाज को अयोध्या और रघुकुल के समान आदर्श बनाने की कामना करता है।

प्रश्न 3: इस भजन को कब गाना चाहिए?

उत्तर: इसे राम नवमी, विवाह पंचमी, दीपावली, मंगलवार और शनिवार को तथा प्रातःकाल या संध्या आरती के समय गाना शुभ माना जाता है।

प्रश्न 4: क्या इस भजन को गाने से घर में सुख-शांति आती है?

उत्तर: हाँ, भक्ति भाव से इस भजन का गायन करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और पारिवारिक सुख-शांति में वृद्धि होती है।

प्रश्न 5: इस भजन में किन-किन आदर्शों का वर्णन है?

उत्तर: इसमें माता कौशल्या की ममता, पिता दशरथ का सत्य, लक्ष्मण की सेवा, भरत का त्याग, सीता की पतिव्रता और हनुमान की भक्ति का वर्णन है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है, जिसे भक्ति परंपरा, रामचरितमानस और लोक भजनों के आधार पर संकलित किया गया है। इस भजन का उद्देश्य भक्तों को श्री राम की मर्यादा, अयोध्या की पावनता और रघुकुल की परंपरा से जोड़ना है। हमारा प्रयास है कि भक्तों को शुद्ध, सरल और भावपूर्ण सामग्री उपलब्ध कराई जाए।

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श्रेणियां: Ayodhya Ram Bhajan

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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