सूना है मेरा घर द्वार भोले आजा एक बार लिरिक्स (Soona Mera Ghar Dwar Lyrics in Hindi )
देवादिदेव महादेव भगवान शिव को समर्पित यह पावन भजन "सूना है मेरा घर द्वार भोले आजा एक बार" शिव भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय और भावुक कर देने वाला संकीर्तन है। इस भजन में एक सच्चे भक्त की आर्त पुकार, भोलेनाथ के प्रति अनन्य प्रेम, विरह की पीड़ा और उनके दीदार की तड़प का अत्यंत सजीव चित्रण किया गया है। जब मनुष्य सांसारिक दुखों, संघर्षों और कष्टों से घिर जाता है, तब उसका एकमात्र आश्रय त्रिपुरारी शंभू ही होते हैं। भजन का हर एक शब्द साधक के भीतर समर्पण के भाव को जागृत करता है। महाशिवरात्रि, सावन मास के सोमवार, प्रदोष व्रत अथवा रुद्राभिषेक के पवित्र अवसरों पर इस भजन का गायन और श्रवण करने से मन को असीम शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। महाशिवरात्रि व्रत कथा के दौरान इस प्रकार के भजनों से देवालय गूंज उठते हैं।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
(मुखाड़ा)
सूना है मेरा घर द्वार, भोले आजा एक बार,
सुना है मेरा घर द्वार, भोले घर मेरे आजा एक बार तू,
सुना है मेरा घर द्वार...
तुझको सुनानी, तुझको बतानी, मैंने दिल की कहानी,
रोते-रोते सुख गया है बाबा, आँखों से पानी,
भर दे मेरे भी भंडार, भोले घर मेरे आजा एक बार तू,
सुना है मेरा घर द्वार...
(अंतरा 1)
तुझको भजु मैं शाम-सवेरे, बनके तेरा दीवाना,
मुझको भी दे दे भोले बाबा, खुशियों का खजाना,
मिल जाए मुझको भी करार, भोले घर मेरे आजा एक बार तू,
सुना है मेरा घर द्वार...
(अंतरा 2)
राह में पलके मैंने बिछाई, भोले बाबा तेरी,
आ भी जा तू, दूर ये कर दे, रात अँधेरी,
किस्मत को मेरी दे सवार, भोले घर मेरे आजा एक बार तू,
सुना है मेरा घर द्वार...
(अंतिम अंतरा)
तू जो ना आया हे शिव शंकर, मैं ना जिन्दा रहूँगा,
मर भी गया तो हे शिव शंभु, तुझसे मैं ये कहूँगा,
माटी को ही ले तू निहार, मुझको मुक्ति का दे दे संसार तू,
सुना है मेरा घर द्वार...
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह भजन एक भक्त और भगवान के बीच के अटूट रिश्ते की पराकाष्ठा को दर्शाता है। भजन की पंक्तियों में निहित भाव अत्यंत गहरे और आध्यात्मिक हैं। साधक भगवान शिव से प्रार्थना करता है कि उसका जीवन रूपी घर उनके बिना सूना और वीरान हो गया है। जब तक शिव की कृपा दृष्टि नहीं होती, जीवन में आनंद और संतोष का अनुभव नहीं हो सकता।
भक्त अपनी व्यथा का वर्णन करते हुए कहता है कि वह अपने मन की सारी बातें केवल अपने आराध्य को ही बताना चाहता है। दुनिया के सामने रोने से कुछ हासिल नहीं होता, किंतु भोलेनाथ के चरणों में आंसू बहाने से सारे दुख दूर हो जाते हैं। भक्त की आंखों का पानी सुख चुका है, जिसका अर्थ है कि वह अपने जीवन की सभी परीक्षाओं से थक चुका है और अब केवल बाबा से अपने भाग्य को संवारने की गुहार लगा रहा है।
अंतिम चरणों में भक्त की निष्ठा उस सीमा तक पहुँच जाती है जहाँ वह जीवन और मृत्यु की परवाह न करते हुए केवल शिवमय हो जाता है। वह कहता है कि यदि इस जीवन में शिव नहीं मिले, तो मृत्यु के पश्चात भी उसकी माटी केवल शिव का ही स्मरण करेगी। यही सच्ची शिव तांडव स्तोत्र जैसी स्तुतियों के सस्वर पाठ से प्राप्त होने वाली परम भक्ति की अवस्था है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
- ✨ भक्ति और विरह का अद्भुत समन्वय: इस भजन में भगवान से मिलने की व्याकुलता (विरह) और उनके प्रति अगाध प्रेम का सुंदर संयोजन है।
- ✨ आशुतोष प्रसन्नता: भगवान शिव को 'आशुतोष' कहा जाता है, जो बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं। यह भजन उनकी उसी सहज कृपा को आकर्षित करता है।
- ✨ मानसिक शांति का साधन: इस भजन को सुनने से मानसिक तनाव कम होता है और एकाग्रता बढ़ती है।
- ✨ पारिवारिक और सामूहिक संकीर्तन: इसे परिवार के साथ या मंदिर में शिवरात्रि के जागरण के दौरान आसानी से गाया जा सकता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
शिव भजनों के गायन के लिए प्रदोष काल (संध्या समय), ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः काल) और विशेष पर्व अत्यंत उत्तम माने जाते हैं। इस भजन को गाने की विधि इस प्रकार है:
- प्रातः स्नान करके पवित्र वस्त्र धारण करें और शिव मंदिर या घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।
- भगवान शिव का ध्यान करते हुए बेलपत्र, अक्षत और जल अर्पित करें।
- पूर्ण भाव और शुद्ध उच्चारण के साथ इस भजन का सस्वर संकीर्तन करें।
- गायन के पश्चात भगवान शिव से अपने परिवार की सुख-शांति और कल्याण की प्रार्थना करें।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
इस संपूर्ण भजन के केंद्र बिंदु देवादिदेव महादेव, महाकाल, शिव शंकर और भोलेनाथ हैं। हिंदू सनातन परंपरा में भगवान शिव संहारक के साथ-साथ परम कल्याणकारी और योगेश्वर माने गए हैं। आदियोगी शिव ही समस्त कलाओं, संगीत और भक्ति के स्रोत हैं। संत परंपरा में भी शिव भक्तों (जैसे नयनार संतों) ने इसी प्रकार की विरह और प्रेम की भाषा में शिव की आराधना की है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
यह भजन सरल हिंदी और लोकभाषा (ब्रज-अवधी मिश्रित बोलचाल की शैली) में रचा गया है। इसकी शब्दावली इतनी सहज और हृदयस्पर्शी है कि आम जनमानस से लेकर संगीत प्रेमी तक इसे तुरंत आत्मसात कर लेते हैं। इसमें रूपक अलंकारों और भावपूर्ण शब्दों का सुंदर प्रयोग किया गया है जो सीधे श्रोता के हृदय को स्पर्श करता है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन हमें सिखाता है कि जीवन में कितनी भी कठिनाइयां आएं, ईश्वर पर से विश्वास कभी नहीं उठना चाहिए। सच्चा भक्त वही है जो सुख में सुमिरन करे और दुख में केवल अपने इष्ट को पुकारे। शिवजी का आशीर्वाद अहंकार को मिटाकर जीवन में दिव्यता का संचार करता है। अधिक जानने के लिए आप शिव रक्षा स्तोत्र का अध्ययन भी कर सकते हैं।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल अर्थ | संदर्भ / भाव |
|---|---|---|
| घर द्वार | जीवन और हृदय रूपी घर | भक्त का अंतःकरण जहां भगवान का वास हो |
| करार | शांति, सुकून या विश्राम | मानसिक व्यथा से मुक्ति और चैन |
| दीवाना | अनन्य प्रेमी या भक्त | भगवान की भक्ति में लीन व्यक्ति |
| माटी | नश्वर शरीर | शरीर के विलीन होने पर भी शिव से जुड़ाव |
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
इस भजन के साथ भगवान शिव के निम्नलिखित महामंत्रों का जप करने से साधना अधिक फलदायी होती है:
मृत्युंजय महेश्वराय महादेवाय नमः ॥
इन मंत्रों का नित्य 108 बार जप करने से साधक को मानसिक और आध्यात्मिक बल प्राप्त होता है।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | सूना है मेरा घर द्वार भोले आजा एक बार |
|---|---|
| आराध्य देव | भगवान शिव / महादेव |
| भाषा | सरल हिंदी / लोकभाषा |
| प्रमुख भाव | भक्ति, विरह, करुणा और समर्पण |
| उचित अवसर | महाशिवरात्रि, सावन सोमवार, प्रदोष व्रत, जागरण |
| प्लेटफॉर्म | भक्तिलोक (Bhaktilok.in) |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1: "सूना है मेरा घर द्वार भोले आजा एक बार" भजन किस देवता को समर्पित है?
यह भजन देवादिदेव महादेव भगवान शिव को समर्पित है।
Q2: इस भजन को किस अवसर पर गाना सबसे अच्छा रहता है?
इसे महाशिवरात्रि, सावन मास के सोमवार, शिव जागरण और रुद्राभिषेक के समय गाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
Q3: इस भजन का मुख्य भाव क्या है?
इस भजन का मुख्य भाव भक्त का भगवान के प्रति विरह, अगाध प्रेम और उनकी कृपा पाने की व्याकुलता है।
Q4: क्या यह भजन बच्चों और नए गायकों के लिए आसान है?
हाँ, इसकी धुन और शब्द बहुत सरल हैं, इसलिए इसे कोई भी आसानी से सीख सकता है और गा सकता है।
Q5: भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कौन सा मंत्र जपना चाहिए?
भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए "ॐ नमः शिवाय" या महामृत्युंजय मंत्र का जप करना सर्वोत्तम है।
Q6: क्या इस भजन को घर पर अकेले गाया जा सकता है?
निश्चित रूप से, एकांत में बैठकर या पूजा के समय इस भजन को गाने से मन को असीम शांति मिलती है।
Q7: क्या इस भजन के लिरिक्स हिंदी में उपलब्ध हैं?
हाँ, संपूर्ण लिरिक्स इस लेख में देवनागरी लिपि में उपलब्ध हैं।
Q8: भक्तिलोक वेबसाइट पर और कौन से भजन मिल सकते हैं?
भक्तिलोक पर आपको शिव चालीसा, स्तोत्र, आरती और विभिन्न देवी-देवताओं के भजन और कथाएं मिलेंगी।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह सामग्री सनातन परंपरा, लोक भजनों के संकलन और भक्ति साहित्य के अध्ययन पर आधारित है। इसे पाठकों की आध्यात्मिक रुचि को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री
स्रोत एवं संदर्भ
- 📖 पारंपरिक शिव भजन संकलन एवं लोक संगीत परंपरा
- 📖 शिव पुराण एवं धार्मिक ग्रंथ
- 📖 सनातन संस्कृति एवं मौखिक परंपरा के स्रोत
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