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सुख के सब साथी दुःख में न कोई लिरिक्स हिंदी (Sukh Ke Sab Saathi Dukh Main Na Koi Lyrics in Hindi) - Ram Bhajan Prayer - Bhaktilok

241 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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हिंदू धर्म और भारतीय भक्ति संगीत की समृद्ध परंपरा में कुछ ऐसे भजन हैं जो केवल ईश्वर की स्तुति नहीं करते, बल्कि मानव जीवन के सबसे बड़े और शाश्वत सत्य से हमारा साक्षात्कार कराते हैं। ऐसा ही एक कालजयी और हृदयस्पर्शी भजन है—"सुख के सब साथी दुःख में न कोई"। यह भजन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री रामचंद्र जी की अनन्य भक्ति, सांसारिक मोह-माया के त्याग और वैराग्य के गहरे दार्शनिक सिद्धांतों पर आधारित है। वर्ष 1970 में आई प्रसिद्ध हिंदी फिल्म 'गोपी' का यह गीत आज भारतीय घरों में एक परम पावन प्रार्थना और भजन के रूप में गाया और सुना जाता है। महान गायक मोहम्मद रफी की दिव्य और भावपूर्ण आवाज, कल्याणजी-आनंदजी का सुमधुर संगीत और गीतकार राजेंद्र कृष्ण के मर्मस्पर्शी शब्दों ने मिलकर इस रचना को अमर बना दिया है। यह भजन हमें सिखाता है कि इस नश्वर संसार में सभी रिश्ते-नाते स्वार्थ और सुख के समय तक ही सीमित हैं; संकट और जीवन के अंतिम क्षणों में केवल प्रभु श्री राम का पावन नाम ही जीव का एकमात्र सच्चा सहारा और परम सत्य है।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

सुख के सब साथी दुःख में न कोई लिरिक्स हिंदी


सुख के सब साथी, दुःख में न कोई
मेरे राम, मेरे राम
तेरा नाम एक साचा, दूजा न कोई...

सुख के सब साथी, दुःख में न कोई
मेरे राम, मेरे राम
तेरा नाम एक साचा, दूजा न कोई...

जीवन आना-जाना छाया
झूठा जग का रूप-दिखाया
नैनों का तारा, टूट न जाये
सांस का धागा, छूट न जाये
सब झूठे नाते, झूठी है माया
मेरे राम, मेरे राम
तेरा नाम एक साचा, दूजा न कोई...

बाहर की तू माटी चाटे
मन के भीतर कोई न झांके
अपनी ही आग में जलता रहे तू
कांटों की राहों पे चलता रहे तू
कोई न पूछे, कोई न बांटे
मेरे राम, मेरे राम
तेरा नाम एक साचा, दूजा न कोई...

धीरज धर ले, ओ नादान
सुख-दुःख दोनों एक समान
आज अंधेरा, कल उजियारा
चिंता क्यों करता है प्यारे
राम भरोसे छोड़ दे प्राण
मेरे राम, मेरे राम
तेरा नाम एक साचा, दूजा न कोई...

सुख के सब साथी, दुःख में न कोई
मेरे राम, मेरे राम
तेरा नाम एक साचा, दूजा न कोई...

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

यह भजन श्रीमद्भगवद्गीता और रामचरितमानस के निष्काम कर्मयोग और शरणागति के सिद्धांत को अत्यंत सरल और सुगम भाषा में प्रस्तुत करता है। इसके प्रत्येक अंतरे का आध्यात्मिक और व्यावहारिक अर्थ निम्नलिखित है:

मुख्य मुखड़ा (स्थायी) का भावार्थ

भजन की शुरुआत ही जीवन के सबसे कड़वे और व्यावहारिक सत्य से होती है। कवि कहता है कि जब मनुष्य के पास धन, वैभव, स्वास्थ्य और अनुकूल परिस्थितियां होती हैं, तो संसार के सभी लोग उसके मित्र और संबंधी बन जाते हैं। परंतु, जैसे ही जीवन में विपत्ति, रोग, निर्धनता या संकट का समय आता है, वे सभी साथी धीरे-धीरे दूर हो जाते हैं। ऐसे कठिन समय में केवल और केवल भगवान श्री राम का नाम ही जीव का सच्चा संबल बनता है। ईश्वर का नाम ही एकमात्र शाश्वत और अविनाशी सत्य है, बाकी सब क्षणभंगुर और परिवर्तनशील है।

प्रथम अंतरा (जीवन आना-जाना छाया...) का भावार्थ

इस अंतरे में मानव जीवन की नश्वरता और संसार की मायावी प्रकृति का सुंदर चित्रण किया गया है। हमारा यह जीवन एक परछाई की तरह है, जो धूप ढलते ही गायब हो जाती है। यह संसार हमें झूठे सुख और सौंदर्य का भ्रम दिखाता है। कवि चेतावनी देता है कि जिसे हम अपनी आँखों का तारा (प्रियजन या भौतिक वस्तुएं) समझते हैं, वह कभी भी हमसे दूर हो सकता है। हमारी सांसों का यह नाजुक धागा कब टूट जाए, कोई नहीं जानता। इसलिए, इस झूठी माया और झूठे सांसारिक रिश्तों में फंसने के बजाय प्रभु राम के चरणों में ध्यान लगाना चाहिए।

द्वितीय अंतरा (बाहर की तू माटी चाटे...) का भावार्थ

यहाँ कवि मनुष्य की अज्ञानता पर प्रहार करता है। मनुष्य जीवन भर बाहरी भौतिक सुखों, वासनाओं और सांसारिक वस्तुओं (जिन्हें 'माटी' या धूल कहा गया है) के पीछे भागता रहता है। वह कभी अपने अंतःकरण में झांककर आत्मज्ञान प्राप्त करने का प्रयास नहीं करता। इस अज्ञानता के कारण वह जीवन भर अपनी ही तृष्णाओं की आग में जलता रहता है और दुखों के कांटों भरे मार्ग पर चलता रहता है। जब वह पूरी तरह थक जाता है और टूट जाता है, तब उसे अहसास होता है कि उसके इस आंतरिक दुख को बांटने वाला संसार में कोई नहीं है। केवल राम नाम ही इस तपन को शांत कर सकता है।

तृतीय अंतरा (धीरज धर ले, ओ नादान...) का भावार्थ

अंतिम अंतरे में कवि व्याकुल जीव को सांत्वना और धैर्य बंधाता है। वह कहता है कि हे नादान मनुष्य! तू धैर्य रख। सुख और दुख जीवन के दो पहलू हैं जो समय चक्र के साथ आते-जाते रहते हैं। यदि आज जीवन में अज्ञान या दुख का अंधेरा है, तो कल अवश्य ही ज्ञान और सुख का सवेरा होगा। इसलिए व्यर्थ की चिंता छोड़कर अपने प्राणों को, अपने संपूर्ण अस्तित्व को भगवान राम के भरोसे छोड़ दे। उनकी शरणागति ही परम शांति का मार्ग है।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस भजन की मुख्य भावना वैराग्य (Detachment) और पूर्ण शरणागति (Surrender to Divine) है। यह हमें निम्नलिखित महत्वपूर्ण संदेश देता है:

  • संसार की क्षणभंगुरता: यह जगत और इसके सुख स्थायी नहीं हैं। जो आज हमारा है, वह कल किसी और का होगा।
  • सच्चा मित्र ईश्वर है: सांसारिक रिश्ते स्वार्थ पर टिके हो सकते हैं, परंतु भगवान का भक्त के साथ संबंध निस्वार्थ और शाश्वत होता है।
  • समता का भाव: सुख और दुख दोनों को ईश्वर का प्रसाद मानकर समान भाव से स्वीकार करना चाहिए।
  • चिंता से मुक्ति: जब हम अपना सब कुछ ईश्वर को सौंप देते हैं, तो हम मानसिक तनाव और चिंताओं से मुक्त हो जाते हैं।

गीत की जानकारी | Song Information

विवरण (Parameter) जानकारी (Details)
भजन का नाम (Song Name) सुख के सब साथी दुःख में न कोई (Sukh Ke Sab Saathi Dukh Main Na Koi)
मुख्य गायक (Singer) मोहम्मद रफी (Mohammed Rafi)
गीतकार (Lyricist) राजेंद्र कृष्ण (Rajinder Krishan)
संगीतकार (Music Composer) कल्याणजी-आनंदजी (Kalyanji-Anandji)
फिल्म / एल्बम (Movie/Album) गोपी (Gopi - 1970)
मुख्य अभिनेता (Featured Actor) दिलीप कुमार (Dilip Kumar)
भाषा (Language) हिंदी (खड़ी बोली और सरल अवधी/भोजपुरी का प्रभाव)
समर्पित (Dedicated to) भगवान श्री राम (Lord Rama)

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

इस भजन की रचना और प्रस्तुति में भारतीय सिनेमा और संगीत जगत के दिग्गजों का योगदान रहा है:

  • मोहम्मद रफी: रफी साहब की मखमली और दर्दभरी आवाज ने इस भजन में प्राण फूंक दिए हैं। उनके गायन में जो करुणा और समर्पण का भाव है, वह सीधे सुनने वाले के हृदय को छू लेता है।
  • राजेंद्र कृष्ण: उन्होंने अत्यंत सरल शब्दों में उपनिषदों और वेदों के सार को पिरोया है। "बाहर की तू माटी चाटे" जैसे मुहावरे मानव की भौतिकवादी सोच पर गहरी चोट करते हैं।
  • कल्याणजी-आनंदजी: इस जोड़ी ने भजन को राग भैरवी और राग बिलावल के मिश्रण पर आधारित एक ऐसी धुन दी जो शांत और ध्यानमयी वातावरण का निर्माण करती है।
  • दिलीप कुमार: फिल्म 'गोपी' में अभिनेता दिलीप कुमार ने इस गीत पर जो अभिनय किया है, उसमें एक सच्चे भक्त की व्याकुलता और वैराग्य स्पष्ट झलकता है।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

कठिन शब्द (Word) सरल अर्थ (Meaning) आध्यात्मिक संदर्भ (Context)
साचा (Saacha) सत्य, अविनाशी केवल ईश्वर का नाम ही परम सत्य है।
माया (Maya) भ्रम, सांसारिक मोह वह शक्ति जो सत्य को छुपाकर असत्य को सत्य दिखाती है।
माटी चाटना (Maati Chaatna) धूल चाटना, व्यर्थ भटकना भौतिक और नश्वर सुखों के पीछे भागना।
धीरज (Dheeraj) धैर्य, सब्र कठिन समय में मन को विचलित न होने देना।
नादान (Naadan) अज्ञानी, नासमझ वह जीव जो संसार को ही अपना स्थायी घर मान बैठा है।
राम भरोसे (Ram Bharose) ईश्वर पर पूर्ण विश्वास प्रभु के चरणों में पूर्ण आत्मसमर्पण।

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

यह भजन केवल एक फिल्मी गीत नहीं है, बल्कि यह भारतीय समाज में एक महान आध्यात्मिक उपदेश की तरह स्वीकार किया गया है। जब भी समाज में कोई व्यक्ति घोर निराशा, अकेलेपन या अपनों के धोखे से टूट जाता है, तब यह भजन उसे संबल प्रदान करता है।

सांस्कृतिक रूप से, यह भजन हमें सिखाता है कि सुख और दुख दोनों ही अस्थाई हैं। भारतीय दर्शन में 'प्रारब्ध' और 'कर्म' के सिद्धांतों के अनुसार, मनुष्य को अपने कर्मों का फल भोगना ही पड़ता है। परंतु, यदि वह भगवान श्री राम के नाम का आश्रय लेता है, तो उसे इन दुखों को सहने की आंतरिक शक्ति प्राप्त होती है। यह भजन राम भजन की श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है क्योंकि यह सीधे आत्मा को झकझोरता है।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

इस पावन भजन से हमें अपने दैनिक जीवन के लिए कई महत्वपूर्ण सीख मिलती हैं:

  1. अपेक्षाओं का त्याग: संसार के लोगों से अत्यधिक अपेक्षाएं ही हमारे दुखों का कारण बनती हैं। यह स्वीकार करें कि हर व्यक्ति अपनी सीमाओं से बंधा है।
  2. आंतरिक शांति की खोज: बाहरी दुनिया में सुख ढूंढने के बजाय अपने भीतर झांकें और ईश्वर से जुड़ें।
  3. विपरीत परिस्थितियों में धैर्य: सुख के बाद दुख और दुख के बाद सुख का आना निश्चित है, इसलिए दोनों ही स्थितियों में समभाव बनाए रखें।
  4. ईश्वर पर अटूट विश्वास: जब सारे रास्ते बंद नजर आएं, तब ईश्वर की शरण में जाएं। उनका नाम हर संकट से उबारने में सक्षम है।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यद्यपि इस भजन को किसी भी समय सुना जा सकता है, परंतु निम्नलिखित अवसरों पर इसका विशेष महत्व है:

  • प्रातःकाल की प्रार्थना: सुबह के समय इस भजन को सुनने से मन शांत होता है और दिन की शुरुआत सकारात्मक ऊर्जा के साथ होती है।
  • संध्या आरती और सत्संग: शाम के समय मंदिरों या घरों में होने वाले कीर्तन और सत्संग में इस भजन का सामूहिक गायन किया जाता है।
  • कठिन समय और मानसिक तनाव में: जब व्यक्ति मानसिक रूप से अशांत या तनावग्रस्त हो, तब यह भजन उसे मानसिक शांति और संबल देता है।
  • राम नवमी और विशेष पूजा: भगवान राम के जन्मोत्सव या किसी भी धार्मिक अनुष्ठान के समय इस भजन का श्रवण अत्यंत फलदायी माना जाता है।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

मुख्य बिंदु संक्षिप्त विवरण
मुख्य विषय वैराग्य, ईश्वर भक्ति, जीवन की नश्वरता
आराध्य देव मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम
काव्य रस शांत रस और करुण रस
मुख्य संदेश संसार झूठा है, केवल राम नाम ही सच्चा है।
संगीत शैली शास्त्रीय सुगम संगीत (भक्ति प्रधान)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस कालजयी भजन के मूल गायक भारत के महान पार्श्व गायक मोहम्मद रफी (Mohammed Rafi) हैं। उन्होंने इस भजन को अपनी अत्यंत भावपूर्ण और दिव्य आवाज दी है।

यह भजन वर्ष 1970 में रिलीज हुई सुपरहिट हिंदी फिल्म 'गोपी' से लिया गया है। इसका सुमधुर संगीत प्रसिद्ध संगीतकार जोड़ी कल्याणजी-आनंदजी ने तैयार किया था।

इस भजन के अत्यंत गहरे और मर्मस्पर्शी बोल प्रसिद्ध गीतकार राजेंद्र कृष्ण (Rajinder Krishan) ने लिखे हैं। उन्होंने इसमें जीवन के दार्शनिक सत्यों को बहुत ही सरल शब्दों में पिरोया है।

इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि सांसारिक सुख और रिश्ते अस्थाई और स्वार्थ पर आधारित होते हैं। जीवन के अंतिम समय और संकट काल में केवल भगवान श्री राम का नाम ही जीव का सच्चा सहारा होता है। यह हमें वैराग्य और ईश्वर के प्रति समर्पण की सीख देता है।

इस पंक्ति का अर्थ है कि मनुष्य अपने भीतर छिपे ईश्वर और आत्मिक शांति को छोड़कर बाहरी दुनिया के नश्वर भौतिक सुखों (जिन्हें माटी या धूल के समान माना गया है) के पीछे व्यर्थ ही भागता रहता है।

जी हां, इस भजन की धुन मुख्य रूप से राग भैरवी के स्वरों पर आधारित है, जो शांत, करुण और भक्ति रस की अभिव्यक्ति के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।

इस भजन को सुनने से मन को असीम शांति मिलती है, मानसिक तनाव दूर होता है, और संसार के प्रति अत्यधिक मोह कम होता है। यह भक्त के भीतर भगवान श्री राम के प्रति अनन्य भक्ति और विश्वास को जाग्रत करता है।

अवश्य। बच्चों को यह भजन सिखाने से उनमें बचपन से ही अच्छे संस्कार, विपरीत परिस्थितियों में धैर्य रखने की क्षमता और ईश्वर के प्रति श्रद्धा का विकास होता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इस भजन के बोलों और उनके अर्थों का विश्लेषण सनातन धर्म के ग्रंथों जैसे श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों और श्रीरामचरितमानस के भक्ति सिद्धांतों के आलोक में किया गया है। गीत के बोलों की शुद्धता और कलाकारों की जानकारी को ऐतिहासिक और प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित किया गया है ताकि पाठकों को सबसे सटीक और ज्ञानवर्धक जानकारी प्राप्त हो सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भगवद्गीता - अध्याय 2 (सांख्य योग - सुख-दुख की समता का सिद्धांत)
  • गोस्वामी तुलसीदास रचित - श्रीरामचरितमानस (शरणागति प्रसंग)
  • फिल्म 'गोपी' (1970) - राजश्री प्रोडक्शंस और संगीत रिकॉर्ड्स
  • भारतीय भक्ति संगीत परंपरा और राग भैरवी का दार्शनिक विश्लेषण

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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