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Narmada Mata Bhajan

श्री नर्मदा चालीसा (Narmada Chalisa Lyrics in Hindi) - Narmada Chalisa नर्मदा नदी की पूजा Narmada Aarti - Bhaktilok

109 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
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श्री नर्मदा चालीसा (Narmada Chalisa Lyrics in Hindi) - 


वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें।

दोहा


देवि पूजित नर्मदा महिमा बड़ी अपार
चालीसा वर्णन करत कवि अरु भक्त उदार।
इनकी सेवा से सदा मिटते पाप महान
तट पर कर जप दान नर पाते हैं नित ज्ञान।

चौपाई


जय-जय-जय नर्मदा भवानी तुम्हरी महिमा सब जग जानी।
अमरकण्ठ से निकली माता सर्व सिद्धि नव निधि की दाता।
कन्या रूप सकल गुण खानी जब प्रकटीं नर्मदा भवानी।
सप्तमी सुर्य मकर रविवारा अश्वनि माघ मास अवतारा।
वाहन मकर आपको साजे कमल पुष्प पर आप विराजे।
ब्रह्मा हरि हर तुमको ध्यावे तब ही मनवांछित फल पावे।
दर्शन करत पाप कटि जाते कोटि भक्त गण नित्य नहाते।
जो नर तुमको नित ही ध्यावे वह नर रुद्र लोक को जावे।
मगरमच्छा तुम में सुख पावे अंतिम समय परमपद पावे।
मस्तक मुकुट सदा ही साजे पांव पैंजनी नित ही राजे।
कल-कल ध्वनि करती हो माता पाप ताप हरती हो माता।
पूरब से पश्चिम की ओरा बहतीं माता नाचत मोरा।
शौनक ऋषि तुम्हरो गुण गावे सूत आदि तुम्हरो यश गावे।
शिव गणेश भी तेरे गुण गावे  सकल देव गण तुमको ध्यावे।
कोटि तीर्थ नर्मदा किनारे ये सब कहलाते दु:ख हारे।
मनोकमना पूरण करती सर्व दु:ख माँ नित ही हरती।
कनखल में गंगा की महिमा कुरुक्षेत्र में सरस्वती महिमा।
पर नर्मदा ग्राम जंगल में नित रहती माता मंगल में।
एक बार कर के स्नाना तरत पिढ़ी है नर नारा।
मेकल कन्या तुम ही रेवा तुम्हरी भजन करें नित देवा।
जटा शंकरी नाम तुम्हारा तुमने कोटि जनों को है तारा।
समोद्भवा नर्मदा तुम हो पाप मोचनी रेवा तुम हो।
तुम्हरी महिमा कहि नहीं जाई करत न बनती मातु बड़ाई।
जल प्रताप तुममें अति माता जो रमणीय तथा सुख दाता।
चाल सर्पिणी सम है तुम्हारी महिमा अति अपार है तुम्हारी।
तुम में पड़ी अस्थि भी भारी छुवत पाषाण होत वर वारि।
यमुना मे जो मनुज नहाता सात दिनों में वह फल पाता।
सरस्वती तीन दीनों में देती गंगा तुरत बाद हीं देती।
पर रेवा का दर्शन करके मानव फल पाता मन भर के।
तुम्हरी महिमा है अति भारी जिसको गाते हैं नर-नारी।
जो नर तुम में नित्य नहाता रुद्र लोक मे पूजा जाता।
जड़ी बूटियां तट पर राजें मोहक दृश्य सदा हीं साजें|
वायु सुगंधित चलती तीरा जो हरती नर तन की पीरा।
घाट-घाट की महिमा भारी कवि भी गा नहिं सकते सारी।
नहिं जानूँ मैं तुम्हरी पूजा और सहारा नहीं मम दूजा।
हो प्रसन्न ऊपर मम माता तुम ही मातु मोक्ष की दाता।
जो मानव यह नित है पढ़ता उसका मान सदा ही बढ़ता।
जो शत बार इसे है गाता वह विद्या धन दौलत पाता।
अगणित बार पढ़ै जो कोई पूरण मनोकामना होई।
सबके उर में बसत नर्मदा यहां वहां सर्वत्र नर्मदा ।

दोहा


भक्ति भाव उर आनि के जो करता है जाप।
माता जी की कृपा से दूर होत संताप।
इति श्री नर्मदा चालीसा 


नर्मदा चालीसा पाठ संपूर्ण होने पर नर्मदा नदी की आरती भी करें। हिंदू धर्म में माना जाता है नर्मदा आरती करने से ही पाठ संपूर्ण होगा ।।

श्री नर्मदा माता की आरती लिरिक्स हिंदी (Narmada Mata Aarti Lyrics in Hindi) -


ॐ जय जगदानन्दी
मैया जय आनन्द कन्दी।
ब्रह्मा हरिहर शंकर रेवा शिव 
हरि शंकर रुद्री पालन्ति।
ॐ जय जय जगदानन्दी.....।
देवी नारद शारद तुम वरदायक
अभिनव पदचण्डी।
सुर नर मुनि जन सेवत
सुर नर मुनि शारद पदवन्ती।
ॐ जय जय जगदानन्दी.....।
देवी धूमक वाहन
राजत वीणा वादयन्ती।
झूमकत झूमकत झूमकत
झननना झननना रमती राजन्ती।
ॐ जय जय जगदानन्दी.....।
देवी बाजत ताल मृदंगा
सुरमण्डल रमती।
तोड़ीतान तोड़ीतान तोड़ीतान
तुरड़ड़ रमती सुरवन्ती।
ॐ जय जय जगदानन्दी.....।
देवी सकल भुवन पर आप विराजत
निशदिन आनन्दी।
गावत गंगा शंकरसेवत रेवा शंकर 
तुम भव मेटन्ती।
ॐ जय जय जगदानन्दी.....।

मैया जी को कंचन थाल विराजत
अगर कपूर बाती।
अमर कंठ विराजत
घाटन घाट कोटी रतन जोती।
ॐ जय जय जगदानन्दी.....।
मैया जी की आरती निशदिन
पढ़ि पढ़ि जो गावें।
भजत शिवानन्द स्वामी
मन वांछित फल पावें।
ॐ जय जय जगदानन्दी.....।
इति श्री नर्मदा आरती  

ॐ जय जगदानन्दी
मैया जय आनंद कन्दी
ब्रह्मा हरिहर शंकर
रेवा शिव हर‍ि शंकर
रुद्रौ पालन्ती
ॐ जय जगदानंदी।।

देवी नारद सारद तुम वरदायक
अभिनव पदचंडी
सुर नर मुनि जन सेवत
शारद पद्वंती
ॐ जय जगदानंदी।।

देवी धूम्रक वाहन राजत
वीणा वाद्यन्ती
झुमकत झुमकत झुमकत
झननन झननन झननन
रमती राजन्ती
ॐ जय जगदानंदी।।

देवी बाजत ताल मृदंगा
सुर मण्डल रमती
तोड़ीतान तोड़ीतान तोड़ीतान
तुरड़ड़ तुरड़ड़ तुरड़ड़
रमती सुरवन्ती
ॐ जय जगदानंदी।।

देवी सकल भुवन पर आप विराजत
निशदिन आनन्दी
गावत गंगा शंकर
सेवत रेवा शंकर
तुम भट मेटन्ती
ॐ जय जगदानंदी।।

मैयाजी को कंचन थार विराजत
अगर कपूर बाती
अमरकंठ में विराजत
घाटन घाट बिराजत
कोटि रतन ज्योति
ॐ जय जगदानंदी।।

मैयाजी की आरती निशदिन
जो कोई नर गावे
भजत शिवानन्द स्वामी
जपत हर‍ि हर स्वामी
मनवांछित फल पावे
ॐ जय जगदानंदी।।

ॐ जय जगदानन्दी
मैया जय आनंद कन्दी
ब्रह्मा हरिहर शंकर
रेवा शिव हर‍ि शंकर
रुद्रौ पालन्ती
ॐ जय जगदानंदी।।








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सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 10 Aug 2026

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(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
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