नर्मदाष्टकम लिरिक्स (Narmada Ashtakam Lyrics in Hindi) - श्री नर्मदा स्तुति Narmada Jayanti Madhuri Sharma Katare - BhaktiLok
नर्मदाष्टकम लिरिक्स (Narmada Ashtakam Lyrics in Hindi) - श्री नर्मदा स्तुति Narmada Jayanti Madhuri Sharma Katare -
नर्मदाष्टकम लिरिक्स (Narmada Ashtakam Lyrics in Hindi) -
सबिंदु सिन्धु सुस्खल तरंग भंग रंजितमद्विषत्सु पाप जात जात कारि वारि संयुतमकृतान्त दूत काल भुत भीति हारि वर्मदेत्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे ॥1॥त्वदम्बु लीन दीन मीन दिव्य सम्प्रदायकमकलौ मलौघ भारहारि सर्वतीर्थ नायकंसुमस्त्य कच्छ नक्र चक्र चक्रवाक् शर्मदेत्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे ॥2॥महागभीर नीर पुर पापधुत भूतलंध्वनत समस्त पातकारि दरितापदाचलमजगल्ल्ये महाभये मृकुंडूसूनु हर्म्यदेत्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे ॥3॥गतं तदैव में भयं त्वदम्बु वीक्षितम यदामृकुंडूसूनु शौनका सुरारी सेवी सर्वदापुनर्भवाब्धि जन्मजं भवाब्धि दुःख वर्मदेत्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे ॥4॥अलक्षलक्ष किन्न रामरासुरादी पूजितंसुलक्ष नीर तीर धीर पक्षीलक्ष कुजितमवशिष्ठशिष्ट पिप्पलाद कर्दमादि शर्मदेत्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे ॥5॥सनत्कुमार नाचिकेत कश्यपात्रि षटपदैधृतम स्वकीय मानषेशु नारदादि षटपदै:रविन्दु रन्ति देवदेव राजकर्म शर्मदेत्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे ॥6॥अलक्षलक्ष लक्षपाप लक्ष सार सायुधंततस्तु जीवजंतु तंतु भुक्तिमुक्ति दायकंविरन्ची विष्णु शंकरं स्वकीयधाम वर्मदेत्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे ॥7॥अहोमृतम श्रुवन श्रुतम महेषकेश जातटेकिरात सूत वाड़वेषु पण्डिते शठे नटेदुरंत पाप ताप हारि सर्वजंतु शर्मदेत्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे ॥8॥इदन्तु नर्मदाष्टकम त्रिकलामेव ये सदापठन्ति ते निरंतरम न यान्ति दुर्गतिम कदासुलभ्य देव दुर्लभं महेशधाम गौरवमपुनर्भवा नरा न वै त्रिलोकयंती रौरवम ॥9॥त्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदेनमामि देवी नर्मदे, नमामि देवी नर्मदेत्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे
🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)
यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "नर्मदाष्टकम लिरिक्स (Narmada Ashtakam Lyrics in Hindi) - श्री नर्मदा स्तुति Narmada Jayanti Madhuri Sharma Katare - BhaktiLok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।
भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)
श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)
भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।
भजनों को गाने की सही विधि क्या है?
भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।
क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?
हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।
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