सूर्य उपासना लिरिक्स (Surya Upasana Lyrics in Hindi ) - Surya Bhajan Surya Upasana - Bhaktilok
सूर्य उपासना लिरिक्स (Surya Upasana Lyrics in Hindi ) -
जय जय सूर्य देव भगवानामहातेज प्रभु रूप सुहानानित नित करूं तुम्हें प्रणामजय भगवान जय जय सूर्य भगवानरवि दिवाकर दादश नामाजपत नाम पूरण हो कामाकरू निरंतर तेरा ध्यानजय भगवान जय जय सूर्य भगवानसूर्य भास्कर देव निरालासारे जग में करें डजालामहिमा प्रभु की बड़ी महानजय भगवान जय जय सूर्य भगवानजय गुरुदेव सूर्य भगवानाआपसे पाए ज्ञान हनुमानाआपके पुत्र शनि भगवानजय भगवान जय जय सूर्य भगवानसात अश्व के रथ पर विराजेमोहित मुकुट शीश पे साजेशक्ति बल में तुम बलवानजय भगवान जय जय सूर्य भगवानछठ माई का पर्व जो आएभक्त हजारों अर्ध चढ़ाएफल फूलों से करें सम्मानजय भगवान जय जय सूर्य भगवानसूर्य नारायण विष्णु स्वरूपभानु दिवाकर नाम सत्य रूपजपो सूर्य के द्वादश नामजय भगवान जय जय सूर्य भगवानसूर्य की महिमा सबने गाईसारे जग में कृति छाईदेव असुर पाए वरदानजय भगवान जय जय सूर्य भगवानसूर्य कुंड की महिमा भारीइसके जल में मिटे बीमारीसूर्य देव का तीर्थ महानजय भगवान जय जय सूर्य भगवानप्रातः काल का नियम बनाओसूर्य देव को अर्थ चढ़ाओहर मुश्किल होगी आसानजय भगवान जय जय सूर्य भगवानसबसे बड़ी है सूर्य की पूजाइनके जैसा देव न दूजाकरें प्रभु सबका कल्याणजय भगवान जय जय सूर्य भगवाननर्म धूप जो सूर्य की खाए रोग मिटे रोगी हरसाएवैध हकीम बताते ज्ञानजय भगवान जय जय सूर्य भगवानसूर्य की किरणें जब लहराएजगमग सारा जग हो जाएसुखदाता रवि देव महानजय भगवान जय जय सूर्य भगवानदिनकर सूर्य दिनेश कहायेपाप श्राप से मुक्ति दिलाएदुष्टो के तोड़े अभिमानजय भगवान जय जय सूर्य भगवानकनक बदन कुंडल मन भाएमुतियन माला गले में सोहेपद्मासन पर करें विश्रामजय भगवान जय जय सूर्य भगवानसात अश्व रहे सूर्य के साथीघूमे संग संग यह दिन रातीसारथी बने अरुण भगवानजय भगवान जय जय सूर्य भगवान
🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)
यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "सूर्य उपासना लिरिक्स (Surya Upasana Lyrics in Hindi ) - Surya Bhajan Surya Upasana - Bhaktilok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।
भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)
श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)
भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।
भजनों को गाने की सही विधि क्या है?
भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।
क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?
हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।
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