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सूर्य उपासना लिरिक्स (Surya Upasana Lyrics in Hindi ) - Surya Bhajan Surya Upasana - Bhaktilok

120 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
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सूर्य उपासना  लिरिक्स (Surya Upasana Lyrics in Hindi ) - Surya Bhajan Surya Upasana - Bhaktilok



 

सूर्य उपासना  लिरिक्स (Surya Upasana Lyrics in Hindi ) - 


जय जय सूर्य देव भगवाना
महातेज प्रभु रूप सुहाना
नित नित करूं तुम्हें प्रणाम
जय भगवान जय जय सूर्य भगवान
रवि दिवाकर दादश नामा 
जपत नाम पूरण हो कामा
करू निरंतर तेरा ध्यान 
जय भगवान जय जय सूर्य भगवान
सूर्य भास्कर देव निराला 
सारे जग में करें डजाला 
महिमा प्रभु की बड़ी महान 
जय भगवान जय जय सूर्य भगवान
जय गुरुदेव सूर्य भगवाना
आपसे पाए ज्ञान हनुमाना 
आपके पुत्र शनि भगवान 
जय भगवान जय जय सूर्य भगवान
सात अश्व के रथ पर विराजे 
मोहित मुकुट शीश पे साजे
शक्ति बल में तुम बलवान
जय भगवान जय जय सूर्य भगवान
छठ माई का पर्व जो आए
भक्त हजारों अर्ध चढ़ाए
फल फूलों से करें सम्मान
जय भगवान जय जय सूर्य भगवान
सूर्य नारायण विष्णु स्वरूप
भानु दिवाकर नाम सत्य रूप
जपो सूर्य के द्वादश नाम
जय भगवान जय जय सूर्य भगवान
सूर्य की महिमा सबने गाई
सारे जग में कृति छाई 
देव असुर पाए वरदान 
जय भगवान जय जय सूर्य भगवान 
सूर्य कुंड की महिमा भारी 
इसके जल में मिटे बीमारी 
सूर्य देव का तीर्थ महान 
जय भगवान जय जय सूर्य भगवान 
प्रातः काल का नियम बनाओ 
सूर्य देव को अर्थ चढ़ाओ 
हर मुश्किल होगी आसान 
जय भगवान जय जय सूर्य भगवान 
सबसे बड़ी है सूर्य की पूजा 
इनके जैसा देव न दूजा 
करें प्रभु सबका कल्याण 
जय भगवान जय जय सूर्य भगवान 
नर्म धूप जो सूर्य की खाए रोग मिटे रोगी हरसाए 
वैध हकीम बताते ज्ञान 
जय भगवान जय जय सूर्य भगवान 
सूर्य की किरणें जब लहराए 
जगमग सारा जग हो जाए 
सुखदाता रवि देव महान 
जय भगवान जय जय सूर्य भगवान
दिनकर सूर्य दिनेश कहाये 
पाप श्राप से मुक्ति दिलाए 
दुष्टो के तोड़े अभिमान 
जय भगवान जय जय सूर्य भगवान
कनक बदन कुंडल मन भाए 
मुतियन माला गले में सोहे 
पद्मासन पर करें विश्राम 
जय भगवान जय जय सूर्य भगवान 
सात अश्व रहे सूर्य के साथी 
घूमे संग संग यह दिन राती 
सारथी बने अरुण भगवान 
जय भगवान जय जय सूर्य भगवान

 



🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "सूर्य उपासना लिरिक्स (Surya Upasana Lyrics in Hindi ) - Surya Bhajan Surya Upasana - Bhaktilok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 11 Aug 2026

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