मंत्र पुष्पांजलि लिरिक्स (Mantra pushpanjali Lyrics in Hindi) - ॐ यज्ञेन यज्ञमयजन्त गणेश पूजा का पहला मंत्र Ganesh Puja Mantra - Bhaktilok
मंत्र पुष्पांजलि लिरिक्स (Mantra pushpanjali Lyrics in Hindi) - ॐ यज्ञेन यज्ञमयजन्त गणेश पूजा का पहला मंत्र Ganesh Puja Mantra -
प्रथम मंत्र : (Mantra) -
ॐ यज्ञेन यज्ञमयजन्त देवास्तनि धर्माणि प्रथमान्यासन् ।ते ह नाकं महिमान: सचंत यत्र पूर्वे साध्या: संति देवा: ॥
द्वितीय मंत्र : (Mantra) -
ॐ राजाधिराजाय प्रसह्य साहिने।नमो वयं वैश्रवणाय कुर्महे।स मस कामान् काम कामाय मह्यं।कामेश्र्वरो वैश्रवणो ददातु कुबेराय वैश्रवणाय।महाराजाय नम: ।
तृतीय मंत्र : (Mantra) -
ॐ स्वस्ति, साम्राज्यं भौज्यं स्वाराज्यंवैराज्यं पारमेष्ट्यं राज्यं महाराज्यमाधिपत्यमयं ।समन्तपर्यायीस्यात् सार्वभौमः सार्वायुषः आन्तादापरार्धात् ।पृथीव्यै समुद्रपर्यंताया एकराळ इति ॥
चतुर्थ मंत्र : (Mantra) -
ॐ तदप्येषः श्लोकोभिगीतो।मरुतः परिवेष्टारो मरुतस्यावसन् गृहे।आविक्षितस्य कामप्रेर्विश्वेदेवाः सभासद इति ॥॥ मंत्रपुष्पांजली समर्पयामि ॥
पंचम मंत्र : (Mantra) -
एकदंतायविघ्महे वक्रतुण्डाय धीमहि ।तन्नोदंती प्रचोदयात् ।मंत्रपुष्पांजली समर्पयामि ।।
🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)
प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश जी का यह भजन "मंत्र पुष्पांजलि लिरिक्स (Mantra pushpanjali Lyrics in Hindi) - ॐ यज्ञेन यज्ञमयजन्त गणेश पूजा का पहला मंत्र Ganesh Puja Mantra - Bhaktilok" सभी कार्यों के निर्विघ्न संपन्न होने की कामना से गाया जाता है। विघ्नहर्ता गणेश जी बुद्धि, ज्ञान और विवेक के अधिष्ठाता देव हैं। इस भजन के प्रत्येक शब्द में गणेश जी के गजमुख, विशाल उदर, और चूषक वाहन का सुंदर वर्णन है।
इस भजन की मूल भावना विघ्न विनाश और शुभ-लाभ की प्राप्ति की है। जीवन में जब भी कोई नया कार्य प्रारंभ करना हो, तो गणेश जी का स्मरण करना अनिवार्य माना गया है, क्योंकि वे ऋद्धि-सिद्धि के प्रदाता हैं।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)
गणेश पुराण के अनुसार, श्री गणेश जी की स्तुति और भजन सुनने से बुद्धि का विकास होता है, विद्या अर्जन में आने वाली बाधाएं समाप्त होती हैं और घर में शांति का वातावरण बनता है।
प्रथम पूज्य श्री गणेश जी के जन्म और उनकी कथाओं का संपूर्ण विवरण जानने के लिए ब्रह्म पुराण गणेश महिमा का पाठ करें। गणेश संकीर्तन से मानसिक अशांति दूर होती है, बुद्धि कुशाग्र होती है और किसी भी कार्य में आने वाली विघ्न-बाधाएं स्वतः ही दूर हो जाती हैं।
🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)
बुधवार और गणेश चतुर्थी के दिन गणेश जी के सम्मुख दूर्वा और मोदक अर्पित कर इस भजन का संकीर्तन करें। गायन के समय सिंदूर का तिलक लगाना शुभ होता है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
गणेश जी की पूजा में 'दूर्वा' (दूब घास) क्यों चढ़ाई जाती है?
दूर्वा शीतलता प्रदान करने वाली है। अनलासुर नामक दैत्य को निगलने के बाद गणेश जी के पेट में उत्पन्न जलन को शांत करने के लिए मुनियों ने उन्हें दूर्वा चढ़ाई थी। तब से गणेश जी को दूर्वा अत्यंत प्रिय है।
भगवान गणेश के भजन किस दिन विशेष रूप से गाने चाहिए?
बुधवार का दिन और हर माह आने वाली संकष्टी व विनायक चतुर्थी की तिथियां गणेश आराधना के लिए सर्वोत्तम हैं।
क्या प्रथम पूज्य गणेश जी का स्मरण हर पूजा से पहले जरूरी है?
हाँ, शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव से मिले वरदान के कारण किसी भी शुभ कार्य या देव पूजा की शुरुआत गणेश जी के पूजन व स्मरण से ही की जाती है।
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