Parvati Stotram

ले बाबा का नाम अमृत बरसेगा भजन लिरिक्स (Le Baba Ka Naam Amrit Barsega Lyrics in Hindi) - Bhakti Sadhna Shyam Bhajan - Bhaktilok

478 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

श्याम बाबा का अमृतमयी नामः संकटों का समाधान

बाबा के नाम का जप जीवन में खुशियाँ और सुख लाता है। यह भजन संकटों को दूर करता है।

ले बाबा का नाम अमृत बरसेगा बरसेगा रे बरसेगा रे तू तो लें बाबा का नाम अमृत बरसेगा।।चिंता सारी मिट जाएगीजीवन में खुशिया आएगीचिंता सारी मिट जाएगीजीवन में खुशिया आएगीतेरे हो जाये पुरण कामअमृत बरसेगा तू तो लें बाबा का नाम अमृत बरसेगा।।श्याम बाबा की महिमा है भारीसंकट मोचन अति सुख कारीश्याम बाबा की महिमा है भारीसंकट मोचन अति सुख कारीतेरे भर देंगे भंडार अमृत बरसेगातू तो लें बाबा का नाम अमृत बरसेगा।।जो चाहोगे मिल जाएगाकभी ना तू फिर दुःख पायेगाजो चाहोगे मिल जाएगाकभी ना तू फिर दुःख पायेगातू भी जप ले बाबा का नाम अमृत बरसेगालें बाबा का नाम अमृत बरसेगा।।दुनिया तेरे साथ चलेगीसारी रुकावट हट जाएगीदुनिया तेरे साथ चलेगीसारी रुकावट हट जाएगीतेरा खूब बढ़ेगा मान अमृत बरसेगातू भी लें बाबा का नाम अमृत बरसेगा।।
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय श्याम बाबा के नाम की महिमा और उसके प्रभावों पर केंद्रित है। यह भजन कहता है कि जब व्यक्ति 'बाबा का नाम' लेता है, तब उसके जीवन में 'अमृत' का वर्षा होती है, जो उसके समस्त कष्टों को दूर करता है। पहले ही बोल में यह उत्तेजना है कि चिंताओं के सारे बादल हट जाएंगे और जीवन में खुशियों की बौछार होगी। जब भक्त बाबा का नाम लेता है, तो उसके पुराण कार्य पूर्ण होते हैं, इसका अस्तित्व इससे बड़ा और क्या हो सकता है? यह दर्शाता है कि श्रद्धा और भक्ति के चलते बाबा भक्तों को अमृत देकर उनकी हर आरजू पूरी करते हैं।

दूसरी पंक्तियों में श्याम बाबा की महिमा को विशेष रूप से उठााया गया है। उन्हें संकट मोचन और अति सुखदायक कहा गया है। जब भक्त उनके नाम का जप करते हैं, तो जीवन के सारे संकट टल जाते हैं। यह भजन भावनात्मक रूप से भक्त को उनके प्रति दृढ़ता और विश्वास में बढ़ावा देता है। इसे गाकर भक्त अपनी चिंता को त्यागते हुए शांति और संतोष प्राप्त कर सकते हैं, क्योंकि बाबा का नाम सच्चे प्रेम और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक है। जब मन, वाणी, और क्रिया के एकीकरण के साथ बाबा का नाम लिया जाता है, तब जीवन में सकारात्मक परिवर्तन दृष्टिगोचर होता है।

इस भजन में भक्ति मार्ग का अद्भुत दर्शन है, जो यह सिखाता है कि भक्त की आस्था अंतिम धुरी है। शचन और नाम जप का महत्व जीवन में सफलताएँ लाने के लिए अत्यंत सार्थक है। यह हमें अपने भीतर की वेदना और संकटों के प्रति ध्यान केंद्रित करने से रोकता है और अंतरात्मा की शांति की ओर ले जाता है। श्याम बाबा के प्रति यह भक्ति उनका नाम जपने के माध्यम से असीम शक्ति उत्पन्न करती है, जिससे भक्त को सच्चे सुख की प्राप्ति होती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन भारतीय धार्मिक परंपरा में भक्ति की विशेष स्थिति को दर्शाता है। इसमें बाबा का नाम लेना, जैसे कि भजन या कीर्तन में, न केवल भक्ति का प्रदर्शन है, बल्कि यह मानसिक और आध्यात्मिक बल का साधन भी है। धार्मिक ग्रंथों जैसे कि भगवद गीता और पुराणों में नाम जप का महत्व अधिक बताया गया है, इसके माध्यम से भक्त अपने जीवन के दुख और परेशानी से छुटकारा पा सकते हैं। नाम जप को साधक की भक्ति का सर्वोच्च साधन माना गया है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। बाबा का नाम जपने से मानसिक शांति ही नहीं, अपितु शारीरिक स्वास्थ्य में भी सुधार होता है। यह तनाव को कम करने और बुद्धि को तेज करने में सहायक होता है। नियमित भजन के साथ, आप आत्मिक विकास का अनुभव कर सकते हैं, जिससे जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन को गाने का उत्तम समय सुबह या शाम है, जब मन शांत होता है। पूजा के समय एक दीपक जलाना और कुछ खास फूलों या फल का भोग लगाना चाहिए। सही मुद्रा में बैठकर ध्यान और समर्पण के साथ भजन गाना चाहिए, जिससे बाबा की कृपा का अनुभव हो सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश है कि बाबा के नाम में अमृत है, जो भक्तों के दुखों और चिंताओं को मिटाता है। जब हम बाबा का नाम लेते हैं, तो हमारी परेशानियाँ दूर होती हैं और जीवन में खुशियाँ आती हैं।

भजन गाने के लाभ क्या हैं?

भजन गाने से मन की शांति और एकाग्रता बढ़ती है। यह भक्त के लिए मानसिक और आध्यात्मिक शुद्धता लेकर आता है। इसके साथ-साथ जीवन में सकारात्मकता और खुशियों का संचार होता है।

क्या इस भजन को किसी विशेष दिन पर गाना चाहिए?

ज्यादातर इस भजन को दैनिक रूप से सुबह या शाम को गाने की सलाह दी जाती है। विशेष अवसरों पर, जैसे पूर्णिमा, शनिवार या किसी बाबा के उत्सव के दिन भी इसे गाया जा सकता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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