प्रस्तावना एवं परिचय
सम्पूर्ण मूल पाठ एवं पवित्र श्लोक
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
CS Lahari Shyam Bhajan - Bhaktilok
वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें।
शरण पड़ा हूँ मैं उबारो उबारो बाबा श्याम जी
मात पिता गुरुदेव के कोटि कोटि कर ध्यान
पीड़ा हरण श्री हरी सुनो अरज़ करो संज्ञान
विनय विनायक गणपति दे शरद आशीष
चालीसा मेरे श्याम की पढ़े कॉम छत्तीस
शरण पड़ा हूँ मैं उबारो
जय जय खाटू श्याम बिहारी श्रवण करो विनती ये हमारी
पांडव कुल जन मान बढ़ायो बर्बरीक महा वीर कहायो
मन मोहन माधव वर पायो कलयुग कलिमल सकल सुहायो
शीश के दानी महा बलवानी तर्क वितर्क करात अज्ञानी
हे हरी हर हे दीं दयाला कष्ट हरो कलिकाल कृपाला
शरण पड़ा हूँ मैं उबारो
मधुर मधुर मुख रतन लगाऊं सांझ सवेरे महिमान गाउँ
जगमग जगमग ज्योत विराजे मोरछड़ी हाथो में साजे
इत्तर फुहार सुगन्धित शोभा निरखत नयन मगन मन लोभा
अनुपम छवि श्रृंगार सजीला छठा कहूं क्या छैल छबीला
कौन कठिन प्रभु काज हमारो जो तुमसे नहीं जाए सुधारो
शरण पड़ा हूँ मैं उबारो
हारे जानो के आप सहारे शरण पड़े कर जोर तुम्हारे
कष्ट हरो अविलम्ब हमारे शरणागत बच्छल प्रभु प्यारे
खाटू नगर अजब अलबेला धाम अलौकिक एक अकेला
शुक्ल पक्ष एकादशी प्यारी तन मन धन जन जन बलिहारी
लखदातार मदन मन भावन सुमन भ्रमर जिमि नाच नचावन
शरण पड़ा हूँ मैं उबारो
स्वर्ण जड़ित सिंहासन प्यारो मोर मुकुट मणिमय रत्ना रो
जो जन दरश करे इक बारी भूल न पावें उमरिया सारी
भक्त शिरोमणि आलू सिंह जी श्याम बहादुर जी की मर्ज़ी
सेवक परिजन चंवर दुरावे निजकर श्यामहि स्वयं सजावे
चटक चूरमा मिश्री मेवा छप्पन भोग भाव जिमि सेवा
शरण पड़ा हूँ मैं उबारो
कोटि कोटि सात कोटि निशाना चढ़त चढ़ावे सकल सुजाना
पैदल पेट पलनीया आवे मन वांछित फल तुरतहि पावे
सन्मुख गोपीनाथ दरश है शीश झुकावट ह्रदय हरष है
चौखट वीर बलि बलवंता पवन पुत्र जय जय हनुमंता
अमृत वृष्टि नहाये तन मन सुरगाहीं से सुन्दर तव आँगन
शरण पड़ा हूँ मैं उबारो
सांवरिया जो सजी फुलवारी श्याम बगीची मनोहर प्यारी
श्यामकुण्ड क्षय पाप कहावे निर्मल नीर मगन मन नहावे
रंग रंगीले फागुन मेले सांवरिया भक्तों संग खेले
श्याम श्याम का जय जयकारा नभ गूंजे गुणगान अपारा
शरण श्याम सेवा मोहे दीजो जनम जनम चाकर रख लीजो
शरण पड़ा हूँ मैं उबारो
मुख से मांग करूँ क्या स्वामी घट घट जानो अन्तर्यामी
सौंप दई पतवार तुम्ही को तुम जानो प्रभु लाज तुम्ही को
कंचन कनक बानी ये काया जब जब तेरा सुमिरन गाया
निर्मल मन भोले बड़भागी सहज कृपा पावें अनुरागी
मैं मति मूढ़ गंवार कहाँउँ किस विध तेरी थाह में पाऊं
शरण पड़ा हूँ मैं उबारो
चरण पकड़ प्रभु बैठ गाया हूँ लिखवाया वो लिखता गाया हूँ
नर नारी जो पढ़े पढ़ावे श्याम धनि की महिमा गावे
निश्चय नित आनंद मनावे दुःख दारिद्र ना वो मन पावे
प्रेम मगन अँखियाँ जिन आंसू उनके ह्रदय करत हरी वासु
लेहरी बाबा देव दयानिधि जस कर लज्जा रखो जेहिं विधि
शरण पड़ा हूँ मैं उबारो
जय श्री श्याम देवाये नमः मंत्र महान विशेष
रोग दोष सब काट के हरता कोप कलेश
शरण पड़ा हूँ मैं उबारो
हाथ जोड़ विनती करूँ सुणजो चित्त लगाए
दास आ गया शरण में रखियो इसकी लाज
धन्य ढुंढारो देश है खाटू नगर सुजान
अनुपम छवि श्री श्याम की दर्शन से कल्याण
श्याम श्याम नित मैं रटूं श्याम है जीवन प्राण
श्याम भक्त जग में बड़े उनको करूँ प्रणाम
खाटू नगर के बीच में बण्यो आपको धाम
फाल्गुन शुक्ल मेला भरे जय जय बाबा श्याम
फाल्गुन शुक्ल द्वादशी उत्सव भारी होये
बाबा के दरबार से खाली जाये ना कोई
उमा पति लक्ष्मी पति सीता पति श्री राम
लज्जा सबकी राखियो खाटू के श्री श्याम
पान सुपारी इलायची इत्तर सुगंध भरपूर
सब भक्तन की विनती दर्शन देवो हुज़ूर
आलू सिंह तो प्रेम से धरे श्याम को ध्यान
श्याम भक्त पावे सदा श्याम कृपा से मान
शरण पड़ा हूँ मैं उबारो
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ
संकटमोचन हनुमान जी का यह भजन "श्री श्याम चालीसा एवं स्तुति (Shri Shyam Chalisa Stuti Lyrics in Hindi) - CS Lahari Shyam Bhajan - Bhaktilok" बल, बुद्धि, विद्या और भक्ति का संचार करने वाला है। कलयुग के जागृत देव श्री हनुमान जी की महिमा अपार है। इस भजन का मुख्य उद्देश्य साधक के भीतर के भय को दूर कर उसमें आत्मगौरव और निष्काम सेवा भाव जागृत करना है।
भजन की चौपाइयों और पंक्तियों में हनुमान जी की लंका दहन, संजीवनी बूटी लाना और प्रभु श्री राम के प्रति अनन्य प्रेम का वर्णन होता है। हनुमान जी की शरण में जाने पर बड़े से बड़ा संकट भी क्षण भर में समाप्त हो जाता है, यही इस भजन की मूल भावना है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ
हनुमान चालीसा और सुंदरकांड की भांति ही हनुमान भजनों का विशेष धार्मिक महत्त्व है। हनुमान जी को अष्ट सिद्धि और नौ निधियों के दाता के रूप में पूजा जाता है। इस पावन भजन के गायन से भूत-पिशाच, नकारात्मक ऊर्जा और सभी प्रकार के ऊपरी बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें। हनुमान भजन से आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि होती है, मानसिक रोग जैसे तनाव, अनिद्रा और डिप्रेशन दूर होते हैं। यह छात्रों की बुद्धि और परीक्षा में सफलता के लिए भी रामबाण है।
🕒 साधना एवं गायन विधि
हनुमान जी की पूजा के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन विशेष रूप से निर्धारित है। लाल आसन पर बैठकर, हनुमान जी के सम्मुख चमेली के तेल का दीपक जलाएं और पूरे मनोयोग से इस भजन का संकीर्तन करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
हनुमान जी को किस दिन चमेली का तेल चढ़ाना चाहिए?
शनिवार और मंगलवार के दिन हनुमान जी को सिंदूर में चमेली का तेल मिलाकर चढ़ाना अत्यंत शुभ और संकट निवारक माना गया है।
क्या हनुमान भजन परीक्षा के भय को दूर करने में सहायक है?
हाँ, हनुमान जी के भजनों और मंत्रों के संकीर्तन से मन एकाग्र होता है, भय का नाश होता है और याददाश्त बढ़ती है।
शनि दोषों की शांति के लिए हनुमान उपासना क्यों की जाती है?
हनुमान जी ने शनिदेव को रावण के बंधन से मुक्त कराया था, जिसके कारण शनिदेव ने वचन दिया था कि जो हनुमान जी की भक्ति करेगा, उसे शनि जनित पीड़ा नहीं भोगनी पड़ेगी।
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