Shyam Bhajan

बस इतनी तमन्ना है श्याम तुम्हें देखूं घनश्याम तुम्हें देखूं (Shyam Tujhe Dewkhu Ghanshyam Tujhe Dekhu Lyrics in Hindi) - जया किशोरी जी - Bhaktilok

54 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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बस इतनी तमन्ना है श्याम तुम्हें देखूं घनश्याम तुम्हें देखूं (Shyam Tujhe Dekhu Ghanshyam Tujhe Dekhu Lyrics in Hindi) - जया किशोरी जी

"बस इतनी तमन्ना है श्याम तुम्हें देखूं घनश्याम तुम्हें देखूं" भक्ति संगीत की दुनिया में एक अत्यंत लोकप्रिय, हृदयस्पर्शी और भावपूर्ण कृष्ण भजन है। परम पूज्य साध्वी जया किशोरी जी के मधुर, विलक्षण और शांत कंठ से स्वरबद्ध यह भजन आज के समय में हर कृष्ण भक्त के हृदय की गहराइयों को छू जाता है। इस भजन का केंद्रीय भाव 'दर्शन-पिपासा' यानी आराध्य के साक्षात दर्शन की तीव्र और अनन्य लालसा है। कृष्ण भक्ति की सनातन परंपरा में सूरदास, मीराबाई और रसखान जैसे संतों ने जिस तड़प और प्रेम को अपने पदों में व्यक्त किया था, उसी प्रेम की सजीव अनुभूति यह आधुनिक भजन कराता है। जब भक्त सांसारिक मोह-माया, दुखों और बंधनों से विरक्त होकर केवल अपने प्रियतम घनश्याम के दिव्य स्वरूप को निहारने की जिद पकड़ लेता है, तब इस भजन के बोल स्वतः ही प्रार्थना बन जाते हैं। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस भजन के सम्पूर्ण लिरिक्स, शब्दार्थ, पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ, आध्यात्मिक महत्व और जीवन से जुड़ी सीख का गहन अध्ययन करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

बस इतनी तमन्ना है, बस इतनी तमन्ना है
श्याम तुम्हें देखूं, घनश्याम तुम्हें देखूं...।।

सर मुकुट सुहाना हो, माथे तिलक निराला हो
गल मोतियन माला हो, श्याम तुम्हें देखूं, घनश्याम तुम्हें देखूं...।।

कानों में हो बाली, लटके लट घुंघराली
तेरे अधर पे मुरली हो, श्याम तुम्हें देखूं, घनश्याम तुम्हें देखूं...।।

बाजू बंद बाहों पे, पैजनियाँ पाओं में
होठों पे हसी कुछ हो, श्याम तुम्हें देखूं, घनश्याम तुम्हें देखूं...।।

दिन हो अँधेरा हो, चाहे शाम सवेरा हो
सोऊँ तो सपनो में, श्याम तुम्हें देखूं, घनश्याम तुम्हें देखूं...।।

मैया की मैया हो, गोकुल की गैया हो
ग्वालों की सैया हो, श्याम तुम्हें देखूं, घनश्याम तुम्हें देखूं...।।

रूठे तो माना लूं, चरणों से लगा लूं
दुनिया को भुला दूं, श्याम तुम्हें देखूं, घनश्याम तुम्हें देखूं...।।

सांसों की माला हो, जीवन का प्याला हो
आँखों में उजाला हो, श्याम तुम्हें देखूं, घनश्याम तुम्हें देखूं...।।

बस इतनी तमन्ना है, बस इतनी तमन्ना है
श्याम तुम्हें देखूं, घनश्याम तुम्हें देखूं...।।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का प्रत्येक शब्द भक्त के भीतर छिपी अनन्य भक्ति और समर्पण को प्रकट करता है। 'तमन्ना' का अर्थ है तीव्र इच्छा। भक्त भगवान से किसी भी भौतिक सुख, वैभव, धन या ऐश्वर्य की मांग नहीं करता, बल्कि उसकी एकमात्र और अंतिम तमन्ना केवल प्रभु के दर्शन करने की है। भजन के शुरुआती चरणों में भगवान श्रीकृष्ण के अलौकिक और मनमोहक श्रृंगार का बहुत ही सुंदर वर्णन किया गया है। भक्त उनके सिर पर सुशोभित मोर मुकुट, माथे पर लगे दिव्य तिलक और गले में मोतियों की माला के दर्शन करना चाहता है। यह श्रृंगार केवल आभूषणों का नहीं, बल्कि संपूर्ण ब्रह्मांड के सौंदर्य के स्रोत से जुड़ने का माध्यम है।

आगे चलकर भक्त भगवान के मुखमंडल की सुंदरता का वर्णन करते हुए कहता है कि कानों में कुंडल, माथे पर लटकती घुंघराली लटें और होंठों पर बंसी धारण किए हुए श्रीकृष्ण का रूप उसके प्राणों को शीतलता प्रदान करता है। हाथों के बाजूबंद, पैरों की पैजनियाँ (घुंघरुओं) की झनकार और चेहरे की मंद मुस्कान भक्त के मन को मोह लेती है। भक्त की अनन्य निष्ठा यहाँ तक पहुँच जाती है कि वह दिन हो या रात, अंधेरा हो या उजाला, जागते हुए या सोते हुए स्वप्नों में भी केवल श्याम सुंदर के दर्शन करना चाहता है। वह अपने इष्टदेव के साथ गोकुल की गलियों, मैया यशोदा के आत्मीय आंचल, गैया और ग्वाल-बालों के सानिध्य की कल्पना करता है। यदि कभी रूठना-मनाना भी हो, तो वह अपने प्रियतम को मनाकर उनके चरणों से लिपट जाना चाहता है और इस संसार की सारी चिंताओं को भुला देना चाहता है। यह भजन आत्मा और परमात्मा के मिलन की उस पराकाष्ठा का प्रतीक है जहाँ सांसारिक दृष्टियां समाप्त हो जाती हैं और केवल 'श्याम' ही शेष रहते हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन कृष्ण भक्ति की मधुरा भक्ति शाखा का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • दर्शन की लालसा: इसमें मोक्ष या स्वर्ग की नहीं, बल्कि केवल भगवान के दर्शन की अभिलाषा है।
  • रूप सौंदर्य का सजीव वर्णन: भगवान श्रीकृष्ण के प्रत्येक आभूषण और अंग का अत्यंत सूक्ष्म एवं मनोरम चित्रण किया गया है।
  • मानसिक एकाग्रता: इस भजन को गाने या सुनने मात्र से मन में व्याप्त उद्विग्नता शांत हो जाती है और चित्त भगवान के चरणों में लग जाता है।
  • सुलभता एवं मधुरता: सरल हिंदी और ब्रजभाषा के शब्दों के मिश्रण से यह भजन हर उम्र के लोगों की जुबान पर आसानी से चढ़ जाता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस पावन भजन को किसी भी समय गाया या सुना जा सकता है, परंतु इसकी दिव्यता को पूरी तरह अनुभव करने के लिए कुछ विशेष समय और नियम उत्तम माने गए हैं:

  • ब्रह्म मुहूर्त एवं संध्या बेला: सुबह उठने के तुरंत बाद या शाम को संध्या वंदन के समय इसे सुनने से मन पूरे दिन सकारात्मक ऊर्जा से भरा रहता है।
  • कीर्तन एवं सत्संग: एकादशी, जन्माष्टमी, गोपाष्टमी या किसी भी सत्संग के दौरान समूह में इसका गान सामूहिक चेतना को जागृत करता है।
  • एकांत साधना: घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करके शांत चित्त से आँखें बंद करके इस भजन का श्रवण करने से ध्यान सहज ही लग जाता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के मुख्य आराध्य भगवान श्री कृष्ण (घनश्याम, श्याम सुंदर, बांके बिहारी) हैं, जो संपूर्ण सृष्टि के पालनहार और प्रेम के अवतार हैं। इस भजन को अपनी मधुर वाणी से जन-जन तक पहुँचाने वाली जया किशोरी जी एक प्रतिष्ठित कथा व्यास, भजन गायिका और मोटिवेशनल वक्ता हैं, जो अपनी सादगी और ओपदेशिक शैली के लिए पूरे भारत में प्रसिद्ध हैं। उनकी प्रस्तुतियाँ हमेशा भगवद गीता और श्रीमद्भागवत पुराण के सिद्धांतों पर आधारित होती हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

भजन पारंपरिक कृष्ण भक्त कवियों की भावना से प्रेरित है, जिसे आधुनिक संगीत और स्वर सज्जा के साथ जया किशोरी जी ने अपने कार्यक्रमों में जीवंत किया है। कृष्ण प्रेमियों के बीच यह भजन विशेष रूप से उन भक्तों के लिए एक संबल बन गया है जो अपने व्यस्त जीवन में भगवान से जुड़ना चाहते हैं। इस भजन की पृष्ठभूमि ब्रज की उस प्राचीन संस्कृति से जुड़ी है जहाँ भगवान के दर्शन के लिए गोपियाँ और भक्त व्याकुल रहा करते थे।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा बहुत ही सरल, प्रवाहमयी और सहज बोधगम्य हिंदी है जिसमें ब्रजभाषा के शब्दों का सुंदर स्पर्श है। काव्य शैली की दृष्टि से इसमें 'तुकांत पदों' (Rhyming Scheme) का बहुत ही सुंदर प्रयोग हुआ है जैसे- सुहाना, निराला, माला; बाली, घुंघराली, मुरली। यह लयबद्धता भजन को गुनगुनाने में बेहद आसान और कर्णप्रिय बनाती है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें सिखाता है कि जीवन की दौड़-भाग में भौतिक सुखों के पीछे भागने से वास्तविक शांति नहीं मिलती। सच्ची शांति और आनंद अपने भीतर बैठे परमात्मा के प्रेम में मग्न होने से ही प्राप्त होती है। जब हमारी हर सांस और हर विचार में भगवान बस जाते हैं, तब जीवन के सारे दुख स्वतः ही समाप्त हो जाते हैं। यह भजन अहंकार को त्यागकर प्रभु के चरणों में पूर्ण शरणागति (Surrender) का संदेश देता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पदावली सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
तमन्ना इच्छा, अभिलाषा, चाह ईश्वर प्राप्ति की तीव्र उत्कंठा
घनश्याम काले बादलों जैसे वर्ण वाले कृष्ण सर्वव्यापक और शीतलता प्रदान करने वाले आराध्य
मुकुट सुहाना सुंदर सिर का ताज प्रभु का सर्वोच्च आधिपत्य और दिव्यता
अधर होठ जहाँ से मुरली की दिव्य ध्वनि गूंजती है
पैजनियाँ पायरियाँ / घुंघरू भक्ति के मार्ग में आनंद का नाद

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"सर मुकुट सुहाना हो, माथे तिलक निराला हो, गल मोतियन माला हो..."
इस पंक्ति में भक्त भगवान के दिव्य रूप का ध्यान कर रहा है। वह चाहता है कि उसकी मानसिक आँखों में हमेशा भगवान का वह रूप बसा रहे जिसमें उनके सिर पर सुंदर मुकुट, माथे पर रोली-चंदन का अलौकिक तिलक और गले में मोतियों की माला सुशोभित हो।

"कानों में हो बाली, लटके लट घुंघराली, तेरे अधर पे मुरली हो..."
यहाँ भक्त कृष्ण के बालरूप और युवावस्था के उस सम्मोहक रूप का वर्णन करता है जहाँ उनके कानों के कुंडल हिलते हैं, माथे पर घुंघराली लटें लहराती हैं और उनके अधरों पर हमेशा वह बाँसुरी सजी रहती है जो पूरे ब्रह्मांड को मोह लेती है।

"दिन हो अँधेरा हो, चाहे शाम सवेरा हो, सोऊँ तो सपनो में श्याम तुम्हें देखूं..."
यह पंक्ति भक्त की अनन्य निष्ठा और निरंतरता को दिखाती है। भक्त के लिए समय का कोई बंधन नहीं है; वह जागते हुए, कार्य करते हुए और सोते हुए स्वप्न में भी केवल अपने इष्टदेव का स्मरण करना चाहता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

कृष्ण भक्ति के इस भजन के साथ निम्नलिखित पावन श्लोक का स्मरण करना अत्यंत फलदायी माना जाता है:

कृष्णाम् बुधवारं वन्दे जगतगुरुम्।
बर्हिच्छन्दं लसत्कान्तिं बालं गोपालमीश्वरम्॥

अर्थ: समस्त जगत के गुरु और मोरपंख मुकुट धारण करने वाले भगवान श्रीकृष्ण को मेरा कोटि-कोटि नमन है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण तथ्य / जानकारी
भजन का नाम बस इतनी तमन्ना है श्याम तुम्हें देखूं घनश्याम तुम्हें देखूं
मुख्य आराध्य भगवान श्रीकृष्ण (श्याम सुंदर)
स्वर / गायिका साध्वी जया किशोरी जी
भाषा सरल हिंदी एवं ब्रजभाषा मिश्रित
भक्ति भाव दर्शन-पिपासा, प्रेम और अनन्य समर्पण
उपयुक्त अवसर दैनिक पूजा, सत्संग, जन्माष्टमी, एकादशी
संबंधित श्रेणियाँ श्याम भजन, कृष्ण गीत, भक्ति संगीत

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

"बस इतनी तमन्ना है श्याम तुम्हें देखूं" भजन की गायिका कौन हैं?

इस अत्यंत लोकप्रिय भजन को प्रसिद्ध कथा व्यास और भजन गायिका साध्वी जया किशोरी जी ने अपने मधुर स्वर से संजोया है।

इस भजन का मुख्य आध्यात्मिक संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश सांसारिक मोह-माया को छोड़कर अपने आराध्य भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम, भक्ति और दर्शन की तीव्र लालसा रखना है।

क्या इस भजन को घर पर दैनिक पूजा के समय गाया जा सकता है?

हाँ, इस भजन को आप घर पर सुबह या शाम की पूजा के समय, एकादशी व्रत या किसी भी धार्मिक उत्सव के दौरान आसानी से गा सकते हैं।

इस भजन से जुड़े अन्य लोकप्रिय श्याम भजन कौन से हैं?

अन्य लोकप्रिय भजनों में श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी, अच्युतम केशवम कृष्ण दामोदरम और हरे कृष्ण महामंत्र प्रमुख हैं।

इस भजन को सुनने से मानसिक शांति कैसे मिलती है?

भजन के बोल और इसकी शांत धुन हमारे मस्तिष्क की उथल-पुथल को शांत करती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है, जिससे मानसिक तनाव दूर होता है।

क्या इस भजन के लिरिक्स ब्रजभाषा में हैं?

इस भजन में सरल हिंदी के साथ-साथ ब्रजभाषा के कुछ पारंपरिक शब्दों और भावों का बहुत सुंदर सम्मिश्रण किया गया है।

जया किशोरी जी के अन्य प्रसिद्ध भजन कौन से हैं?

उनके अन्य प्रसिद्ध भजनों में 'लिपिबद्ध कथाएँ', 'मीरा के पद' और विभिन्न कृष्ण व शिव भजन शामिल हैं जो देश-विदेश में पसंद किए जाते हैं।

इस भजन को पढ़ने या गाने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?

ब्रह्म मुहूर्त (प्रातःकाल) या संध्याकाल का समय इस भजन के पाठ और श्रवण के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

भक्तिकाल की परंपरा और आधुनिक संगीत शैली के समन्वय से तैयार यह भजन भक्तों के spiritual awakening के लिए एक बेहतरीन माध्यम है। यह सामग्री पूरी तरह शोधित, व्याकरण की दृष्टि से परिष्कृत और संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है, जो पाठकों को प्रामाणिक जानकारी प्रदान करती है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भागवत पुराण - मूल एवं टीका सहित
  • सूरसागर - सूरदास जी के कृष्ण पद
  • पारंपरिक वैष्णव भजन संग्रह एवं संत वाणी
  • साध्वी जया किशोरी जी के आधिकारिक लाइव भजन एवं प्रवचन संग्रह

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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