हे प्रथमेश्वर गौरी नंदन सौ सौ बार करूँ तुझे वंदन (Hey Prathmeshwar Gauri Ke Nandan Lyrics in Hindi) -
ॐ गं गणपतये नमः
ॐ गं गणपतये नमः
ॐ गं गणपतये नमः
ॐ गं गणपतये नमः
हे प्रथमेश्वर गौरी नंदन
सौ सौ बार करूँ तुझे वंदन
तेरी पूजा करता जो पहले
भरता भंडारे शिव नंदन
हे प्रथमेश्वर गौरी नंदन
सौ सौ बार करूँ तुझे वंदन.....||
हर पूजा में सबसे पहले
तेरा जो वंदन करता देवा
उसके सिद्ध काज सब करके
बाधाएँ तू हरता देवा
ॐ गं गणपतये नमः
ॐ गं गणपतये नमः
ॐ गं गणपतये नमः
ॐ गं गणपतये नमः
भुवन पति है बुद्धि विधाता
सुमिरे तुमको शुभगुणकानन
हे प्रथमेश्वर गौरी नंदन
सौ सौ बार करूँ तुझे वंदन
तेरी पूजा करता जो पहले
भरता भंडारे शिव नंदन
हे प्रथमेश्वर गौरी नंदन
सौ सौ बार करूँ तुझे वंदन.....||
मात पिता का फेरा लगाया
तूने उन्हें ब्रह्माण्ड मान के
प्रसन्न हुए तब मात पिता उन्हें
अद्भुद बुद्धिमान जान के
ॐ गं गणपतये नमः
ॐ गं गणपतये नमः
ॐ गं गणपतये नमः
ॐ गं गणपतये नमः
माटी तेरा जो सानिध्य पाए
बन जाएँ प्रभु क्षण में चन्दन
हे प्रथमेश्वर गौरी नंदन
सौ सौ बार करूँ तुझे वंदन
तेरी पूजा करता जो पहले
भरता भंडारे शिव नंदन
हे प्रथमेश्वर गौरी नंदन
सौ सौ बार करूँ तुझे वंदन.....||
तेरी अर्चना जग में निराली
सिद्ध काज कर देने वाली
भक्तों को देकर तूने शुभ वर
क्षण में उनकी विघ्न है टाली
ॐ गं गणपतये नमः
ॐ गं गणपतये नमः
ॐ गं गणपतये नमः
ॐ गं गणपतये नमः
विघ्न हमारे भी सब हर लेना
विघ्न विनाशक मेरे भगवान्
हे प्रथमेश्वर गौरी नंदन
सौ सौ बार करूँ तुझे वंदन
तेरी पूजा करता जो पहले
भरता भंडारे शिव नंदन
हे प्रथमेश्वर गौरी नंदन
सौ सौ बार करूँ तुझे वंदन.....||
🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)
प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश जी का यह भजन "हे प्रथमेश्वर गौरी नंदन सौ सौ बार करूँ तुझे वंदन (Hey Prathmeshwar Gauri Ke Nandan Lyrics in Hindi) - Ganesh Bhajan Pamela Jain - Bhaktilok" सभी कार्यों के निर्विघ्न संपन्न होने की कामना से गाया जाता है। विघ्नहर्ता गणेश जी बुद्धि, ज्ञान और विवेक के अधिष्ठाता देव हैं। इस भजन के प्रत्येक शब्द में गणेश जी के गजमुख, विशाल उदर, और चूषक वाहन का सुंदर वर्णन है।
इस भजन की मूल भावना विघ्न विनाश और शुभ-लाभ की प्राप्ति की है। जीवन में जब भी कोई नया कार्य प्रारंभ करना हो, तो गणेश जी का स्मरण करना अनिवार्य माना गया है, क्योंकि वे ऋद्धि-सिद्धि के प्रदाता हैं।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)
गणेश पुराण के अनुसार, श्री गणेश जी की स्तुति और भजन सुनने से बुद्धि का विकास होता है, विद्या अर्जन में आने वाली बाधाएं समाप्त होती हैं और घर में शांति का वातावरण बनता है।
प्रथम पूज्य श्री गणेश जी के जन्म और उनकी कथाओं का संपूर्ण विवरण जानने के लिए ब्रह्म पुराण गणेश महिमा का पाठ करें। गणेश संकीर्तन से मानसिक अशांति दूर होती है, बुद्धि कुशाग्र होती है और किसी भी कार्य में आने वाली विघ्न-बाधाएं स्वतः ही दूर हो जाती हैं।
🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)
बुधवार और गणेश चतुर्थी के दिन गणेश जी के सम्मुख दूर्वा और मोदक अर्पित कर इस भजन का संकीर्तन करें। गायन के समय सिंदूर का तिलक लगाना शुभ होता है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
गणेश जी की पूजा में 'दूर्वा' (दूब घास) क्यों चढ़ाई जाती है?
दूर्वा शीतलता प्रदान करने वाली है। अनलासुर नामक दैत्य को निगलने के बाद गणेश जी के पेट में उत्पन्न जलन को शांत करने के लिए मुनियों ने उन्हें दूर्वा चढ़ाई थी। तब से गणेश जी को दूर्वा अत्यंत प्रिय है।
भगवान गणेश के भजन किस दिन विशेष रूप से गाने चाहिए?
बुधवार का दिन और हर माह आने वाली संकष्टी व विनायक चतुर्थी की तिथियां गणेश आराधना के लिए सर्वोत्तम हैं।
क्या प्रथम पूज्य गणेश जी का स्मरण हर पूजा से पहले जरूरी है?
हाँ, शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव से मिले वरदान के कारण किसी भी शुभ कार्य या देव पूजा की शुरुआत गणेश जी के पूजन व स्मरण से ही की जाती है।
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