"लक्ष्मी का वास हो जिस घर में" (Lakshmi Ka Vaas Ho Jis Ghar Mein) माता महालक्ष्मी को समर्पित एक अत्यंत मधुर, भावपूर्ण और लोकप्रिय भजन है। सुप्रसिद्ध भजन गायिका अंजलि जैन के सुमधुर स्वर से सजे इस भजन में गृहस्थ जीवन की सुख-समृद्धि, शांति और ऐश्वर्य की कामना की गई है। सनातन धर्म की परंपरा में माता लक्ष्मी को धन, धान्य, सौभाग्य और वैभव की अधिष्ठात्री देवी माना गया है। यह भजन केवल भौतिक धन की याचना नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन में मान-सम्मान, संतोष और आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति के लिए की गई एक पावन प्रार्थना है। विशेष रूप से शुक्रवार की पूजा, दीपावली के महापर्व और दैनिक संध्या आरती के समय इस भजन का श्रवण और कीर्तन भक्तों के घरों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और दरिद्रता का समूल नाश करता है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
लक्ष्मी का वास हो जिस घर में
लक्ष्मी का वास हो जिस घर में उस घर में रोज दिवाली है।
तुमसे ही इज्जत मान मिले हर आशाओं का फूल खिले,
झोली फैलाए जग सारा माता के सभी सवाली है।
लक्ष्मी का वास हो जिस घर में उस घर में रोज दिवाली है॥
खुशियाँ तुझसे तुम बिन गम है किरपा बिन ये आँखें नम है,
है चाँद सा मुखड़ा माँ तेरा जिसपे सूरज की लाली है।
लक्ष्मी का वास हो जिस घर में उस घर में रोज दिवाली है॥
तेरे चरण जहाँ जाते माता खुशियों से दामन भर जाता,
जिस जगह पे वास ना तेरा वो सब लगता खाली खाली है।
लक्ष्मी का वास हो जिस घर में उस घर में रोज दिवाली है॥
महिमा तेरी माँ न्यारी है शिवपुरी चरणों का पुजारी है,
जाते है दिन संवर उनके जिनपे नज़रे माँ डाली है।
लक्ष्मी का वास हो जिस घर में उस घर में रोज दिवाली है॥
विष्णु जी है जग के पालक मैया तू है धन संचालक,
निर्धन को तू धनवान करे हर बात तेरी माँ निराली है।
लक्ष्मी का वास हो जिस घर में उस घर में रोज दिवाली है॥
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
इस सुंदर भजन का मुख्य संदेश यह है कि जिस घर पर आदि-शक्ति महालक्ष्मी की असीम अनुकंपा होती है, वहाँ का वातावरण सदैव उत्सवमय रहता है। 'रोज दिवाली' होने का तात्पर्य केवल दीप जलाने से नहीं, बल्कि जीवन में अंधकार रूपी अज्ञान, दरिद्रता और कलह के समाप्त होने और सुख-शांति के प्रकाश के फैलने से है।
भक्त कहता है कि हे माता! इस संसार में मनुष्य को जो भी मान-सम्मान, प्रतिष्ठा और यश प्राप्त होता है, वह सब आपकी ही कृपा का फल है। आपकी दया से ही हमारे जीवन की समस्त आशाओं और अभिलाषाओं के पुष्प खिलते हैं। संपूर्ण सृष्टि आपके द्वार पर याचक बनकर खड़ी है क्योंकि आप ही आदि-शक्ति और सर्व-ऐश्वर्य प्रदायिनी हैं। माता का मुखमंडल चंद्रमा के समान शीतल और कांतिमय है, जिस पर सूर्य के समान तेजस्वी लालिमा सुशोभित है। यह दिव्य तेज भक्तों के जीवन के अंधकार को दूर करता है।
भजन में आगे कहा गया है कि माता के चरण कमल जहाँ भी पड़ते हैं, वहाँ खुशियों का साम्राज्य स्थापित हो जाता है। इसके विपरीत, जिस स्थान पर माता का वास नहीं होता, वह स्थान भौतिक रूप से कितना भी समृद्ध क्यों न हो, आंतरिक रूप से सर्वथा शून्य और खाली ही प्रतीत होता है। अंत में, भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के युगल स्वरूप की वंदना करते हुए कहा गया है कि भगवान विष्णु जहाँ संपूर्ण जगत का पालन करते हैं, वहीं माता लक्ष्मी इस सृष्टि की धन और ऐश्वर्य की अधिष्ठात्री हैं। वे अपनी कृपा से निर्धन को भी क्षण भर में समृद्ध बनाने की सामर्थ्य रखती हैं।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
यह भजन सनातन संस्कृति में गृहस्थ धर्म और भगवद-कृपा के सुंदर समन्वय को दर्शाता है। इसके प्रमुख आध्यात्मिक पहलू निम्नलिखित हैं:
- सकारात्मक ऊर्जा का संचार: इस भजन के शब्द और धुन घर के वातावरण से नकारात्मकता को दूर कर सकारात्मक और पवित्र ऊर्जा का संचार करते हैं।
- संतोष और कृतज्ञता का भाव: यह भजन साधक को सिखाता है कि जीवन में जो कुछ भी प्राप्त है, वह ईश्वर की कृपा का प्रसाद है, जिससे मन में संतोष का भाव जाग्रत होता है।
- लक्ष्मी-नारायण की युगल उपासना: भजन में भगवान विष्णु को 'जग के पालक' और माता लक्ष्मी को 'धन संचालक' कहकर दोनों के प्रति समान आदर और भक्ति प्रकट की गई है।
- सरलता और सुबोधता: इसके बोल इतने सरल हैं कि बच्चे से लेकर वृद्ध तक सभी इसे आसानी से गा सकते हैं और माता की भक्ति में लीन हो सकते हैं।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
यद्यपि ईश्वर की आराधना किसी भी समय की जा सकती है, परंतु शास्त्रों के अनुसार कुछ विशेष समय पर की गई साधना अधिक फलदायी होती है:
- शुभ समय: इस भजन को गाने या सुनने का सबसे उत्तम समय शुक्रवार का दिन, दीपावली का पर्व, धनतेरस और प्रतिदिन संध्याकाल की आरती का समय है।
- पूजा विधि:
- सर्वप्रथम स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र (विशेषकर लाल या पीले रंग के) धारण करें।
- घर के ईशान कोण या मंदिर में माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।
- प्रतिमा के समक्ष शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें और धूप-दीप दिखाएं।
- माता को लाल पुष्प, कुमकुम, अक्षत और नैवेद्य (खीर या सफेद मिठाई) अर्पित करें।
- पूर्ण श्रद्धा और शांत मन से इस भजन का गायन करें या इसे सुनें।
- भजन के उपरांत महालक्ष्मी मंत्र का जप करें और आरती के साथ पूजा संपन्न करें।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
यह भजन मुख्य रूप से माता महालक्ष्मी और जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित है। सनातन परंपरा में लक्ष्मी-नारायण की युगल जोड़ी को सृष्टि के पोषण का आधार माना गया है। माता लक्ष्मी जहाँ ऐश्वर्य, समृद्धि और सौभाग्य प्रदान करती हैं, वहीं भगवान विष्णु धर्म की रक्षा और जीवों का कल्याण करते हैं। इस भजन के अंतरे में 'शिवपुरी' का उल्लेख आता है, जो इसके रचयिता या मुख्य भक्त-कवि माने जाते हैं, जिन्होंने अपनी अनन्य भक्ति भावना को इन शब्दों में पिरोया है।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
इस भजन की रचना आधुनिक भक्ति संगीत के दौर में की गई है, जहाँ पारंपरिक भजनों के शास्त्रीय तत्वों को सरल और सुगम संगीत के साथ जोड़ा गया है। अंजलि जैन की मधुर आवाज ने इसे जन-जन तक पहुँचाया है। इसकी पृष्ठभूमि भारतीय परिवारों की उस सनातन आकांक्षा पर आधारित है, जहाँ हर घर को एक मंदिर बनाने और उसमें सुख-समृद्धि के स्थायी वास की कामना की जाती है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
यह भजन सरल और प्रवाहमयी हिंदी भाषा में लिखा गया है। इसमें खड़ी बोली के साथ-साथ लोक-भाषा के पुट का भी सुंदर समावेश है। काव्य शैली की दृष्टि से यह एक गेय पद (गीत) है, जिसमें अंतरा और मुखड़ा का संतुलन बहुत सटीक है। भजन में प्रयुक्त उपमाएँ जैसे "चाँद सा मुखड़ा" और "सूरज की लाली" माता के अलौकिक सौंदर्य को सजीव करती हैं। "खाली-खाली" और "दिवाली" जैसे तुकांत शब्दों का प्रयोग इसे अत्यंत कर्णप्रिय और याद रखने में आसान बनाता है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन केवल एक प्रार्थना नहीं है, बल्कि यह हमें जीवन जीने की कला और महत्वपूर्ण जीवन मूल्य भी सिखाता है:
- अहंकार का त्याग: "झोली फैलाए जग सारा" पंक्ति हमें याद दिलाती है कि ईश्वर के समक्ष हम सभी याचक हैं। अतः हमें अपने धन या वैभव पर कभी भी अहंकार नहीं करना चाहिए।
- कर्म और पुरुषार्थ: माता लक्ष्मी को "धन संचालक" कहा गया है, जो यह दर्शाता है कि धन का सही प्रबंधन और सदुपयोग ही जीवन को समृद्ध बनाता है।
- पारिवारिक सौहार्द: जिस घर में प्रेम, आदर और शांति होती है, वहीं लक्ष्मी का वास होता है। गृह कलह और अशांति वाले स्थानों से लक्ष्मी रूठ जाती हैं।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द/वाक्यांश | सरल अर्थ | आध्यात्मिक संदर्भ |
|---|---|---|
| वास | निवास / रहना | हृदय और घर में माता की दिव्य उपस्थिति। |
| सवाली | याचक / प्रार्थना करने वाला | ईश्वर के समक्ष अपनी इच्छाएं रखने वाला भक्त। |
| दामन | आँचल / झोली | भक्त का जीवन और उसका परिवार। |
| धन संचालक | धन और ऐश्वर्य का प्रबंधन करने वाली | माता लक्ष्मी की वह शक्ति जो सृष्टि में समृद्धि का वितरण करती है। |
| पालक | पोषण करने वाले | भगवान विष्णु जो संपूर्ण सृष्टि के जीवों का भरण-पोषण करते हैं। |
| लाली | तेज / आभा | माता के मुखमंडल का दिव्य और तेजस्वी प्रकाश। |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"लक्ष्मी का वास हो जिस घर में उस घर में रोज दिवाली है"
जिस घर में माता लक्ष्मी की कृपा और वास होता है, वहाँ प्रतिदिन उत्सव, हर्ष और उल्लास का वातावरण रहता है। दरिद्रता और अंधकार वहाँ टिक नहीं पाते।
"तुमसे ही इज्जत मान मिले हर आशाओं का फूल खिले"
हे माता! समाज में जो भी मान-सम्मान और प्रतिष्ठा प्राप्त होती है, वह आपकी ही कृपा है। आपकी अनुकंपा से ही मनुष्य की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
"झोली फैलाए जग सारा माता के सभी सवाली है"
इस संसार का प्रत्येक जीव आपकी शरण में है और अपनी झोली फैलाकर आपसे सुख-समृद्धि की याचना कर रहा है।
"खुशियाँ तुझसे तुम बिन गम है किरपा बिन ये आँखें नम है"
जीवन की समस्त खुशियाँ आपसे ही हैं। आपके बिना जीवन दुखों और कष्टों से भर जाता है और आपकी कृपा के बिना मनुष्य की आँखें आंसुओं से नम रहती हैं।
"है चाँद सा मुखड़ा माँ तेरा जिसपे सूरज की लाली है"
हे माँ! आपका मुखमंडल चंद्रमा के समान अत्यंत शीतल और सुंदर है, जिस पर सूर्य के समान तेजस्वी लालिमा और आभा सुशोभित है।
"तेरे चरण जहाँ जाते माता खुशियों से दामन भर जाता"
हे माता! आपके चरण कमल जिस भी स्थान या घर में पड़ते हैं, वहाँ का कोना-कोना खुशियों और समृद्धि से भर जाता है।
"जिस जगह पे वास ना तेरा वो सब लगता खाली खाली है"
जिस स्थान पर आपकी कृपा-दृष्टि नहीं होती, वह स्थान भौतिक रूप से कितना भी समृद्ध क्यों न हो, हमेशा सूना और अपूर्ण ही लगता है।
"महिमा तेरी माँ न्यारी है शिवपुरी चरणों का पुजारी है"
हे माँ! आपकी महिमा अत्यंत निराली और अपरंपार है। आपका भक्त 'शिवपुरी' आपके चरणों की सेवा में लीन रहता है।
"जाते है दिन संवर उनके जिनपे नज़रे माँ डाली है"
जिन भक्तों पर आपकी तनिक भी कृपा-दृष्टि पड़ जाती है, उनके सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और उनका जीवन संवर जाता है।
"विष्णु जी है जग के पालक मैया तू है धन संचालक"
भगवान विष्णु संपूर्ण जगत का पालन-पोषण करते हैं और हे मैया! आप इस सृष्टि के समस्त धन, ऐश्वर्य और वैभव का संचालन करती हैं।
"निर्धन को तू धनवान करे हर बात तेरी माँ निराली है"
आप अपनी असीम अनुकंपा से अत्यंत निर्धन व्यक्ति को भी समृद्ध और ऐश्वर्यशाली बना देती हैं। आपकी हर लीला और बात अत्यंत अद्भुत और निराली है।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
माता लक्ष्मी की प्रसन्नता के लिए भजन के साथ-साथ निम्नलिखित मंत्रों का जप भी अत्यंत फलदायी माना जाता है:
1. महालक्ष्मी मूल मंत्र:
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