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Katha Maa Chandraghanta Ki

तीसरा नवरात्री - माँ चंद्रघंटा की कथा भजन इन हिंदी लिरिक्स

64 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
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माँ चंद्रघंटा की कथा भजन इन हिंदी लिरिक्स 

हम चंद्रघंटा मैया की
तुमको कथा सुनाते है 
पावन कथा सुनाता हूँ हूँ 
शक्ति स्वरुप चंद्रघंटा 
की महिमा गाते है 
हम कथा सुनाते है 
नवरातो की तीसरे 
दिन का सार बताते है 
पावन कथा सुनाता हूँ हूँ 
शक्ति स्वरुप चंद्रघंटा 
की महिमा गाते है 
हम कथा सुनाते है 
सब सुनो लगा के ध्यान 
चंद्रघंटा का गुणगान 
ये कथा है बड़ी महान कष्टों का करे निदान.....||

चंद्रघंटा की कथा 
सुनाऊ सुनो लगा के ध्यान 
धन वैभव सुख देने 
वाली माँ की है पहचान 
तीजे  दिन है नवरातों 
का चंद्रघंटा के नाम 
पूजा करके माँ के रूप 
का बन जाए सब काम 
रूप सलोना सुन्दर 
माँ का छवि बड़ी प्यारी 
महक रही है माँ के 
नाम से जग की फुलवारी 
चाँद के जैसे मुखड़ा 
चमके रूप चंद्र बदनी
जय हो तुम्हारी चंद्रघंटा 
माँ जय हो जग जननी 
दया करो सुखदेव पे 
माता शीश झुकाते है 
हम चंद्रघंटा मैया 
की पावन गाथा गाते है
हम कथा सुनाते है 
सब सुनो लगा के ध्यान 
चंद्रघंटा का गुणगान 
ये कथा है बड़ी महान कष्टों का करे निदान.....||

शोभित है माँ के हाथो 
में गदा धनुष तलवार 
उठा के त्रिशूल कर रही है 
दुष्टो का संहार 
अर्ध चंद्र घंटे का 
माँ के शीश पे है आकार
भक्तो की हित के खातिर
 माँ रहती है तैयार 
पूजा कर के आरती 
गाके माँ को रिझाते है 
दूध बने व्यंजन से 
माँ को भोग लगाते है 
चरणों में अर्पित करते है 
पुष्प चमेली का 
रूप निहारे भक्त 
ये सारे अम्बे देवी का 
ध्यान लगा के सुनो 
कथा हम आगे बढ़ाते है 
मै कथा सुनाता हूँ
शक्ति स्वरुप चंद्रघंटा 
की महिमा गाते है 
मै कथा सुनाते गए 
सब सुनो लगा के ध्यान 
चंद्रघंटा का गुणगान 
ये कथा है बड़ी महान कष्टों का करे निदान.....||

स्वर्ग लोक में जब असुरो 
का बढ़ने लगा आतंक 
सारे थे आतंकित 
उनसे ऋषि मुनि और संत 
महिषासुर के आगे चले 
ना देवताओं का जोर 
इंद्र देव भी उसके आगे 
पड़ जाते कमजोर 
त्राहि त्राहि मच गई थी स्वर्ग
में मची थी भागम भाग 
भाग रहे थी जान बचा के 
राज पाट सब त्याग  
संकट में थे प्राण देवो 
के सूझे नहीं उपाए 
किसी तरह से महिषासुर 
से छुटकारा मिल जाए 
फिर क्या करते है सब 
मिल कर के वही बताते है 
शक्ति स्वरूपा चंद्रघंटा 
की महिमा गाते है 
हम कथा सुनाते है 
सब सुनो लगा के ध्यान
 चंद्रघंटा का गुणगान 
ये कथा है बड़ी महान कष्टों का करे निदान.....||

सभी देवता मिलकर
 के ब्रह्मा के पास गए 
ब्रह्मा जी ही मदद 
करेंगे ले कर आस गए 
ब्रह्मा विष्णु महेश 
तीनो क्रोध में आते है 
महिषाषुर का त्रास 
देवता जब बतलाते है 
महिषासुर से स्वर्ग लोक 
में जीना हुआ मुहाल 
कोई उपाए बताओ 
भगवन हमें तुरंत तत्काल 
ब्रह्मा विष्णु महेश के मुख 
से ऊर्जा हुयी उत्पन्न 
स्वर्ग धारा पाताल में 
सारे होने लगी कम्पन 
ऊर्जा से उत्पन्न हुयी 
माँ हम सत्य बताते है 
शक्ति स्वरूपा चंद्रघंटा 
की महिमा गाते है 
हम कथा सुनाते है 
सब सुनो लगा के ध्यान 
चंद्रघंटा का गुणगान 
ये कथा है बड़ी महान कष्टों का करे निदान.....||

शंकर त्रिशूल दिया 
विष्णु ने चक्क्र दिया 
देवतराज धन्य सूर्य 
ने अपना तेज दिया 
सूर्य देव ने तेज और 
तलवार दिया उनको 
देवो ने भी शाश्त्रो का 
उपहार दिया उनको 
नाम कारन फिर सभी 
ने मिल करके उनका 
सबने बोला जय हो 
तुम्हारी जय हो चंद्र घंटा 
ब्रह्म बोले हमने तुमको 
दिव्य शक्तियां दी 
काहे शक्ति इन शक्ति 
को तोड़ नहीं शक्ति 
चली है माँ आकाश 
मार्ग से कहाँ बताते है 
शक्ति स्वरूपा चंद्रघंटा 
की महिमा गाते है 
हम कथा सुनाते है 
सब सुनो लगा के ध्यान 
चंद्रघंटा का गुणगान 
ये कथा है बड़ी महान कष्टों का करे निदान.....||

पवन वेग से चली 
भवानी करती हुयी अट्ठास
क्रोध उगलती पहुंच गई 
माँ महिषासुर के पास 
नेत्र लाल विकराल बन 
गई असुरो की वो काल 
सारे ही ब्रह्माण्ड में 
जैसे मच गया था भूचाल
एक तरफ से असुर 
लड़ रहे एक तरफ माता 
माँ के आगे कोई असुर 
भी ठहर नहीं पाता 
घमासान मच गया 
स्वर्ग में युद्ध हुआ भारी 
काट रही है असुरो को 
माता मार के किलकारी 
महिषासुर का अंत करिश्मा 
अब बतलाते है 
शक्ति स्वरूपा चंद्रघंटा 
की महिमा गाते है 
हम कथा सुनाते है 
सब सुनो लगा के ध्यान 
चंद्रघंटा का गुणगान 
ये कथा है बड़ी महान कष्टों का करे निदान.....||

हुए देव भय मुक्त कर 
रहे माँ की जय जयकार 
फिर से इंद्र देव को 
स्वर्ग लोक का मिल 
गया था उपहार 
तब से ही माँ चंद्रघंटा 
को पूज रहा संसार 
असुर विनाशक की जय 
बोलो मिल के शास्त्रों बार 
नवरातों का दिन है 
तीसरा माँ चंद्रघंटा का 
जग जननी जग कल्याणी 
माता जगदम्बा का 
श्रद्धा भाव से जो भी 
माँ का वंदन करता है 
धन वैभव धन धान्य से 
उसका आंगन भरता है 
कर के नमन वंदन हम 
माँ को शीश नवाते गए 
शक्ति स्वरूपा चंद्रघंटा 
की महिमा गाते है 
हम कथा सुनाते है 
सब सुनो लगा के ध्यान 
चंद्रघंटा का गुणगान 
ये कथा है बड़ी महान कष्टों का करे निदान.....!!

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यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 10 Aug 2026

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(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
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