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मन चल वृन्दावन चलिए लिरिक्स (man chal vrindavan chaliye Lyrics in Hindi) - Shyam Bhajan - Bhaktilok

2,365 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मन चल वृन्दावन चलिए (Man Chal Vrindavan Chaliye Lyrics) - श्याम भजन परिचय

भक्ति और प्रेम की पावन भूमि श्रीधाम वृन्दावन के दर्शन हेतु आकुल एक भक्त के हृदय की सચ્ची पुकार है 'मन चल वृन्दावन चलिए'। यह प्रसिद्ध श्याम भजन और युगल सरकार की महिमा का गुणगान करने वाला संकीर्तन भक्तों को भौतिक संसार की भागदौड़ से निकालकर सीधे बांके बिहारी और सांवरिया शाह के श्रीचरणों में ले जाता है। वृन्दावन केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं है, बल्कि यह वह आध्यात्मिक चेतना है जहां सांसारिक चिंताओं, राग-द्वेष, निंदा-चुगली और द्वैत भाव का कोई स्थान नहीं है। यहाँ केवल प्रेम का अनंत दरिया बहता है जहाँ गोप-ग्वाल और मस्त मलंग हर पल राधा-कृष्ण की मस्ती में झूमते रहते हैं। जब मन भौतिक मोह-माया से ऊब जाता है और उसे सच्ची शांति की तलाश होती है, तब यह भजन एक मार्गदर्शक के रूप में कार्य करता है। इस भजन का गायन विशेषकर श्री बांके बिहारी मंदिर के दर्शन, श्री कृष्ण जन्माष्टमी, राधाष्टमी, होली महोत्सव, एवं किसी भी सत्संग और एकादशी के पावन अवसरों पर अत्यंत श्रद्धा के साथ किया जाता है। इसके श्रवण मात्र से ही हृदय में एक असीम आनंद और 'राधे-राधे' के संकीर्तन की गूंज जागृत हो जाती है, जो साधक को गोलोक धाम जैसी अलौकिक अनुभूति कराती है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन - शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

मन चल वृन्दावन चलिए
जित्थे रहंदे सांवल शाह
जित्थे रहंदे ने बेपरवाह ॥

जित्थे यमुना पई ठाठा मारदी
मन तू वी जाके गोता ला ॥

जित्थे रिश्ते ना नाते ना अपने
जित्थे ना कोई धूप है ना छा है
जित्थे ना कोई बहन भरा ॥

जित्थे निन्देया ना चुगली ना उस्तत्ति
जित्थे प्रेम दा वगे दरेआ ॥

जित्थे गोपी ग्वाल पाए झुमदे
मेरे मन नू वी चडिया चा ॥

जित्थे मस्त मलंग पए झुमदे
तू वी राधे राधे गा ॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस पावन भजन की प्रत्येक पंक्ति में गहन आध्यात्मिक अर्थ और वैराग्य से युक्त भक्ति का भाव छिपा हुआ है। रचनाकार अपने मन को संबोधित करते हुए कहता है कि हे मन! तू इस नश्वर संसार के प्रपंच को छोड़कर उस पावन वृन्दावन धाम की ओर प्रस्थान कर, जहाँ हमारे सांवरिया शाह यानी श्री कृष्ण निवास करते हैं। वे सांवरिया शाह अपनी मस्ती में मस्त रहते हैं, जिन्हें संसार के दिखावे और स्वार्थ की परवाह नहीं है - वे तो केवल सच्चे प्रेम के भूखे हैं।

आगे भजनकार यमुना नदी का वर्णन करते हुए कहता है कि जिस वृन्दावन में पवित्र यमुना जी अपनी तरंगों के साथ ठाठे मार रही हैं, हे मन! तू भी वहाँ जाकर उस भक्ति के जल में गोता लगा और अपने सारे पाप धो ले। इस संसार में जो रिश्ते-नाते, अपने-पराए, धूप-छांव और भाई-बहन के मोह हैं, वे सब स्वार्थी हैं; वृन्दावन की दिव्य भूमि इन सांसारिक बंधनों से परे है। उस धाम में न तो किसी की निंदा है, न चुगली और न ही झूठी प्रशंसा (उस्तति) है; वहाँ तो केवल शुद्ध प्रेम का विशाल दरिया बहता है।

भजन के अंतिम चरणों में भक्त का उत्साह और अधिक बढ़ जाता है। वह देखता है कि वृन्दावन में गोपी-ग्वाल और सभी संत-महात्मा, मस्त मलंग होकर आनंद में झूम रहे हैं। यह दृश्य देखकर मेरे मन में भी उनके साथ झूमने और बांके बिहारी के दर्शन करने की तीव्र लालसा जाग उठी है। इसलिए हे मन! तू भी सब कुछ भूलकर बस 'राधे-राधे' का जाप कर, क्योंकि यही इस जीवन का एकमात्र परम सत्य और सुख है। इसी प्रकार के अन्य सुमधुर भजनों के लिए आप हमारे श्याम भजन संग्रह और होली भजन सूची का अवलोकन कर सकते हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • आध्यात्मिक उन्मुक्तता: यह भजन साधक को भौतिक संसार की संकीर्णताओं और मानसिक चिंताओं से मुक्त कराकर उच्च कोटि की आध्यात्मिक चेतना से जोड़ता है।
  • प्रेम भक्ति की प्रधानता: इसमें ज्ञान और योग से ऊपर उठकर केवल शुद्ध प्रेम (प्रेम भक्ति) और संकीर्तन को ही मोक्ष का मार्ग बताया गया है।
  • श्री कृष्ण और श्री राधा रानी की कृपा: भजन का केंद्र बिंदु सांवरिया शाह (श्री कृष्ण) और 'राधे-राधे' का महामंत्र है, जो कलयुग में तरने का सबसे सुगम साधन माना गया है।
  • मानसिक शांति का स्रोत: तनावपूर्ण आधुनिक जीवनशैली में इस भजन का श्रवण या गायन मन को असीम शांति, शीतलता और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भक्ति संगीत को अपने भीतर उतारने के लिए सही समय और उचित भाव का होना अत्यंत आवश्यक है। इस भजन को गाने या सुनने के लिए निम्नलिखित नियमों का पालन किया जा सकता है:

  • सर्वोत्तम समय: प्रातःकाल ब्रह्म बेला में (सूरज निकलने से पहले) या संध्याकाल में जब घर का वातावरण शांत हो, तब इस भजन का स्मरण करना मानसिक एकाग्रता बढ़ाता है।
  • स्थान: पूजा घर में श्री बांके बिहारी, लड्डू गोपाल या राधा-कृष्ण के विग्रह के समक्ष दीपक प्रज्वलित करके इसका पाठ करना श्रेष्ठ रहता है।
  • संकीर्तन और सत्संग: एकादशी, जन्माष्टमी, राधाष्टमी, या किसी भी धार्मिक सत्संग के दौरान सामूहिक रूप से 'राधे-राधे' गाते हुए इस भजन का गायन करने से पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के मुख्य आराध्य भगवान श्री कृष्ण (सांवरिया शाह) और जगतजननी श्री राधा रानी हैं। वृन्दावन वह भूमि है जहाँ द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण ने अपनी बाल लीलाओं, रासलीला और दिव्य प्रेम के माध्यम से पूरी मानवता को प्रेम और समर्पण का संदेश दिया था। इसके अतिरिक्त, चैतन्य महाप्रभु, मीराबाई, सूरदास और हरिदास जी जैसे महान संतों ने इसी वृन्दावन धाम को अपनी साधना स्थली बनाया और सम्पूर्ण विश्व को युगल सरकार की भक्ति से परिचित कराया। भगवान श्री कृष्ण के बाल स्वरूप की मनमोहक झांकी के दर्शन के लिए आप नियमित रूप से श्री शनि देव आरती या अन्य पावन स्तोत्रों की तरह इस भजन का भी नित्य स्मरण कर सकते हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

'मन चल वृन्दावन चलिए' भजन उत्तर भारत की लोक और संत परंपरा से उपजा एक अत्यंत लोकप्रिय भाव-गीत है। इसकी रचना किसी एक विशेष रचनाकार की सीमा में न बंधकर संत-वाणी और लोक-संकीर्तन की मौखिक परंपरा से परिष्कृत हुई है। पंजाबी और ब्रज भाषा के मधुर सम्मिश्रण से बने इस भजन ने पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के संकीर्तन मंडलों में विशेष स्थान बनाया है। जब खड़तालों और मृदंग की थाप पर 'जित्थे रहंदे सांवल शाह' की पंक्तियां गूंजती हैं, तो हर श्रद्धालु का रोम-रोम भक्ति रस से सिहर उठता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा लोक-सुलभ पंजाबी मिश्रित हिंदी (ब्रज-पंजाबी संकीर्तन शैली) है, जो सीधे हृदय को स्पर्श करती है। इसमें रूपक अलंकार और संगीतात्मक लय का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। 'यमुना पई ठाठा मारदी' और 'प्रेम दा वगे दरेआ' जैसी पंक्तियाँ दृश्य बिम्ब (Visual Imagery) का निर्माण करती हैं, जिससे श्रोता की आँखों के सामने सीधे वृन्दावन के घाटों और गलियों का सजीव चित्र उभर कर आ जाता है। भाषा की सरलता ही इसकी सबसे बड़ी ताकत है, जिसे अनपढ़ से लेकर उच्च शिक्षित व्यक्ति भी आसानी से समझ और गा सकता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

  • मोह-माया का त्याग: संसार के झूठे रिश्ते-नातों और स्वार्थ से ऊपर उठकर अपने वास्तविक स्वरूप और ईश्वर की ओर मुड़ने की प्रेरणा।
  • निंदा और चुगली से मुक्ति: उस स्थान पर जाने की बात जहाँ ईर्ष्या, द्वेष, निंदा और चुगली का कोई अस्तित्व नहीं है, जो कि एक सच्चे साधक का मुख्य गुण होना चाहिए।
  • निरंतर स्मरण (नाम जप): जीवन में कितनी भी कठिनाइयां क्यों न हों, 'राधे-राधे' का जाप करते हुए हर परिस्थिति में मस्त रहने का संदेश।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
सांवल शाह सांवले स्वरूप वाले भगवान श्री कृष्ण समस्त आकर्षणों के केंद्र और भक्तों के प्रियतम
बेपरवाह जो सांसारिक बंधनों और चिंताओं से मुक्त हैं परमात्मा की स्वतंत्र और आनंदमयी स्थिति
ठाठा मारदी उमड़ती हुई लहरें मारना भक्ति और प्रेम के ज्वार का प्रतीक
निन्देया ना उस्तत्ति न किसी की बुराई और न झूठी प्रशंसा द्वैत भाव से रहित शुद्ध आध्यात्मिक चेतना
मस्त मलंग अपनी ही धुन में मगन रहने वाले भक्त ईश्वर के प्रेम में सुधि-बुधि खो चुके साधक

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

मन चल वृन्दावन चलिए, जित्थे रहंदे सांवल शाह...
भक्त अपने मन को समझा रहा है कि हे मन! अब इस संसार की असारता को छोड़कर उस पवित्र वृन्दावन धाम में चलो, जहाँ हमारे आराध्य सांवले सुंदर भगवान श्री कृष्ण निवास करते हैं।

जित्थे यमुना पई ठाठा मारदी, मन तू वी जाके गोता ला...
जहाँ यमुना जी का पवित्र जल अपनी तरंगों से उमड़ रहा है, हे मेरे मन! तू भी वहाँ जाकर उस प्रेम और भक्ति के पावन जल में डुबकी लगा ले, जिससे तेरी आत्मा पवित्र हो जाए।

जित्थे रिश्ते ना नाते ना अपने, जित्थे ना कोई धूप है ना छा है...
उस धाम में सांसारिक खून के रिश्ते, मतलब के नाते, और सुख-दुःख रूपी धूप-छांव का कोई बंधन नहीं है; वहाँ सब कुछ निष्काम और दिव्य है।

जित्थे निन्देया ना चुगली ना उस्तत्ति, जित्थे प्रेम दा वगे दरेआ...
वृन्दावन की पावन भूमि पर न कोई किसी की निंदा करता है, न चुगली और न ही झूठी प्रशंसा की भूखा होता है; वहाँ तो केवल प्रेम का अनंत और पावन दरिया बहता है।

जित्थे गोपी ग्वाल पाए झुमदे, मेरे मन नू वी चडिया चा...
जहाँ ब्रज के गोपी-ग्वाल भगवान की महिमा में प्रेम से झूम रहे हैं, यह अद्भुत दृश्य देखकर मेरे मन में भी उनके साथ झूमने की तीव्र उमंग और चाव जाग उठा है।

जित्थे मस्त मलंग पए झुमदे, तू वी राधे राधे गा...
जहाँ संत और भक्त अपनी सुधि-बुधि खोकर मस्ती में झूम रहे हैं, हे मन! तू भी सब चिंता छोड़कर बस निरंतर 'राधे-राधे' का गान कर।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के भाव को पुष्ट करने के लिए निम्नलिखित पावन महामंत्र का स्मरण अत्यंत फलदायी माना गया है:

"श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारे, हे नाथ नारायण वासुदेवाय"

"राधे राधे राधे, श्यामा राधे राधे राधे"

इन मंत्रों के निरंतर जप से मन में वृन्दावन जैसी पवित्र ऊर्जा और शांति का अनुभव होता है। नियमित पूजा के दौरान आप अन्य पावन स्तोत्रों जैसे देवी आरती या श्री गणेश वंदना के साथ भी इसका स्मरण कर सकते हैं।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम मन चल वृन्दावन चलिए (Man Chal Vrindavan Chaliye)
आराध्य देवता भगवान श्री कृष्ण (सांवरिया शाह) एवं श्री राधा रानी
रचना परंपरा लोक एवं संत संकीर्तन परंपरा
भाषा पंजाबी मिश्रित हिंदी / ब्रज भाव
मुख्य विषय वृन्दावन धाम की महिमा, प्रेम भक्ति और नाम संकीर्तन
प्रमुख भाव वैराग्य, आनंद, समर्पण और विरह-मिलन का उल्लास
उपयुक्त अवसर सत्संग, श्री कृष्ण जन्माष्टमी, होली, एकादशी एवं दैनिक साधना

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन का मुख्य संदेश सांसारिक मोह-माया, ईर्ष्या, निंदा और स्वार्थी रिश्तों को छोड़कर भगवान श्री कृष्ण के पावन धाम वृन्दावन में शुद्ध प्रेम और नाम संकीर्तन की शरण में जाना है।

भजन में 'सांवल शाह' जगत के पालनहार, सांवले सलोने भगवान श्री कृष्ण (बांके बिहारी) को कहा गया है जो अपने भक्तों पर अहैतुकी कृपा बरसाते हैं।

हाँ, इस भजन को आप अपने घर के पूजा स्थल पर अकेले या अपने परिवार के साथ पूरी तन्मयता और भक्ति भाव से गा सकते हैं। यह मन को शांत करने का बहुत सुंदर माध्यम है।

वृन्दावन को भगवान श्री कृष्ण की लीला भूमि माना जाता है। यहाँ की धूल और यमुना का जल साधक के मन से सारे विकारों को दूर कर उसे भगवान के चरणों में प्रेम भक्ति प्रदान करता है।

यह भजन लोक-सुलभ पंजाबी और ब्रज मिश्रित हिंदी में है, जो सुनने में अत्यंत मधुर और समझने में बेहद सरल है।

इसे श्री कृष्ण जन्माष्टमी, राधाष्टमी, होली महोत्सव, साप्ताहिक सत्संग, एकादशी व्रत और दैनिक संध्या वंदन के समय गाना सबसे उत्तम माना गया है।

श्री राधा रानी का नाम स्मरण करने मात्र से भगवान श्री कृष्ण अतिशीघ्र प्रसन्न होते हैं। यह कलयुग में मन को शुद्ध करने और अहंकार को मिटाने का सबसे सरल मंत्र है।

भक्तलोक (Bhaktilok) वेबसाइट के विभिन्न भजन श्रेणियों में आपको श्याम भजन, बांके बिहारी संकीर्तन और राधा रानी से जुड़े अनेकों पावन भजन और उनके लिरिक्स मिल जाएंगे।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख हमारे विद्वान आचार्यों और भक्ति साहित्य के जानकारों द्वारा सनातन परंपरा, संत वाणी और लोक-संकीर्तन के ग्रंथों का अध्ययन करके संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसका उद्देश्य पाठकों को शुद्ध लिरिक्स, प्रामाणिक अर्थ और उच्च कोटि की आध्यात्मिक जानकारी प्रदान करना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • सनातन धर्म के पारंपरिक भजन संकलन एवं संत वाणी साहित्य।
  • श्री ब्रज चौरासी कोस यात्रा एवं वृन्दावन धाम की महिमा से जुड़े ग्रंथ।
  • लोक-संकीर्तन एवं क्षेत्रीय भक्ति संगीत परंपरा।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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