Krishna Bhajan

साईं वे साढी फरियाद तेरे ताहि लिरिक्स (Sai Ve Sandhi Fariyad Tere Taahi Lyrics in Hindi) - Aardas Puneet Khurana Sai Bhajan - Bhaktilok

518 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

सम्पूर्ण मूल पाठ एवं पवित्र श्लोक

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

 

कोई अली आखे कोई वली आखे 
कोई कहे दाता सचे मालिका नु ।
मेनू समज न आवे की नाम देवा 
एस गोल चकी दिया चालका नु ॥

रूह दा असल मालिक ओही 
मानिये जी जिदा नाम लईए ता सरुर होवे ।
अखा खुलिया नू महबूब 
दिस्से अखा बंद होवण ता हुजुर होवे ॥

कोई सौन वेले कोई नहान 
वेले कोई गौण वेले तैनू याद करदा ।
एक नजर तू मेहर दी मार 
साईं सरताज वी खड़ा फरयाद करदा ॥
टुटेजा संधू वी खड़ा फ़रेयाद करदा ॥

साईं वे साढी फरियाद तेरे ताहि 
साईं वे बह्हो फ़ढ़ बेड़ा बन्ने लाई ।
साईं वे मेरेआं  गुनाहा नु लुकाई  
साईं वे हाजरा हजूर वे तू आई ॥

साईं वे फेरा मस्कीना वाल पाई  
साईं वे बोल काक सारा दे पुगई ।
साईं वे हक विच फैसले सुनाई  
साईं वे हौली - हौली खामिया घटाई ।
साईं वे मेनू मेरे अन्द्रो मुकाई 
साईं जे डीगिये ता फर के उठाई ।
साईं वे देखि ना भरोसे आजमाई 
साईं वे औखे -सौखे रहा चो काढायीं ।
ओ साईं कला नु वी होर चमकाई 
वे सूरा  नु बिठा दे थो - थाई ।

साईं वे ताल विच तुरना सिखाई  
साईं वे साज रूस गए ता मनाई ।
साईं वे ऐहना नाल आवाज़ वे रालायी  
साईं वे अखरा दा मेल तू  कराइ ।
साईं वे कन्नी किसे गीत दी फडाई 
साईं वे शब्दा दा साथ वी निभाई ।
साईं वे नगमे नू फड़ के जगाई  
साईं वे शायरी च असर वखायीं ।
साईं वे ज़ज्बे दी वाले नु वडाई  
साईं वे गुट-गुट सब नु पेआयीं ।
साईं वे इश्कुए दा नशा वी चाडायीं 
साईं वे सैर तू ख्यालां नू कराई ।
साईं वे  तारेआं दे देश ली के जावीं  
साईं वे फुफिया दे वांगरा नचाई ।

साईं वे असी सज बैठे चाईं-चाईं  
साईं वे थोड़ी बौती अदा वी सिखाई ।
साईं वे मेरे  नाल- नाल  तू वे गायीं ।
साईं वे साईं  लाज सरताज दी बचाई 
साईं वे भुलेये नू  ऊँगली फराई ।
साईं वे अग्गे हो के राह रोषनयी 
साईं वे नेहरा विच पल्ले ना छुडायीं ।
साईं वे जिंदगी दे भोज नु चुकाई  
साईं वे फिखारा नु हवा च उढाई ।
साईं वे सारे लगे दाग वी धोअई  
साईं वे सिले-सिले नैना नु सुखाई ।

साईं वे दिला दे गुलाब महकाई 
साईं वे बस पट्टी  प्यार दी पढ़ाईं ।
साईं वे पाक साफ़ रहा नु मलाई  
साईं वे बच्चेआ दे वंगु समझाईं ।
साईं वे माड़े कामो घूर के हटाई  
साईं वे खोटेया नु खरे च मिलाई ।
साईं वे लोहे नाल पारस कसाई 
साईं वे मेहेंता दे मूल वे पवाई ।

ओ साईं वे मारेया दी मंदी न विखाई 
साईं वे देखि हून देर न लगाई ।
साईं वे दारां ते खरे हा खैर पाई 
साईं वे महरा वाले मीह वि वरसाई ।
साईं वे अकला दे घड़े नु पराई  
साईं वे घुम्बद गरूर दे गिराई ।
साईं वे आग वंगु  हौसले  पखाई  
साईं वे अम्बरा तोह सोच  मंगवाई ।
साईं वे अपे वाज़ मार के बुलाई  
साईं वे हुन सानु  कोल वे बिठाई ।
साईं वे अपने ही रंग च रंगाई  
साईं वे मैं हर वेहले करां साईं साईं ।

साईं वे तोते वांगु बोल वी रटाई  
साईं वे आत्मा दा दीवा वी जगाई ।
साईं वे अनहद नाद तू वजाई  
साईं वे रूहानी कोई तार छेड़ जाईं ।
साईं वे सच्ची(honest) सरताज वी बनाई ।
साईं वे सच्ची टुटेजा वी बनाई साईं साईं साईं ॥

संतों और ऋषियों के आध्यात्मिक इतिहास की गहरी समझ के लिए संत एवं ऋषि ज्ञानकोश अवश्य पढ़ें।

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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

शिरडी के साईं बाबा को समर्पित यह भजन "साईं वे साढी फरियाद तेरे ताहि लिरिक्स (Sai Ve Sandhi Fariyad Tere Taahi Lyrics in Hindi) - Aardas Puneet Khurana Sai Bhajan - Bhaktilok" सबका मालिक एक होने के सिद्धांत को प्रतिपादित करता है। साईं बाबा का जीवन काल सादगी, प्रेम, सहिष्णुता और मानवता का संदेश देता है। इस भजन की सरल पंक्तियां भक्त को सीधे बाबा के दिव्य आशीर्वाद और करुणा से जोड़ती हैं।

भजन का मुख्य भाव श्रद्धा और सबूरी (धैर्य) का है। साईं बाबा अपने भक्तों को वचन देते हैं कि जो भी उनके द्वार पर आएगा, वह कभी खाली हाथ नहीं जाएगा। बाबा की उदी (भस्म) और उनके वचनों का स्मरण ही इस भजन का सार है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

साईं बाबा के भजनों के संकीर्तन से भक्तों के मन में धर्म-जाति के भेद से ऊपर उठकर प्राणी मात्र के प्रति प्रेम की भावना जागृत होती है। बाबा की पूजा में सादगी और शुद्ध अंतःकरण का विशेष महत्त्व है।

संतों और ऋषियों के आध्यात्मिक इतिहास की गहरी समझ के लिए संत एवं ऋषि ज्ञानकोश अवश्य पढ़ें। साईं बाबा के भजन से पारिवारिक शांति प्राप्त होती है, मन के द्वेष और कलह दूर होते हैं और साधक में संतोष तथा धैर्य का विकास होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

साईं बाबा की आराधना के लिए गुरुवार का दिन विशेष रूप से फलदायी है। साईं बाबा की मूर्ति या चित्र के सम्मुख दीप जलाकर, उदी का तिलक लगाएं और श्रद्धापूर्वक भजन गाएं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

शिरडी साईं बाबा की उपासना के दो मुख्य स्तंभ क्या हैं?

बाबा ने अपने भक्तों को 'श्रद्धा' (विश्वास) और 'सबूरी' (धैर्य) को जीवन का मूल आधार बनाने की शिक्षा दी थी।

साईं भजनों के संकीर्तन के लिए कौन सा दिन उत्तम है?

गुरुवार (गुरु दिवस) का दिन साईं बाबा के पूजन, व्रत और भजन संकीर्तन के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।

साईं बाबा की 'उदी' का क्या महत्त्व है?

उदी बाबा की धूनी की पवित्र भस्म है। भक्तों का अटूट विश्वास है कि उदी धारण करने से शारीरिक बीमारियां और मानसिक कष्ट दूर होते हैं।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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