108 Ramayan Choupai

रामायण आवाहन दोहे लिरिक्स (Ramayan Awahan Dohe Lyrics in Hindi) - Shri RAm Bhajan Ram Vanvas Pt Prem Shakar Pandey - Bhaktilok

1,718 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

सम्पूर्ण मूल पाठ एवं पवित्र श्लोक

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

नमो नमो राम प्रभु श्रीमान, नमो नमो राम सुजान। सकल विश्व के स्वामी हो तुम, नमो नमो राम भगवान।। वन वास को तुम गए रघुनाथ, सीता जी साथ लक्ष्मण साथ। चौदह बरस की कठिन तपाई, धर्म पथ पर चले भाई।। दशरथ नृप की आज्ञा पाई, माता कैकेई की सुनाई। बन में रहकर भी न बिसराए, प्रजा पर प्रेम सदा बरसाए।। रावण बड़ो बलवान विकारी, सीता हरण की कथा भारी। लंका जाकर सेतु बनवाए, रावण का अंत कराए।। रामचन्द्र की भक्ति अपारी, मन में बसे हरि प्रिय भारी। चौदह वर्ष पूरे हुए प्रभु, अयोध्या को लौटे भगवान अभय।। त्रेता युग में अवतार हारे, सत्य धर्म का झंडा सारे। नमो नमो राम प्रभु श्रीमान, नमो नमो राम भगवान।।
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह 'रामायण आवाहन दोहे' भगवान श्रीराम के प्रति परम समर्पण और आह्वान का एक अद्भुत भजन है। इस गीत का मुख्य विषय त्रेता युग में भगवान राम के चौदह वर्ष के वनवास काल को केंद्रित करता है। 'नमो नमो राम प्रभु श्रीमान' की पुनरावृत्ति भक्त के हृदय में अपार श्रद्धा और विश्वास जागृत करती है। पंडित प्रेम शंकर पांडेय द्वारा रचित यह भजन राम के पिता दशरथ की आज्ञा पालन, माता कैकेई के वचन पूरण, और सीता तथा लक्ष्मण के साथ वन गमन की महागाथा को प्रस्तुत करता है। 'धर्म पथ पर चले भाई' पंक्ति में राम के नैतिक आचरण और सर्वधर्म संरक्षक स्वरूप का दर्शन होता है। भजन में रावण वध, सेतु निर्माण और अयोध्या वापसी की घटनाएं प्रस्तुत की गई हैं, जो भक्त को राम के दिव्य कृत्यों का स्मरण कराती हैं।

इस भजन का भावार्थ श्रीराम के व्यक्तित्व में निहित सर्वोच्च आदर्शों को व्यक्त करता है। वनवास की पीड़ा सहते हुए भी राम की प्रजा के प्रति अटूट प्रेम और दायित्वबोध 'प्रजा पर प्रेम सदा बरसाए' में प्रतिफलित होता है। पंडित प्रेम शंकर पांडेय का संगीत भक्त के मन में एक गहरी भावनात्मक अनुरणन उत्पन्न करता है। 'चौदह बरस की कठिन तपाई' केवल समय की गणना नहीं, बल्कि भक्त के आत्मसंशोधन की यात्रा का प्रतीक है। सीता हरण और उसके अनुसार उनके पुनर्प्राप्ति की कथा धर्म की विजय और अधर्म के विनाश का संदेश देती है। इस भजन के माध्यम से श्रोता अपने भीतर के रावणी प्रवृत्तियों का दमन करने और राम के आदर्श मार्ग पर चलने की प्ररेणा पाता है।

तत्त्वदर्शी दृष्टिकोण से यह भजन अद्वैत वेदांत और भक्ति दर्शन का समन्वय प्रस्तुत करता है। श्रीराम को 'सकल विश्व के स्वामी' कहकर उन्हें परब्रह्म के रूप में स्थापित किया गया है, जो निर्गुण-सगुण के भेद को पार करता है। रामायण आवाहन के माध्यम से भक्त राम के सर्वत्र व्याप्त चेतना को अनुभव करते हैं। वनवास को धर्माचरण की कसौटी के रूप में देखा गया है जहाँ राम ने स्वयं को परीक्षित किया। भक्ति मार्ग की दृष्टि से यह गीत शरणागति और समर्पण का उपदेश देता है। 'त्रेता युग में अवतार हारे' में भगवान के अवतारवाद सिद्धांत का प्रतिपादन है, जो हिंदू दर्शन का मूल आधार है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

रामायण आवाहन दोहे का महत्त्व हिंदू सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा में अत्यंत गहरा है। महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित आदि रामायण और तुलसीदास द्वारा प्रणीत रामचरितमानस में वर्णित राम की गाथा सनातन संस्कृति का आधारस्तंभ है। चौदह वर्ष का वनवास राजनीति, नीति-शास्त्र और धर्मशास्त्र के क्षेत्र में उदाहरण स्थापित करता है। ब्रह्मांड पुराण और वायु पुराण में राम के अवतार का विस्तृत वर्णन मिलता है। सेतु निर्माण की कथा शिल्प और वास्तु ज्ञान का प्रतीक है। यह भजन भक्तों को त्रेता युग के आदर्श नायक से जोड़ता है और कलिकाल में राम नाम की शक्ति को स्मरण कराता है।

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। इस भजन का नियमित चिंतन और गायन मानसिक शांति, आंतरिक शक्ति और आत्मविश्वास में वृद्धि करता है। राम नाम का स्मरण हृदय में प्रेम, करुणा और न्याय की भावना जागृत करता है। भजन के पवित्र सुर और शब्द मन को विकारों से मुक्त करते हैं। धार्मिक जीवन में दृढ़ता आती है और भक्ति पथ सुगम हो जाता है। आध्यात्मिक प्रगति में तीव्रता आती है तथा मानसिक संताप में कमी आती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

प्रातःकाल सूर्योदय के समय शुद्ध वस्त्र पहनकर, पूर्व की ओर मुख करके, आसन पर बैठकर इस भजन का गायन करें। घी का दीप जलाएं और राम की मूर्ति या यंत्र के समक्ष फूल, फल और जल से अभिषेक करें। गहरी श्रद्धा और भक्ति भाव से प्रतिदिन कम से कम तीन बार इस भजन को दोहराएं। ध्यान मुद्रा में बैठें, मन को राम के चरणों में लगाएं और भजन के अर्थ पर विचार करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

रामायण आवाहन दोहे का भजन कब और किसने रचा?

यह भजन पंडित प्रेम शंकर पांडेय द्वारा रचा गया है। यह राम के चौदह वर्षीय वनवास काल और उनके जीवन के महत्त्वपूर्ण प्रसंगों को व्यक्त करता है। भक्तिलोक प्लेटफॉर्म पर इसका प्रचार किया गया है।

इस भजन में वनवास का क्या महत्त्व है?

वनवास राम की धर्मनिष्ठा, पिता की आज्ञा पालन, और आदर्श राजा के गुणों का प्रतीक है। चौदह वर्षीय वनवास में राम ने धर्म, न्याय और नैतिकता की रक्षा की। यह मानव जीवन में संघर्ष, त्याग और नैतिक मूल्यों के महत्त्व को दर्शाता है।

क्या इस भजन का दैनिक चिंतन मंगलकारी है?

हाँ, इस भजन का प्रतिदिन गायन और चिंतन अत्यंत लाभकारी है। यह मन को शुद्ध करता है, आत्मबल बढ़ाता है, और भक्ति में अग्रगति करता है। राम नाम की महिमा कलियुग में विशेषकर प्रभावी है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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