"आज बालाजी का कीर्तन हमारे अंगना" एक अत्यंत लोकप्रिय और भक्तिपूर्ण संकीर्तन भजन है, जो भगवान श्री हनुमान जी (बालाजी) के प्रति भक्तों के अगाध प्रेम और समर्पण को दर्शाता है। इस भजन में एक ऐसे दिव्य वातावरण की कल्पना की गई है, जहाँ स्वयं प्रभु बालाजी अपने भक्तों के आँगन में पधारते हैं और उनके साथ समस्त देवी-देवता भी सम्मिलित होते हैं। यह भजन न केवल बालाजी की महिमा का गुणगान करता है, बल्कि यह भी संदेश देता है कि जहाँ सच्चे हृदय से संकीर्तन होता है, वहाँ साक्षात ईश्वर का वास होता है। रेखा गर्ग जी द्वारा स्वरबद्ध यह भजन सत्संग, कीर्तन और मांगलिक अवसरों पर गाया जाने वाला एक प्रमुख भक्ति गीत है, जो मन को शांति और भक्ति के रस से सराबोर कर देता है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
आज बालाजी का कीर्तन हमारे अंगना,
हमारे अंगना, हमारे अंगना।
सुन कीर्तन को गणपति आये,
गणपति आये संग रिद्धि-सिद्धि लाये,
आज लंगर बटेगा हमारे अंगना,
आज बालाजी का कीर्तन हमारे अंगना॥
सुन कीर्तन को ब्रह्माजी आये,
ब्रह्माजी आये संग में सरस्वती को लाये,
आज वेद पढ़ेंगे हमारे अंगना,
आज बालाजी का कीर्तन हमारे अंगना॥
सुन कीर्तन को विष्णुजी आये,
विष्णुजी आये संग में लक्ष्मीजी को लाये,
आज धन बरसेगा हमारे अंगना,
आज बालाजी का कीर्तन हमारे अंगना॥
सुन कीर्तन को भोलेजी आये,
भोलेजी आये संग में पार्वती को लाये,
आज डमरू बजेगा हमारे अंगना,
आज बालाजी का कीर्तन हमारे अंगना॥
सुन कीर्तन को कान्हाजी आये,
कान्हाजी आये संग में राधाजी को लाये,
आज मुरली बजेगी हमारे अंगना,
आज बालाजी का कीर्तन हमारे अंगना॥
सुन कीर्तन को भगत भी आये,
भगत भी आये संग में ढोलक-चिमटा लाये,
आज रंग बरसेगा हमारे अंगना,
आज बालाजी का कीर्तन हमारे अंगना॥
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
इस भजन का भावार्थ अत्यंत गहरा है। भक्त कहता है कि आज हमारे घर में बालाजी का कीर्तन हो रहा है, जो किसी उत्सव से कम नहीं है। जब हम श्रद्धापूर्वक ईश्वर का आह्वान करते हैं, तो वे अकेले नहीं आते, बल्कि अपनी पूरी दिव्य शक्ति के साथ आते हैं।
भजन की प्रत्येक पंक्ति में एक देवता का आगमन दिखाया गया है। गणपति के आने से रिद्धि-सिद्धि का आगमन होता है, जो विघ्न विनाशक हैं। ब्रह्माजी और सरस्वती के आने से ज्ञान और वेदों का पाठ होता है। विष्णु और लक्ष्मी के आने से सुख-समृद्धि और धन की वर्षा होती है। भोलेनाथ और पार्वती के आने से भक्ति का डमरू बजता है, और कान्हा-राधा के आने से प्रेम की मुरली गूंजती है। अंत में, भक्तों का समूह ढोलक और चिमटा लेकर आता है, जो कीर्तन की पूर्णता का प्रतीक है। यह भजन हमें सिखाता है कि कीर्तन केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि दिव्य शक्तियों को अपने हृदय और घर में आमंत्रित करने का माध्यम है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
- दिव्य आमंत्रण: यह भजन ईश्वर को अपने घर और हृदय में बुलाने का एक सरल और प्रभावी माध्यम है।
- सामूहिक भक्ति: इसमें सभी प्रमुख देवी-देवताओं का आह्वान किया गया है, जो एकता और सर्वशक्तिमान ईश्वर के प्रति समर्पण को दर्शाता है।
- सकारात्मक ऊर्जा: इस भजन को सुनने या गाने से घर का वातावरण शुद्ध और सकारात्मक होता है।
- सांस्कृतिक महत्व: यह भारतीय कीर्तन परंपरा का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहाँ संगीत और भक्ति का मिलन होता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस भजन को किसी भी मांगलिक अवसर, जैसे कि हनुमान जयंती, मंगलवार के दिन, या घर में आयोजित होने वाले सत्संग में गाया जा सकता है। इसे ढोलक, मंजीरा और चिमटे के साथ गाने से विशेष आनंद की अनुभूति होती है। कीर्तन शुरू करने से पहले दीप प्रज्वलित करें और बालाजी का ध्यान करें।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| अंगना | आँगन या घर का मुख्य स्थान |
| रिद्धि-सिद्धि | गणेश जी की पत्नियाँ, जो सफलता और समृद्धि की प्रतीक हैं |
| लंगर | भक्तों के लिए प्रसाद का वितरण |
| कीर्तन | ईश्वर का गुणगान करना |
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | आज बालाजी का कीर्तन हमारे अंगना |
|---|---|
| प्रमुख देवता | श्री हनुमान जी (बालाजी) |
| गायिका | रेखा गर्ग |
| भाषा | हिंदी |
| भाव | भक्ति, उत्सव, समर्पण |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।
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