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हे काली माई तोरी आरती उतार लेउ माँ लिरिक्स (He Kali Mayi Tori Aarti Utar Leu Maa Lyrics in Hindi) - Shahnaaz Akhtar Kali Mata Aarti - Bhaktilok

439 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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माता काली, जो आदि शक्ति का उग्र और कल्याणकारी स्वरूप हैं, उनकी भक्ति में लीन होकर भक्त जब 'हे काली माई तोरी आरती उतार लेउ माँ' जैसे भजनों का गायन करते हैं, तो वातावरण में एक अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है। शाहनाज़ अख्तर द्वारा स्वरबद्ध यह भजन माँ काली के प्रति अनन्य प्रेम, समर्पण और श्रद्धा की पराकाष्ठा है। सनातन धर्म में माँ काली को काल और समय की अधिष्ठात्री माना गया है, जो अपने भक्तों के दुखों का नाश कर उन्हें अभय प्रदान करती हैं। यह भजन न केवल एक स्तुति है, बल्कि भक्त की उस व्याकुलता को भी दर्शाता है, जो अपनी आराध्या को प्रसन्न करने के लिए धूप, दीप, पुष्प और भावपूर्ण कीर्तन का सहारा लेता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

हे काली माई तोरी आरती उतार लेउ माँ
आरती उतार लेउ माँ, मात मोरी आरती उतार लेउ माँ
हे काली माई तोरी आरती उतार लेउ माँ ||

धुप और कपूर जलाऊ तोहे माता
पान और फूल चड़ाउ तोहे माता
चरण पखार लेउ माँ, मात मोरी आरती उतार लेउ माँ
हे काली माई तोरी आरती उतार लेउ माँ ||

झांझ मजीरा से जस तोरे गाऊ
निश दिन मैया तोरी आरती गाऊ
पार लगाए देऊ माँ, मात मोरी आरती उतार लेउ माँ
हे काली माई तोरी आरती उतार लेउ माँ ||

चुन चुन बगिया से फूलवा मँगाउ
फुलवा मांगउ माई हार बनाऊ माँ
हार पहनाये देऊ माँ, मात मोरी आरती उतार लेउ माँ
हे काली माई तोरी आरती उतार लेउ माँ ||

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन में भक्त माँ काली के प्रति अपनी सेवा भावना को व्यक्त कर रहा है। भक्त कहता है कि हे माँ काली! मैं आपकी आरती उतारना चाहता हूँ, अर्थात मैं अपने अंतःकरण में आपकी ज्योति प्रज्वलित करना चाहता हूँ। 'धूप और कपूर' का अर्पण करना भक्त की सात्विक पूजा का प्रतीक है, जो मन की शुद्धि को दर्शाता है। 'चरण पखारना' माँ के प्रति पूर्ण शरणागति का भाव है।

भजन के अगले चरण में भक्त 'झांझ-मजीरा' के साथ जस (यश) गाने की बात करता है, जो यह दर्शाता है कि भक्ति केवल मौन प्रार्थना नहीं, बल्कि उत्सव और आनंद का विषय भी है। 'पार लगाए देऊ माँ' का अर्थ है कि संसार रूपी भवसागर से माँ ही अपने भक्त को सुरक्षित बाहर निकाल सकती हैं। अंत में, 'फूलों का हार' बनाना माँ के प्रति भक्त के प्रेम और श्रम का प्रतीक है, जो यह संदेश देता है कि भक्ति में समर्पण ही सबसे बड़ा उपहार है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • भक्ति का भाव: यह भजन 'दास्य' और 'वात्सल्य' भाव का मिश्रण है।
  • साधना का मार्ग: इसमें पूजा की सामग्री (धूप, दीप, पुष्प) का उल्लेख है, जो बाह्य पूजा से आंतरिक पूजा की ओर ले जाता है।
  • शक्ति उपासना: माँ काली की उपासना से साधक को निर्भयता और आत्मबल की प्राप्ति होती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को विशेष रूप से मंगलवार, शनिवार या अमावस्या की रात्रि को माँ काली की पूजा के समय गाना अत्यंत फलदायी माना जाता है। इसे गाते समय मन में माँ काली के सौम्य और रौद्र दोनों रूपों का ध्यान करना चाहिए। दीपक जलाकर, धूप अर्पित कर और पूर्ण एकाग्रता के साथ इस भजन का कीर्तन करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन छत्तीसगढ़ी और हिंदी के मिश्रित लोक-शैली में रचित है। इसकी भाषा सरल, सुबोध और हृदय को छू लेने वाली है। इसमें 'अनुप्रास' और 'पुनरुक्ति' अलंकारों का सुंदर प्रयोग हुआ है, जो इसे गेय (गाने योग्य) बनाता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन सिखाता है कि ईश्वर की प्राप्ति के लिए बड़े अनुष्ठानों की आवश्यकता नहीं है, बल्कि एक सच्चे और समर्पित हृदय की आवश्यकता है। जैसे भक्त कहता है 'चुन चुन बगिया से फूलवा मँगाउ', वैसे ही हमें अपने जीवन के अच्छे कर्मों को चुनकर माँ के चरणों में अर्पित करना चाहिए।

शब्द सरल अर्थ संदर्भ
आरती प्रकाश से पूजा समर्पण का प्रतीक
चरण पखारना पैर धोना सेवा भाव
निश दिन रात-दिन निरंतर भक्ति
भवसागर संसार दुखों का सागर

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नामहे काली माई तोरी आरती उतार लेउ माँ
आराध्यमाँ काली
गायकशाहनाज़ अख्तर
भाषाहिंदी/लोक भाषा
भावसमर्पण एवं भक्ति
उपयुक्त अवसरअमावस्या, नवरात्रि, मंगलवार/शनिवार

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

माँ काली की आरती संध्या काल या रात्रि के समय करना सबसे उत्तम माना जाता है।

हाँ, घर पर माँ काली की सौम्य प्रतिमा या चित्र की पूजा पूर्ण श्रद्धा और सात्विक विधि से की जा सकती है।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

यह सामग्री पारंपरिक लोक भजनों, भक्ति साहित्य और सनातन धर्म की पूजा पद्धतियों पर आधारित है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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