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जयदेव जयदेव जय मंगलमूर्ति दर्शन मात्रे मन कामना पूर्ती लिरिक्स (Jai dev jai dev jai mangal murti Lyrics in Hindi) - Shri Siddhivinayak Aarti Jaya Kishori - Bhaktilok

1,162 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

जय मंगलमूर्ति: श्री गणेश भक्तिगीत

संकट से मुक्ति और सुख की प्राप्ति का आश्वासन देने वाला यह भजन भक्तों के मन को श्रद्धा एवं भक्ति से भर देता है।

जयदेव जयदेव जय मंगलमूर्ति दर्शन मात्रे मन कामना पूर्ती लिरिक्स (Jai dev jai dev jai mangal murti Lyrics in Hindi) -सुख करता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाचीनूर्वी पूर्वी प्रेम कृपा जयाचीसर्वांगी सुन्दर उटी शेंदु राचीकंठी झलके माल मुकताफळांचीजय देव जय देव जय मंगल मूर्तिदर्शनमात्रे मनःकामना पूर्तिजय देव जय देव....||रत्नखचित फरा तुझ गौरीकुमराचंदनाची उटी कुमकुम केशराहीरे जडित मुकुट शोभतो बरारुन्झुनती नूपुरे चरनी घागरियाजय देव जय देव जय मंगल मूर्तिदर्शनमात्रे मनःकामना पूर्तिजय देव जय देव....||लम्बोदर पीताम्बर फनिवर वंदनासरल सोंड वक्रतुंडा त्रिनयनादास रामाचा वाट पाहे सदनासंकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे सुरवर वंदनाजय देव जय देव जय मंगल मूर्तिदर्शनमात्रे मनःकामना पूर्तिजय देव जय देव....||शेंदुर लाल चढायो अच्छा गजमुख कोदोन्दिल लाल बिराजे सूत गौरिहर कोहाथ लिए गुड लड्डू साई सुरवर कोमहिमा कहे ना जाय लागत हूँ पद कोजय जय जय जयजय जय जी गणराज विद्यासुखदाताधन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मत रमताजय देव जय देव....||अष्ट सिधि दासी संकट को बैरीविघन विनाशन मंगल मूरत अधिकारीकोटि सूरज प्रकाश ऐसे छबी तेरीगंडस्थल मद्मस्तक झूल शशि बहरीजय जय जय जय जयजय जय जी गणराज विद्यासुखदाताधन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मत रमता||जय देव जय देव....||
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय भगवान गणेश की महिमा और उनकी कृपा है। 'जयदेव जयदेव' से आरंभ होते हुए, यह भजन भक्तों की मनोकामनाओं के पूर्ण होने का आश्वासन देता है। 'सुख करता दुखहर्ता' के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि भगवान गणेश भक्तों के सभी दुखों को समाप्त करते हैं और सुख का संचार करते हैं। 'मंगल मूर्ति' शब्द से उनके शुभ और मंगलकारी स्वरूप का बोध होता है, जिससे भक्त त्रातक प्रभावित होते हैं। भगवान की वक्रतुंड, लम्बोदर तथा पीतांबरवाले स्वरूप का उल्लेख कर, यह भजन उनके शक्तिशाली और दयालु स्वरूप की महिमा का गुणगान करता है।

भावार्थ में, यह भजन भक्ति के एक गूढ़ संवाद का प्रतीक है। 'वार्ता विघ्नाचीनूर्वी पूर्वी' कहकर यह दर्शाता है कि भक्त भगवान की कृपा से विघ्नों और बाधाओं से मुक्त होते हैं। 'रत्नखचित फरा तुझ गौरीकुमार' के अनुसार, भगवान गणेश की सुंदरता और आभा का वर्णन कर, यह भक्तों को प्रेरित करता है कि उन्हें सच्चे मन से अपनी इच्छाओं को प्रस्तुत करना चाहिए। भजन की प्रगति में भावुकता का संचार होता है, जो हर भक्त के हृदय में एक अद्भुत प्रकाश लाता है।

इस भजन में भक्ति मार्ग की गहराई को दर्शाते हुए, भक्तों को यह सिखाया जाता है कि सच्ची भक्ति और समर्पण से सभी संकटों से पार पाया जा सकता है। 'अष्ट सिद्धि दासी संकट को बैरी' यह दर्शाता है कि भगवान गणेश अपने भक्तों को असीम सिद्धियाँ प्रदान करते हैं और हर प्रकार की विपत्तियों से रक्षा करते हैं। इस प्रकार यह भजन निस्वार्थ भक्ति का प्रतीक है, जो भक्ति मार्ग पर चलते हुए भक्तों को मानसिक और आत्मिक संतोष प्रदान करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन भारतीय पौराणिक कथाओं में भगवान गणेश का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान दर्शाता है। पुराणों में गणेश को समस्त विघ्नों का नाशक और समृद्धि का दाता माना गया है। गणेश पूजा का उल्लास मुख्यतः गणेश चतुर्थी के अवसर पर मनाया जाता है, जब उनकी मूर्तियों की स्थापना की जाती है। यही कारण है कि भक्त इस भजन का गान करके उन्हें अपने जीवन की सभी कठिनाइयों से उभारने की प्रार्थना करते हैं। भीमकाय रस्सी से बांधे गए दानवों का उपमा देते हुए, गणेश के प्रति श्रद्धा का यह भजन उनके प्रति अटूट विश्वास का प्रतीक है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। यह भजन मानसिक शांति और संतोष प्रदान करता है। नियमित रूप से इसे गाने से भक्तों का आत्म-विश्वास बढ़ता है और उन्हें जीवन में आने वाली बाधाओं को पार करने की प्रेरणा मिलती है। यह भजन भगवान गणेश की कृपा से संपूर्णता, सुख, और समृद्धि की प्राप्ति में सहायक होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का गुणगान सुबह और शाम दोनों समय किया जा सकता है। सच्ची भक्ति के साथ, भक्त को एक स्वच्छ स्थान पर बैठकर एक दीया जलाना चाहिए और भगवान गणेश के फूल और लड्डू का भोग चढ़ाना चाहिए। मन शांत एवं ध्यानात्मक होना चाहिए, जिससे भजन की गूंज भक्ति में पूरी तरह समर्पित हो सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

जयदेव जयदेव भजन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इस भजन का मुख्य उद्देश्य भगवान गणेश की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करना है, जिससे भक्त सभी विघ्नों से मुक्त हो सके और अपने जीवन में सुख-संपत्ति हासिल कर सके।

भगवान गणेश की कौन-कौन सी विशेषताएँ इस भजन में वर्णित हैं?

इस भजन में भगवान गणेश को 'लम्बोदर', 'वक्रतुंड' और 'पीताम्बर' के रूप में दर्शाया गया है, जिससे उनकी शक्तियों और कृपा का बोध होता है।

क्या इस भजन का गान विशेष अवसर पर किया जाने चाहिए?

इस भजन का गान किसी भी समय किया जा सकता है, लेकिन विशेष रूप से गणेश चतुर्थी जैसे पवित्र अवसरों पर इसका अधिक महत्व है, जिससे गणेश की कृपा विशेष रूप से प्राप्त होती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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