shanidev bhajan

जय जय शनिदेव भक्तन हितकारी लिरिक्स (Jai Jai Shree Shanidev Bhaktan Hitkaari Lyrics in Hindi) - Shani Bhajan Shanichar - Bhaktilok

86 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

जय जय शनिदेव भक्तन हितकारी लिरिक्स (Jai Jai Shree Shanidev Bhaktan Hitkaari Lyrics in Hindi)

प्रस्तुति: भक्तलोक संपादकीय टीम | श्रेणी: शani Bhajan / Shanichar Stuti | अद्यतन: 2026

सनातन धर्म और ज्योतिषीय परंपराओं में न्याय के देवता, सूर्यपुत्र भगवान श्री शनिदेव को कर्मफलदाता, दंडनायक और भक्तों के संरक्षक के रूप में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया गया है। "जय जय शनिदेव भक्तन हितकारी" (Jai Jai Shree Shanidev Bhaktan Hitkaari) अत्यंत प्रसिद्ध, कर्णप्रिय और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण पावन भजन है। इस भजन का प्रत्येक शब्द साधक के अंतर्मन में शनि महाराज के प्रति अनन्य श्रद्धा, समर्पण और भयमुक्त भक्ति का भाव जागृत करता है। लोक मान्यता के अनुसार, शनिवार के पावन दिन, शनि प्रदोष व्रत या शनि जयंती के अवसर पर इस दिव्य भजन का संकीर्तन करने से जातक की कुंडली से शनि की महादशा, साढ़ेसाती और ढैया के दुष्प्रभावों का शमन होता है तथा जीवन में अनुशासन, संयम एवं परम शांति का संचार होता है। भक्तलोक के इस विस्तृत scholarly guide में हम इस भजन के संपूर्ण बोल, शब्दार्थ, भावार्थ, और इसके आध्यात्मिक महत्व का गहन अध्ययन करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

॥ जय जय शनिदेव भक्तन हितकारी ॥

जय जय शनिदेव भक्तन हितकारी,
सूर्य पुत्र जग जन सुखकारी।
श्याम वर्ण अति सुंदर साजे,
गल मोतियन की माल विराजे॥

चांद नयन औ चतुर्भुज धारी,
रथ पर सवार खड्ग त्रिशूलधारी।
न्यायधीश जग के तुम कहलाओ,
कर्मानुसार फल सबको पहुँचाओ॥

जो जन शरण तुम्हारी आवे,
वह भवसागर से तर जावे।
शनि-प्रदोष व्रत जो जन धारे,
उसके संकट सभी टारे॥

पीपल तरु पूजन जो करई,
ताकि विपदा दूर हरई।
तैल दीप जो शाम जलावे,
सो मनवांछित फल पावे॥

कष्ट निवारक हे जगपाला,
हरहु हमारे दुख की ज्वाला।
चरण कमल में शीश झुकाऊं,
निशिदिन महिमा तेरी गाऊं॥

॥ बोलो श्री शनिदेव महाराज की जय ॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

"जय जय शनिदेव भक्तन हितकारी" भजन का मूल भाव न्याय के देवता शनिदेव के कल्याणकारी और दयालु स्वरूप का स्मरण करना है। सामान्य जनमानस में शनिदेव को केवल 'क्रूर' या 'दंड देने वाले' देवता के रूप में देखा जाता है, परंतु यह भजन उनके उस परम स्वरूप को उजागर करता है जहाँ वे अपने सच्चे भक्तों के हितकारी और रक्षक हैं।

भजन की शुरुआत में उनके रूप-शृंगार का वर्णन है—उनका श्याम वर्ण (काला रंग), गले में मोतियों की माला, और सूर्य पुत्र होने का गौरव उनके विराट स्वरूप को दर्शाता है। वे ब्रह्मांड के सर्वशक्तिमान न्यायधीश हैं जो किसी के साथ पक्षपात नहीं करते, बल्कि प्रत्येक जीव को उसके कर्मों के अनुसार ही फल प्रदान करते हैं। जो मनुष्य अहंकार का त्याग कर भगवान शनिदेव की शरण में आता है, उसके सभी कष्ट और भवसागर के बंधन कट जाते हैं। पीपल के वृक्ष की पूजा, शनिवार के दिन तैल (तेल) का दीपक प्रज्वलित करना और सच्चे मन से उनके चरणों में ध्यान लगाना साधक के जीवन के समस्त अंधकार को दूर कर देता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन सनातन धर्म की कर्म प्रधान विचारधारा का जीवंत प्रतीक है। गीता में भी कहा गया है कि कर्म करना मनुष्य के हाथ में है और उसका फल न्यायसंगत रूप से मिलना प्रकृति का नियम है। शनिदेव इसी प्राकृतिक विधान के संचालनकर्ता हैं।

  • कर्म का अनुशासन: यह भजन हमें यह सिखाता है कि हमें सदैव सत्कर्म करने चाहिए, क्योंकि शनिदेव की दृष्टि से कुछ भी छिपा नहीं है।
  • भय मुक्ति: भजन का निरंतर श्रवण और गायन मन से शनि का भय समाप्त कर भक्ति और श्रद्धा का संचार करता है।
  • मानसिक शांति: साढ़ेसाती और ढैया के पीड़ित जातकों के लिए यह भजन मानसिक संबल और आत्मबल प्रदान करता है।
  • समान रूप से उपयोगी अन्य स्तोत्रों और प्रार्थनाओं के लिए आप श्री शनि देव आरती का भी पाठ कर सकते हैं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

किसी भी धार्मिक भजन या स्तुति की पूर्ण सिद्धि उसके विधि-विधान और नियमपूर्वक स्मरण से ही प्राप्त होती है। शनिदेव के इस भजन को गाने और सुनने के लिए निम्नलिखित नियमों का पालन करना श्रेयस्कर माना गया है:

  • शुभ दिन: शनिवार का दिन शनिदेव की उपासना के लिएसर्वोत्तम माना गया है। इसके अलावा शनि प्रदोष, अमावस्या और ज्येष्ठ मास के शनिवार को इसका विशेष महत्व है।
  • समय: संध्याकाल (गोधूलि बेरा) या सूर्योदय के समय स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण कर इस भजन का पाठ करना चाहिए।
  • स्थान: घर के पूजा स्थल पर शनिदेव के चित्र या विग्रह के समक्ष सरसों के तेल का दीपक प्रज्वलित कर इसे गाना चाहिए।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र में भगवान श्री शनिदेव हैं, जो सूर्य देव और छाया देवी के पुत्र तथा यमराज के भ्राता हैं। वे कलियुग के कर्माध्यक्ष और नवग्रहों में न्यायाधीश पद पर आसीन हैं। शनिदेव की कृपा प्राप्त करने के लिए भगवान शिव और हनुमान जी की उपासना को भी अनिवार्य माना गया है, क्योंकि पौराणिक कथाओं के अनुसार शनिदेव ने हनुमान जी को वचन दिया था कि जो हनुमान भक्त की शरण में आएगा, उसे शनि पीड़ा नहीं सताएगी। आप अधिक जानकारी के लिए श्री हनुमान चालीसा का भी पाठ कर सकते हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन पारंपरिक लोक-संकीर्तन और संत परंपरा की देन है। पीढ़ियों से संतों, महात्माओं और गृहस्थ भक्तों द्वारा इसे लोक-कल्याण के लिए गाया जाता रहा है। इसकी भाषा सरल अवधी-हिंदी मिश्रित ब्रजभाषा के प्रभाव वाली है, जिससे आम लोग भी इसे आसानी से समझकर गा सकते हैं। इस प्रकार के भजनों का उद्देश्य जन-मानस में धर्म, नीति और सदाचार के प्रति निष्ठा उत्पन्न करना है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

भजन की काव्य रचना अत्यंत सहज और प्रवाहमयी है। इसमें अनुप्रास और रुचक लय का सुंदर समन्वय है जो इसे गाने में अत्यंत सुगम बनाता है। शब्दों का चयन इस प्रकार किया गया है कि वे सीधे हृदय को स्पर्श करते हैं और श्रोता को भक्ति रस से सराबोर कर देते हैं। रूपकों और उपमाओं के माध्यम से शनिदेव के भव्य स्वरूप का सजीव चित्रण किया गया है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

  • कर्म की श्रेष्ठता: जैसा बोओगे, वैसा काटोगे—यही शनि दर्शन का मूल मंत्र है।
  • धैर्य और सहनशीलता: शनिदेव व्यक्ति को संघर्षों के माध्यम से तपाकर कुंदन बनाते हैं। जीवन की कठिनाइयों से घबराना नहीं चाहिए।
  • शरणागति: अहंकार का त्याग कर प्रभु के चरणों में समर्पित होने से समस्त विपत्तियां टल जाती हैं।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पदावली सरल अर्थ संदर्भ / प्रसंग
भक्तन हितकारी भक्तों का कल्याण करने वाला शनिदेव का दयालु और रक्षक स्वभाव
श्याम वर्ण सांवला या काला रंग शनिदेव का दिव्य शारीरिक स्वरूप
चतुर्भुज धारी चार भुजाओं वाले दिव्य और शक्तिशाली रूप
भवसागर संसार रूपी सागर (जन्म-मरण का चक्र) संसार के दुखों से मुक्ति
पीपल तरु पीपल का वृक्ष शनि पूजा का पवित्र स्थल

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"जय जय शनिदेव भक्तन हितकारी, सूर्य पुत्र जग जन सुखकारी।"
हे शनिदेव! आपकी जय हो। आप अपने भक्तों का हित करने वाले हैं। सूर्य देव के घर उत्पन्न होने वाले आप संपूर्ण जगत के जीवों को सुख प्रदान करने वाले हैं।

"श्याम वर्ण अति सुंदर साजे, गल मोतियन की माल विराजे।"
आपका सांवला रंग अत्यंत शोभायमान है और आपके गले में मोतियों की सुंदर माला सुशोभित हो रही है।

"न्यायधीश जग के तुम कहलाओ, कर्मानुसार फल सबको पहुँचाओ।"
हे प्रभु! आप इस ब्रह्मांड के सर्वोच्च न्यायधीश हैं जो हर प्राणी को उसके कर्मों के अनुसार उचित फल प्रदान करते हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

भजन के साथ-साथ निम्नलिखित पौराणिक मंत्र का जाप करना अत्यंत फलदायी माना गया है:

ॐ नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम। छाया मार्तण्ड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम॥

इस मंत्र के नियमित स्मरण से शनि महाराज की असीम कृपा प्राप्त होती है और सभी प्रकार के कष्टों का निवारण होता है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम जय जय शनिदेव भक्तन हितकारी (Jai Jai Shree Shanidev Bhaktan Hitkaari)
आराध्य देव भगवान श्री शनिदेव (कर्मफलदाता)
भाषा हिंदी / ब्रज-अवधी मिश्रित लोक भाषा
प्रमुख भाव भक्ति, शरणागति, न्याय, और कल्याण
उपयुक्त अवसर शनिवार, शनि जयंती, शनि प्रदोष व्रत, अमावस्या
मुख्य लाभ शनि पीड़ा शांति, मानसिक बल एवं कर्म शुद्धि

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन विशेष रूप से शनिवार के दिन, शनि प्रदोष व्रत, और शनि अमावस्या के दिन गाना अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है।

शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना, गरीबों और असहायों की सहायता करना तथा श्रीमहराज की आरती करना चाहिए।

हाँ, यह भजन बहुत ही सरल शब्दों में है और इसे कोई भी गृहस्थ भक्त संध्याकाल में अपने परिवार के साथ आसानी से गा सकता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

प्रस्तुत सामग्री "जय जय शनिदेव भक्तन हितकारी लिरिक्स" भक्तलोक के विद्वान आचार्यों एवं संपादकीय टीम द्वारा धार्मिक ग्रंथों, लोक परंपराओं और ज्योतिषीय मान्यताओं के अध्ययन के पश्चात संकलित की गई है। इसका उद्देश्य पाठकों को शुद्ध पाठ और प्रामाणिक भावार्थ प्रदान करना है।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • सनातन पौराणिक ग्रंथ एवं ज्योतिष शास्त्र
  • पारंपरिक भक्ति संगीत एवं भजन संग्रह
  • पंचांग एवं शनि व्रत कथा संदर्भ

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!