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जोगी बन जाना शिवा दा नाम जपके लिरिक्स (Jogi Ban Jana Shiva Da Naam Japke Lyrics in Hindi) - Shiv Bhajan - Bhaktilok

156 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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"जोगी बन जाना शिवा दा नाम जपके" एक अत्यंत भावपूर्ण और हृदयस्पर्शी शिव भजन है, जो भगवान शिव के प्रति अनन्य प्रेम, वैराग्य और समर्पण की पराकाष्ठा को दर्शाता है। यह भजन उस साधक की मानसिक और आध्यात्मिक अवस्था का चित्रण करता है, जो संसार की नश्वरता को समझकर देवादिदेव महादेव की शरण में जाने के लिए व्याकुल है। 'जोगी' शब्द यहाँ केवल वेशभूषा का प्रतीक नहीं, बल्कि उस आंतरिक अवस्था का द्योतक है जहाँ भक्त स्वयं को शिव के रंग में रंग लेना चाहता है। यह भजन विशेष रूप से महाशिवरात्रि, सावन के सोमवार, और शिव मंदिरों में आयोजित होने वाले सत्संगों में अत्यंत श्रद्धा के साथ गाया जाता है। इसमें निहित 'माएँ नि माएँ' का संबोधन भक्त की उस बाल-सुलभ जिजीविषा को प्रकट करता है, जहाँ वह अपनी माता से शिव-भक्ति के लिए आवश्यक श्रृंगार और साधनों की मांग कर रहा है। यह भजन न केवल कानों को प्रिय लगता है, बल्कि आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम भी है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

जोगी बन जाना शिवा दा नाम जपके
माएँ नि माएँ मैनु चोला प्वाई दे
चोलियाँ ओं पाँदे जीना दे पुत्र जोगी
जोगी बन जाना शिवा दा नाम जपके

माएँ नि माएँ मैनु मुंद्रा प्वाई दे
मुंद्रा ओं पाँदे जीना दे पुत्र जोगी
जोगी बन जाना शिवा दा नाम जपके

माएँ नि माएँ मैनु चिम्टा प्वाई दे
चिम्टा ओं पाँदे जीना दे पुत्र जोगी
जोगी बन जाना शिवा दा नाम जपके

माएँ नि माएँ मैनु भभूत रमाई दे
भभूत ओं पाँदे जीना दे पुत्र जोगी
जोगी बन जाना शिवा दा नाम जपके

माएँ नि माएँ मैनु जटा वधाई दे
जटा ओं पाँदे जीना दे पुत्र जोगी
जोगी बन जाना शिवा दा नाम जपके

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन में भक्त अपनी माता से शिव-भक्ति के मार्ग पर चलने की अनुमति और आवश्यक सामग्री मांग रहा है। 'जोगी बन जाना' का अर्थ है सांसारिक मोह-माया का त्याग कर शिव के ध्यान में लीन हो जाना। भक्त अपनी माता से कहता है कि हे माँ, मुझे शिव का नाम जपकर जोगी बनना है, अतः मुझे जोगी का वेश (चोला, मुंद्रा, चिम्टा, भभूत) धारण करवा दो। यहाँ 'चोला' त्याग का, 'मुंद्रा' एकाग्रता का, 'चिम्टा' अहंकार के दमन का और 'भभूत' इस सत्य का प्रतीक है कि अंततः सब कुछ राख हो जाना है। यह भजन भक्त की उस तीव्र इच्छा को दर्शाता है जहाँ वह संसार के बंधनों को तोड़कर महादेव की सेवा में अपना जीवन समर्पित करना चाहता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन शिव भक्ति के 'वैराग्य भाव' को उजागर करता है। शिव को 'योगीराज' कहा गया है, और उनके भक्त भी उन्हीं के गुणों को आत्मसात करने का प्रयास करते हैं। यह भजन महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर शिव भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। यह हमें सिखाता है कि भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने का एक ढंग है जिसमें सादगी और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण सर्वोपरि है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को किसी भी समय गाया जा सकता है, परंतु ब्रह्म मुहूर्त या संध्या काल में इसका गायन विशेष फलदायी होता है। सावन के सोमवार के व्रत के दौरान या शिवरात्रि की जागरण की रात में इसे समूह में गाने से आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है। इसे गाते समय मन में शिव के प्रति पूर्ण समर्पण का भाव रखें।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द अर्थ संदर्भ
जोगी योगी/तपस्वी शिव का भक्त
चोला भगवा वस्त्र त्याग का प्रतीक
मुंद्रा कानों में पहने जाने वाले कुंडल योग साधना का चिन्ह
भभूत राख नश्वरता का बोध

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम जोगी बन जाना शिवा दा नाम जपके
आराध्य देव भगवान शिव (महादेव)
भाषा पंजाबी मिश्रित हिंदी
भाव वैराग्य एवं समर्पण
उपयुक्त अवसर महाशिवरात्रि, सावन सोमवार

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

जोगी बनने का आध्यात्मिक अर्थ क्या है?

जोगी बनने का अर्थ सांसारिक मोह-माया का त्याग कर ईश्वर के ध्यान में एकाग्र होना है।

यह भजन किस अवसर पर गाना सबसे अच्छा है?

महाशिवरात्रि और सावन के सोमवार के दिन यह भजन विशेष रूप से गाया जाता है।

क्या इस भजन को घर पर गाया जा सकता है?

हाँ, इसे घर पर शिव पूजा के दौरान या सत्संग में श्रद्धापूर्वक गाया जा सकता है।

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समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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