Radha Kriya Kataksh Stotram

श्री जगन्नाथ अष्टकम लिरिक्स (Shri Jagannath Ashtakam Lyrics in Hindi) - कदाचित् कालिन्दी तट Kailash Kher Stotra - Bhaktilok

229 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

जगन्नाथ की कृपा का अष्टकम पाठ

जय श्री जगन्नाथ! इस अष्टकम का पाठ आपको संपूर्ण भक्ति की प्रेरणा देगा।

श्री जगन्नाथ अष्टकम लिरिक्स (Shri Jagannath Ashtakam Lyrics in Hindi) - कदाचित् कालिन्दी तट विपिन सङ्गीत करबोमुदाभीरी नारी वदन कमला स्वाद मधुपःरमा शम्भु ब्रह्मामरपति गणेशार्चित पदोजगन्नाथः स्वामी नयन पथ गामी भवतु मे ॥१॥भुजे सव्ये वेणुं शिरसि शिखिपिच्छं कटितटेदुकूलं नेत्रान्ते सहचर-कटाक्षं विदधते ।सदा श्रीमद्‍-वृन्दावन-वसति-लीला-परिचयोजगन्नाथः स्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे ॥२॥महाम्भोधेस्तीरे कनक रुचिरे नील शिखरेवसन् प्रासादान्तः सहज बलभद्रेण बलिना ।सुभद्रा मध्यस्थः सकलसुर सेवावसरदोजगन्नाथः स्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे ॥३॥कृपा पारावारः सजल जलद श्रेणिरुचिरोरमा वाणी रामः स्फुरद् अमल पङ्केरुहसुखः ।सुरेन्द्रैर् आराध्यः श्रुतिगण शिखा गीत चरितोजगन्नाथः स्वामी नयन पथ गामी भवतु मे ॥४॥रथारूढो गच्छन् पथि मिलित भूदेव पटलैःस्तुति प्रादुर्भावम् प्रतिपदमुपाकर्ण्य सदयः ।दया सिन्धुर्बन्धुः सकल जगतां सिन्धु सुतयाजगन्नाथः स्वामी नयन पथ गामी भवतु मे ॥५॥परंब्रह्मापीड़ः कुवलय-दलोत्‍फुल्ल-नयनोनिवासी नीलाद्रौ निहित-चरणोऽनन्त-शिरसि ।रसानन्दी राधा-सरस-वपुरालिङ्गन-सुखोजगन्नाथः स्वामी नयन-पथगामी भवतु मे ॥६॥न वै पार्थो राज्यं न च कनक माणिक्य विभवंन याचेऽहं रम्यां निखिल जन काम्यां वरवधूम् ।सदा काले काले प्रमथ पतिना गीतचरितोजगन्नाथः स्वामी नयन पथ गामी भवतु मे ॥७॥हर त्वं संसारं द्रुततरम् असारं सुरपतेहर त्वं पापानां विततिम् अपरां यादवपते ।अहो दीनेऽनाथे निहित चरणो निश्चितपदंजगन्नाथः स्वामी नयन पथ गामी भवतु मे ॥८॥जगन्नाथाष्टकं पुन्यं यः पठेत् प्रयतः शुचिः ।सर्वपाप विशुद्धात्मा विष्णुलोकं स गच्छति ॥९॥॥ इति श्रीमत् शंकराचार्यविरचितं जगन्नाथाष्टकं संपूर्णम् ॥ 
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

श्री जगन्नाथ अष्टकम एक अद्भुत स्तोत्र है जो जगन्नाथ जी की कृपा और महिमा का गुणगान करता है। इस स्तोत्र के पहले श्लोक में भक्त भगवान जगन्नाथ के साथ नदी कालिंदी के तट पर आपके स्वरूप का वर्णन करते हैं, जहां आपके मुख पर कमल है। शब्द 'जगन्नाथ' का अर्थ है जगत के स्वामी, जो सभी जीवों के पालनहार हैं। उनकी कृपा से भक्तों का जीवन सुख और शांति से भर जाता है। दूसरे और तीसरे श्लोक में भगवान के सुंदर स्वरूप का पुनरावलोकन किया गया है, जहां उनका बोहना शिखा और मधुर वेणु की ध्वनि का उल्लेख है। यह दर्शाता है कि भगवान सदा अपने भक्तों की समीपता में रहते हैं, विशेषकर वृंदावन में उनकी लीलाओं के दौरान।

इस स्तोत्र में भक्त की भावनाएँ आनंदित हैं, जब वे भगवान जगन्नाथ को अपने सामने रथ पर सजे हुए देखते हैं। भक्त कहते हैं कि जगन्नाथ उस रथ पर सवार होकर जब Sथित होते हैं, तो सभी देवताओं का ध्यान उनकी ओर आकर्षित होता है। वे दया के सागर हैं जो सभी जीवों के साथ अपने प्रेमपूर्ण संबंध को बनाए रखते हैं। अगला कदम सुभद्रा और बलभद्र के संदर्भ में है, जो उन परंपराओं को दर्शाते हैं जो भगवत साक्षात्कार के लिए आवश्यक हैं। यह दिखाता है कि कैसे सभी जीव-जने आपके प्रति समर्पित होते हैं।

जगन्नाथ जी का पवित्र नाम और उनका ध्यान करना भक्तों के लिए बहुत फलदायी है। यह अष्टकम भक्ति मार्ग (भक्ति के मार्ग) पर चलने में प्रोत्साहित करता है। भक्त भगवान के प्रति अपनी भावनाओं को सच्चे समर्पण के साथ व्यक्त करते हैं, जबकि भगवान अपनी कृपा से उन्हें निरंतर मार्गदर्शन करते हैं। आप इस स्तोत्र का पाठ करके न केवल भक्ति का आनंद ले सकते हैं, बल्कि आप अपने जीवन में तनाव और दुःख से भी मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं। भक्त का विश्वास और श्रधा उनका सबसे बड़ा सहारा है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

जगन्नाथ अष्टकम का महत्व भारतीय पौराणिक कथाओं में गहरा है, जिसमें भगवान कृष्ण के स्वरूप को समझाया गया है। यह शंकराचार्य द्वारा लिखित है, जो अद्वैत वेदांत के प्रमुख आचार्य रहे हैं। यह स्तोत्र भक्तों को भक्ति और साधना की दिशा में प्रेरित करता है। पुराणों में भी जगन्नाथ का उल्लेख है, जो समुद्र की लहरों के ऊपर से सवारी करते हुए भक्तों के दिलों में अपनी छाप छोड़ते हैं। जगन्नाथ धाम की यात्रा और यहाँ के उत्सवों का धार्मिक वातावरण भक्तों की आत्मा को शांति और आनंद प्रदान करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। श्री जगन्नाथ अष्टकम का पाठ मानसिक शांति, शारीरिक स्वास्थ्य, और आध्यात्मिक उत्थान का मार्ग प्रशस्त करता है। इसे नियमित रूप से चाटने से भक्त के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और प्रेम का संचार होता है। यह दुखों और समस्याओं से मुक्ति दिलाने में सहायक होता है, साथ ही भगवान की कृपा का अनुभव कराता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस अष्टकम का पाठ सुबह सूर्योदय के समय या संध्या समय पर करने का सर्वोत्तम है। पूजा के दौरान एक दीपक जलाएं और भगवान के समक्ष फूल और फल अर्पित करें। उचित आसन पर बैठकर ध्यान लगाते हुए, भक्तिपूर्वक पाठ करें। मानसिक वाणी से भगवान से प्रार्थना करें कि वे आपके जीवन में सुख और शांति लाएँ।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

जगन्नाथ अष्टकम का मुख्य उद्देश्य क्या है?

जगन्नाथ अष्टकम का मुख्य उद्देश्य भगवान जगन्नाथ की महिमा का गुणगान करना और भक्तों को भक्ति मार्ग में प्रेरित करना है।

इस स्तोत्र का पाठ करने से क्या लाभ होता है?

इस स्तोत्र का नियमित पाठ करने से भक्त का मन शांत होता है और जीवन की कठिनाइयाँ कम होती हैं। यह भगवान जगन्नाथ की कृपा अर्जित करने का साधन है।

क्या इस अष्टकम का पाठ किसी विशेष अवसर पर करना चाहिए?

इस अष्टकम का पाठ नवरात्रि, रथ यात्रा और अन्य धार्मिक आयोजनों के समय विशेष रूप से करना फलदायी होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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