Krishna Bhajan

मैंने सारे सहारे छोड़ दिए लिरिक्स (Maine Sare Sahare Chhod Diye Lyrics in Hindi) - by देवी चित्रलेखा जी Krishna Bhajan - Bhaktilok

444 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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भक्ति और समर्पण की अनूठी मर्मस्पर्शी प्रस्तुति "मैंने सारे सहारे छोड़ दिए लिरिक्स (Maine Sare Sahare Chhod Diye Lyrics in Hindi)" श्री कृष्ण और बांके बिहारी के चरणों में पूर्ण रूप से खुद को समर्पित कर देने का एक अत्यंत पावन और भावुक भजन है। पूज्य देवी चित्रलेखा जी द्वारा अपने मधुर, कर्णप्रिय और भावपूर्ण स्वर में गाए गए इस भजन ने देश-विदेश के करोड़ों कृष्ण भक्तों के हृदय को झकझोर कर रख दिया है। जब जीवन में चारों तरफ से निराशा के बादल घिर आते हैं, जब अपने भी पराए लगने लगते हैं और मनुष्य हर भौतिक सहारे से निराश हो जाता है, तब एकमात्र बांके बिहारी की शरण ही उसके लिए अंतिम और शाश्वत संबल बचती है। इस भजन का मूल भाव (Bhava) अनन्य शरणागति (Surrender), अगाध प्रेम, विरह व्यथा और दीनता का है। श्री कृष्ण भजन और राधा कृष्ण भजन की श्रृंखला में इस रचना का आध्यात्मिक और मानसिक शांति की दृष्टि से अत्यंत ऊंचा स्थान है। सुबह-शाम की पूजा, एकांत साधना, कीर्तन या मानसिक अशांति के समय इस भजन का श्रवण और गायन साधक के मन को अलौकिक आनंद और स्थिरता प्रदान करता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मैंने सारे सहारे छोड़ दिए — देवी चित्रलेखा जी

मैंने सारे सहारे छोड़ दिए,
अब आस तुम्हारी है बांके बिहारी!
दुनिया के फरेबों से तंग आके,
मैंने दर पे तुम्हारे अलख जगाई है।

अपनों ने भी जब मुंह मोड़ लिया,
हर गैर ने मुझको छोड़ दिया,
तू ही बता अब जाऊं कहां मोहन,
मेरी नैया मझधार में अटकी है।

सुना है तेरी चौखट पे जो भी आता,
वह खाली दामन कभी नहीं ले जाता,
मेरी भी झोली भर दे ओ सांवरे,
तेरे दर पे मैंने तो उम्र बिताई है।

अब और परीक्षा ना ले मेरी कन्हैया,
तू ही मेरी शक्ति, तू ही है खिवैया,
पकड़ ले हाथ मेरा इस भवसागर में,
तुझसे ही मेरी सांसों की डोरी बंधी है।

मैंने सारे सहारे छोड़ दिए,
अब आस तुम्हारी है बांके बिहारी!
राधे-राधे रटूं हर पल मैं सांवरे,
यही जीवन की मेरी अंतिम कमाई है।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन की प्रत्येक पंक्ति भक्त के अंतःकरण की पुकार और उसकी निष्कपट भक्ति को दर्शाती है। जब साधक कहता है कि "मैंने सारे सहारे छोड़ दिए, अब आस तुम्हारी है बांके बिहारी", तो इसका अर्थ यह है कि वह सांसारिक रिश्तों, धन, बल और ऐश्वर्य के झूठे प्रपंचों से पूरी तरह विरक्त होकर केवल और केवल परमेश्वर की अहैतुकी कृपा पर निर्भर हो चुका है। मनुष्य जीवन में कई बार ऐसी परिस्थितियां आती हैं जब उसकी अपनी बुद्धिमत्ता और अपनों का साथ छूट जाता है। ऐसे कठिन समय में भगवान कृष्ण ही एकमात्र ऐसे आश्रयदाता हैं जो बिना किसी शर्त के अपने भक्त को गले लगाते हैं। भजन का भावार्थ हमें यह सिखाता है कि अहंकार का त्याग और भगवान के चरणों में पूर्ण आत्मसमर्पण ही सभी दुखों का एकमात्र औषध है। जो व्यक्ति भगवान को अपना सब कुछ मान लेता है, उसके जीवन की नैया को पार लगाने की जिम्मेदारी स्वयं श्री बांके बिहारी उठा लेते हैं। यह भाव साधक को भीतर से निर्भीक, शांत और प्रेम से परिपूर्ण बना देता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन केवल शब्दों का समूह नहीं है, बल्कि यह एक आत्मिक यात्रा है जो सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर भगवान की भक्ति में लीन होने की प्रेरणा देती है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • अनन्य शरणागति: भजन में भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण और अटूट विश्वास का सजीव चित्रण मिलता है।
  • मानसिक शांति: तनावपूर्ण आधुनिक जीवन में इस भजन को सुनने से मानसिक संताप दूर होते हैं और आंतरिक शांति की प्राप्ति होती है।
  • भक्ति रस का संचार: देवी चित्रलेखा जी की मधुर वाणी में यह भजन श्रोताओं की आंखों में प्रेम के आंसू और हृदय में भक्ति भाव जगा देता है।
  • सनातन संस्कृति का संदेश: यह रचना भगवद्गीता के उस संदेश की याद दिलाती है जिसमें भगवान कृष्ण कहते हैं—"सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।"

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भक्ति संगीत का प्रभाव उसके गायन के समय, स्थान और आंतरिक भाव पर बहुत अधिक निर्भर करता है:

  • सर्वोत्तम समय: ब्रह्म मुहूर्त (प्रातःकाल 4 से 6 बजे) या संध्या बेला में गोधूलि वेला के समय इस भजन का श्रवण अत्यंत फलदायी होता है।
  • स्थान: घर के पूजा गृह में दीप प्रज्वलित करके, श्री बांके बिहारी या राधा-कृष्ण के विग्रह के सामने बैठकर इस भजन को गाना या सुनना चाहिए।
  • विधि: शांत चित्त होकर बैठें, गहरी सांस लें और भगवान कृष्ण का ध्यान करते हुए इस भजन के भावों को अपने भीतर उतारें। संकीर्तन या सत्संग के दौरान इसे सामूहिक रूप से भी गाया जा सकता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र में ब्रज के प्राणधन, नंदनंदन श्री कृष्ण (बांके बिहारी) और जगत जननी श्री राधा रानी हैं। श्री कृष्ण को वेदों और पुराणों में जगत का पालनहार, प्रेम का अवतार और संकटमोचन कहा गया है। इस भजन को अपनी अद्वितीया शैली में जीवंत करने वाली देवी चित्रलेखा जी आधुनिक युग की प्रख्यात कथा व्यास और भजन गायिका हैं। उनके द्वारा गाए गए भजन न केवल भारत में बल्कि संपूर्ण विश्व में बसे सनातन प्रेमियों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय हैं। उनकी वाणी में भक्ति की जो गहराई और सादगी है, वह श्रोताओं को सीधे वृंदावन की पावन गलियों और बांके बिहारी के दरबार से जोड़ देती है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

भक्ति परंपरा में इस प्रकार के भजनों का उद्गम संतों और महात्माओं के वैराग्यपूर्ण पदों से हुआ है। "मैंने सारे सहारे छोड़ दिए" भजन पारंपरिक और आधुनिक लोक-भक्ति शैलियों का एक सुंदर मिश्रण है। इसकी रचना इस प्रकार की गई है कि सामान्य से सामान्य व्यक्ति भी इसे आसानी से गा सके और इसके मर्म को समझ सके। इसकी पृष्ठभूमि उन भक्तों के जीवन पर आधारित है जो दुनिया से ठुकराए जाने के बाद भगवान की शरण में आते हैं और प्रभु उन्हें अपनी असीम करुणा से सींच लेते हैं। यह भजन हर उस व्यक्ति की आत्मकथा बन जाता है जो अपने जीवन में भगवान की खोज कर रहा है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा बहुत ही सरल, सहज और हृदयस्पर्शी ब्रज-प्रभावित हिंदी है, जिसे आमजन आसानी से समझ सकता है। इसमें रूपक अलंकार और वियोग रस का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। शब्दों का चयन ऐसा है जो सीधे श्रोता के दिल को छू लेता है। 'मझधार', 'अलख जगाना', 'दर पे आना' जैसे मुहावरों और लोक-प्रचलन के शब्दों का प्रयोग इस भजन की काव्य सौंदर्यता को और अधिक प्रगाढ़ बनाता है। भाषा की यह सरलता ही इसकी सबसे बड़ी ताकत है, जो विद्वान से लेकर साधारण ग्रामीण तक सभी को समान रूप से आकर्षित करती है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें जीवन के सबसे बड़े सत्यों से परिचित कराता है:

  1. अहंकार का त्याग: जब तक मनुष्य अपने बल और बुद्धि पर घमंड करता है, तब तक उसे सच्चे सुख की प्राप्ति नहीं होती। भगवान की कृपा पाने के लिए अहंकार का त्याग अनिवार्य है।
  2. संकट में धैर्य: कठिन समय में अपनों के साथ छोड़ने पर भी ईश्वर का दामन नहीं छोड़ना चाहिए। वही एकमात्र शाश्वत मित्र हैं।
  3. निरंतर स्मरण: सांसारिक दुखों के बीच भी ईश्वर के नाम (जैसे राधे-राधे या हरे कृष्ण महामंत्र) का स्मरण जीवन को सफल बना देता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
बांके बिहारी श्री कृष्ण (जो तीन जगहों से टेढ़े और अत्यंत सुंदर हैं) ब्रज के आराध्य देव और भक्तों के प्रियतम
अलख जगाना ईश्वर प्राप्ति की पुकार लगाना या प्रकाश फैलाना आत्मा की परमात्मा से मिलने की तीव्र उत्कंठा
मझधार नदी के बीच का कठिन और खतरनाक बहाव जीवन के असाध्य संकट और मोह-माया के बंधन
खिवैया नाव को पार लगाने वाला नाविक गुरु या भगवान जो भवसागर से पार लगाते हैं
अंतिम कमाई जीवन का सबसे मूल्यवान और सच्चा धन ईश्वर का नाम स्मरण और भक्ति

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

भजन की पहली पंक्ति "मैंने सारे सहारे छोड़ दिए, अब आस तुम्हारी है बांके बिहारी" साधक के उस दृढ़ निश्चय को दर्शाती है जहाँ वह संसार के सभी झूठे प्रलोभनों और समर्थन को त्याग कर केवल कृष्ण को अपना सर्वस्व मान लेता है। इसके बाद जब पंक्तियां आती हैं कि "अपनों ने भी जब मुंह मोड़ लिया... तू ही बता अब जाऊं कहां मोहन", तो यह मानव जीवन की उस सच्चाई को उजागर करती है जहाँ सुख के समय सब साथ होते हैं किंतु दुख में कोई नहीं पूछता। ऐसे में बांके बिहारी ही एकमात्र ऐसे सांवरे हैं जो पुकारने मात्र से दौड़े चले आते हैं। अंत में "राधे-राधे रटूं हर पल मैं सांवरे, यही जीवन की मेरी अंतिम कमाई है" पंक्ति यह संदेश देती है कि भौतिक धन-दौलत यहीं रह जाती है, केवल भगवान का नाम ही परलोक की सच्ची पूंजी है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के गायन से पूर्व या स्मरण के समय निम्नलिखित पवित्र श्लोक का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना गया है:

कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणाताक्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः॥

(अर्थ: वासुदेव भगवान श्रीकृष्ण को, जो समस्त हरने वाले, परमात्मा और शरणागतों के दुखों का नाश करने वाले हैं, उन गोविंद को बार-बार नमस्कार है।)

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विशेषता विवरण
भजन का नाम मैंने सारे सहारे छोड़ दिए (Maine Sare Sahare Chhod Diye)
प्रसिद्ध गायक / स्वर देवी चित्रलेखा जी
आराध्य देवता श्री कृष्ण (बांके बिहारी) एवं श्री राधा रानी
संगीत शैली भक्ति संगीत, संकीर्तन, कृष्ण भजन
प्रमुख भाव (Bhava) शरणागति, विनय, प्रेम और समर्पण
भाषा सरल ब्रज-प्रभावित हिंदी
उपयुक्त अवसर दैनिक पूजा, एकादशी, जन्माष्टमी, सत्संग

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह पावन भजन ब्रज के आराध्य श्री बांके बिहारी (भगवान श्री कृष्ण) और जगत जननी श्री राधा रानी को समर्पित है। इसमें भगवान के चरणों में पूर्ण शरणागति का भाव व्यक्त किया गया है।

इस भजन को अपनी अत्यंत मधुर और भावपूर्ण वाणी में प्रसिद्ध कथा व्यास और भजन गायिका देवी चित्रलेखा जी ने गाया है। उनके स्वर में यह भजन भक्तों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय है।

इस भजन को प्रातःकाल पूजा के समय, संध्या बेला में, या जब भी आपका मन अशांत हो और आप मानसिक शांति चाहते हैं, तब सुन सकते हैं। एकांत में बैठकर सुनने से इसका प्रभाव और अधिक गहरा होता है।

इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि मनुष्य को संसार के झूठे प्रपंचों और भौतिक सहारों को छोड़कर केवल भगवान कृष्ण के चरणों में अनन्य भाव से समर्पित हो जाना चाहिए। ईश्वर ही सभी संकटों के उद्धारकर्ता हैं।

हाँ, इस भजन की धुन और बोल बहुत सरल हैं, इसलिए इसे घर पर होने वाले सत्संग, एकादशी जागरण या श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसरों पर सामूहिक रूप से बहुत ही आनंद के साथ गाया जा सकता है।

'बांके' का अर्थ है जो तीन जगहों से तिरछे (गले, कमर और पैर से) खड़े हों और अत्यंत मनमोहक हों। वृंदावन के प्रसिद्ध धाम में श्री कृष्ण इसी त्रिभंग मुद्रा में विराजमान हैं, इसलिए उन्हें बांके बिहारी कहा जाता है।

शरणागति भक्ति का अर्थ है अपने अहंकार का पूर्ण समर्पण कर देना। जब मनुष्य भगवान को अपना सब कुछ सौंप देता है, तो उसके जीवन के सारे भय, चिंताएं और मानसिक तनाव स्वतः समाप्त हो जाते हैं।

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संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। इस लेख में प्रस्तुत भजन के बोल, अर्थ, भावार्थ और संदर्भों को सनातन धार्मिक परंपरा, कृष्ण भक्ति साहित्य और लोक-संगीत की गरिमा को ध्यान में रखते हुए अत्यंत प्रामाणिक रूप से संकलित किया गया है। हमारा उद्देश्य पाठकों को शुद्ध, सटीक और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध सामग्री प्रदान करना है ताकि उनकी साधना और भक्ति मार्ग प्रशस्त हो सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भागवत महापुराण एवं भगवद्गीता (शरणागति योग प्रसंग)
  • ब्रज की भजन परंपरा और संत साहित्य
  • देवी चित्रलेखा जी के आधिकारिक सत्संग एवं संकीर्तन संग्रह
  • सनातन धर्म के पारंपरिक लोकगीत एवं भक्ति संकलन

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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