Radha Kriya Kataksh Stotram

श्री पार्वतीवल्लभ अष्टकम (Shri Parvati Ashtakam Lyrics in Hindi) - Shiva Stotram Madhvi Madhukar Jha - Bhaktilok

133 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

श्री पार्वतीवल्लभ अष्टकम: शिव की महिमा का गान

इस अष्टकम का पाठ करने से शिव की कृपा और भक्ति का अनुभव करें।

 श्री पार्वतीवल्लभ अष्टकम (Shri Parvati Ashtakam Lyrics in Hindi) - नमो भूतनाथं नमो देवदेवंनमः कालकालं नमो दिव्यतेजम् ।नमः कामभस्मं नमश्शान्तशीलंभजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम् ॥ १ ॥सदा तीर्थसिद्धं सदा भक्तरक्षंसदा शैवपूज्यं सदा शुभ्रभस्मम् ।सदा ध्यानयुक्तं सदा ज्ञानतल्पंभजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम् ॥ २ ॥श्मशानं शयानं महास्थानवासंशरीरं गजानां सदा चर्मवेष्टम् ।पिशाचं निशोचं पशूनां प्रतिष्ठंभजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम् ॥ ३ ॥फणीनागकण्ठे भुजङ्गाद्यनेकंगले रुण्डमालं महावीर शूरम् ।कटिव्याघ्रचर्मं चिताभस्मलेपंभजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम् ॥ ४ ॥शिरश्शुद्धगङ्गा शिवा वामभागंबृहद्दीर्घकेशं सदा मां त्रिणेत्रम् ।फणीनागकर्णं सदा फालचन्द्रंभजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम् ॥ ५ ॥करे शूलधारं महाकष्टनाशंसुरेशं वरेशं महेशं जनेशम् ।धनेशामरेशं ध्वजेशं गिरीशंभजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम् ॥ ६ ॥उदासं सुदासं सुकैलासवासंधरानिर्धरं संस्थितं ह्यादिदेवम् ।अजाहेमकल्पद्रुमं कल्पसेव्यंभजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम् ॥ ७ ॥मुनीनां वरेण्यं गुणं रूपवर्णंद्विजैस्सम्पठन्तं शिवं वेदशास्त्रम् ।अहो दीनवत्सं कृपालं महेशंभजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम् ॥ ८ ॥सदा भावनाथं सदा सेव्यमानंसदा भक्तिदेवं सदा पूज्यमानम् ।मया तीर्थवासं सदा सेव्यमेकंभजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम् ॥ ९ ॥इति श्रीमच्छङ्करयोगीन्द्र विरचितं पार्वतीवल्लभाष्टकम् ॥
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

श्री पार्वतीवल्लभ अष्टकम एक अत्यंत प्रभावशाली स्तुति है जो भगवान शिव के विभिन्न गुणों और रूपों का वर्णन करती है। इसमें भगवान शिव को 'भूतनाथ', 'देवदेव', 'कालकाल', 'कामभस्म' के रूप में प्रगट किया गया है। प्रत्येक श्लोक में शिव की महिमा का विस्तृत रूप से वर्णन है जिससे भक्त को उनके प्रति असीम श्रद्धा का अनुभव होता है। पहले श्लोक में शिव का स्वागत करते हुए उन्हें नीलकण्ठ के नाम से पुकारा गया है। वह शांत, बुद्धिमान एवं ज्ञान स्वरूप हैं। यह अष्टकम भक्तों के लिए एक साधना का साधन है, जिससे उन्हें भक्ति मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है।

इस अष्टकम में हर एक श्लोक में भगवान शिव के अनेक गुणों का वर्णन किया गया है, जैसे कि उनकी संहारकारी शक्ति, दिव्यता, और शांति। भक्त उन्हें हमेशा ध्यान में रखने की प्रेरणा दी जाती है। यह ध्यान हमें यह सिखाता है कि शिव केवल संहारक नहीं, बल्कि सृष्टि का पालन करने वाले भी हैं। यहाँ उल्लेखित तीर्थसिद्धता और भक्त रक्षा का भाव, भक्त को यह एहसास दिलाता है कि शिव के समीप रहकर वे हर संकट से मुक्त हो सकते हैं। इस प्रकार, भावार्थ में भक्ति और प्रेम की भावना का प्रमुख स्थान है।

इस भजन के माध्यम से भक्त शिव को अपने जीवन का केंद्र मानते हैं। यह अष्टकम शैव भक्ति मार्ग की एक महत्त्वपूर्ण प्रस्तुति है। इसके द्वारा भक्त शिव के प्रति अपनी निष्ठा और प्रेम को व्यक्त करते हैं। शिव की विभिन्न उपाधियाँ, जैसे 'कैलाशवास', 'महेश', 'जनेश' आदि, यह दर्शाती हैं कि वे सम्पूर्ण सृष्टि के सम्राट हैं। इस स्तुति के जरिए भक्त ध्यान को शिव की कृपा से जुड़ने का माध्यम समझते हैं और उनके प्रति अपनी आत्मा को समर्पित करते हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्री पार्वतीवल्लभ अष्टकम का उल्लेख शास्त्रों में अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह पाठ भगवान शिव के विभिन्न रूपों का प्रमाण प्रस्तुत करता है, जो कि वेदों और पुराणों में अलग-अलग रूपों में वर्णित हैं। उपनिषदों में शिव को ब्रह्म के रूप में माना गया है और यह अष्टकम उनके टेढ़े-मेढ़े रूपों और अद्भुत गुणों का एक सार है। यहाँ तक कि 'महा-मृत्युञ्जय मंत्र' में भी शिव की मृत्यु के पार जाने की शक्ति का बखान किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि जो भक्त इस अष्टकम का पाठ करते हैं, उनके सभी कष्ट दूर होते हैं और उन्हें सच्चाई और ध्यान का मार्ग मिलता है।

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। इस अष्टकम का पाठ करने से भक्त को मानसिक शांति, आत्मिक शक्ति, और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। यह शिव की कृपा को आकर्षित करता है और उनके भक्तों को हर विपत्ति से उबारता है। नियमित रूप से इस अष्टकम का पाठ करने वाले भक्तों को उद्धार और कल्याण की प्राप्ति होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस अष्टकम का पाठ सुबह सूर्योदय के समय या शाम को दीप जलाकर करना सर्वोत्तम है। भक्त को चाहिए कि वे साफ-सुथरे बैठे, हृदय में अपने गुरु और शिव का स्मरण करते हुए इस स्तुति का उच्चारण करें। साथ ही, शिव जी के समक्ष कोई भी ताजा फूल या फल अर्पित करने से और अधिक प्रभाव बढ़ता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

श्री पार्वतीवल्लभ अष्टकम का महत्व क्या है?

यह अष्टकम शिव की महिमा का गान करता है और भक्तों को सच्ची भक्ति का मार्ग दिखाता है।

इस अष्टकम का पाठ किस समय करना चाहिए?

सुबह सूर्योदय के समय या शाम को दीप जलाकर इस अष्टकम का पाठ करना श्रेष्ठ माना जाता है।

क्या इस अष्टकम का नियमित पाठ करने से लाभ होता है?

हाँ, नियमित पाठ से मानसिक शांति, आत्मिक शक्ति, और शिव की कृपा प्राप्त होती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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