Shyam Bhajan

हम प्रेमी श्री श्याम के ना रखते दिलों में बैर (Hum Premi Baba Shyam Ke Lyrics in Hindi) - Shyam Bhajan Raunak Runal - BhaktiLok

45 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

श्याम भक्ति: प्रेम और शांति का गान

श्याम के प्रति प्रेम और भक्ति की भावना को जागृत करने वाला यह भजन भावनाओं का संचार करता है।

हम प्रेमी श्री श्याम के ना रखते दिलों में बैर हम प्रेमी श्री श्याम के ना रखते दिलों में बैर जय श्री श्याम, जय श्री श्याम जय श्री श्याम, जय श्री श्याम सबकी कीर्ति है गाई, सबकी कहानी है श्याम श्याम के चरणों में आता, ये जग सारा इंसा हम प्रेमी श्री श्याम के ना रखते दिलों में बैर जय श्री श्याम, जय श्री श्याम आओ सारा जग मिलके, भक्ति में रंग जाएं श्याम के चरणों में सारा संसार, झूम के गाए हम प्रेमी श्री श्याम के ना रखते दिलों में बैर जय श्री श्याम, जय श्री श्याम हर दिल में है बसता, सच्चा प्रेम है श्याम असुरों से मोहब्बत, मित्र है निर्दोष श्याम हम प्रेमी श्री श्याम के ना रखते दिलों में बैर जय श्री श्याम, जय श्री श्याम आओ सभी मिलकर, सबका एक ही इरादा रे श्याम हम सब हैं सच्चे, बस तेरा ही है साया हम प्रेमी श्री श्याम के ना रखते दिलों में बैर जय श्री श्याम, जय श्री श्याम
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय श्री श्याम के प्रति प्रेम और द्वेष को समाप्त करना है। 'हम प्रेमी श्री श्याम के ना रखते दिलों में बैर' पक्तियों में स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है कि सच्चे भक्त के दिल में द्वेष या भेदभाव का स्थान नहीं होता। यहां प्रार्थना की जा रही है कि सभी भक्त एकजुट होकर श्याम के चरणों में आकर उनकी भक्ति करें और प्रेम का संचार करें। 'आओ सारा जग मिलके, भक्ति में रंग जाएं' यह पंक्ति इस भजन का सामूहिकता का संदेश देती है। यह हर व्यक्ति को संयोग की शक्ति और प्रेम का अहसास कराती है। श्याम के प्रति प्रेम सच्चा और निश्छल होना चाहिए, जो सच्चा मार्गदर्शक होता है।

इस भजन में भावार्थ का गहरा अर्थ छुपा हुआ है। जब हम कहते हैं 'सबकी कीर्ति है गाई, सबकी कहानी है श्याम', तो यह सच्चाई प्रकट होती है कि श्री श्याम सबकी रक्षा करते हैं और उनके चरणों में भक्ति का भाव हर जीव में विद्यमान है। भक्ति का एक ऐसा रूप है, जिसमें हम अपने मन को एकत्रित कर भगवान के प्रति समर्पण करते हैं। इस भजन में दी गई सच्चाई हमें यह शिक्षा देती है कि भक्ति में कोई भेदभाव नहीं होता, और हम जैसे भी हैं, हर एक व्यक्ति श्रद्धा से श्याम की भक्ति में लीन हो सकता है।

इस भजन की शास्त्रीय और दार्शनिक परिप्रेक्ष्य में, यह भक्ति मार्ग (Bhakti marg) को दर्शाता है, जो प्रेम और समर्पण से परिपूर्ण है। भगवान श्री श्याम को साकार रूप में स्वीकार करना, भावनाओं को सच्चाई से जोड़ना और आत्मा के शुद्धतम रूप को पहचानना ही भक्ति का मार्ग है। इस भजन के माध्यम से हमें यह भी समझ में आता है कि भक्ति का यह मार्ग संपूर्णता की ओर ले जाने वाला होता है, जिसमें शांति और प्रेम की अनुभूति होती है। हम सबको श्याम की भक्ति में लीन होकर एक सच्चे भक्त की भूमिका में रहना चाहिए।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन भगवान श्री श्याम की भक्ति के संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारतीय पौराणिक कथाएं, जैसे कि भागवत पुराण और महाभारत में, श्री श्याम की महानता का वर्णन मिलता है। श्री श्याम, जिनका संबंध राधा-कृष्ण की लीला से जुड़ा हुआ है, उन्हें सृष्टि का पालन करने वाला और भक्तों के कष्टों का निवारण करने वाला माना जाता है। भक्ति के इस अनूठे रूप में, हर एक व्यक्ति को प्रेम की भावना से नितांत जुड़े रहने की संदेश दिया गया है। यह भजन उन सभी को प्रेरित करता है, जो जीवन में प्रेम और सौहार्द के संदेश को फैलाना चाहते हैं।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित जाप करने से मानसिक शांति, भावनात्मक स्थिरता और आध्यात्मिक उत्थान प्राप्त होता है। यह भजन भक्तों को भक्ति के मार्ग पर चलते रहने की प्रेरणा देता है, जिससे साहस और आशा का संचार होता है। निरंतर श्याम के नाम का जप करने से आत्मा में संतोष और असीम प्रेम का अनुभव होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह या शाम के समय करना उत्तम होता है। उस समय ध्यान या प्रार्थना के लिए एक साफ स्थान चुनें, वहां दीप जलाएं और श्याम के चरणों में फूल अर्पित करें। बैठने का सही आसन ध्यान मुद्रा में होना चाहिए और मन को शांति और शुद्धता से भर देना चाहिए। इस प्रकार की साधना से मन में भक्ति का वास्तविक रूप प्रकट होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन को गाने का सर्वश्रेष्ठ समय क्या है?

इस भजन को सुबह या शाम के समय गाना सबसे उत्तम माना जाता है, जब मन एकाग्रता की स्थिति में होता है।

क्या इस भजन से किसी विशेष लाभ की प्राप्ति होती है?

जी हां, इस भजन के जाप से मानसिक शांति, आत्मीयता और आध्यात्मिक विकास की अभिवृद्धि होती है।

क्या इस भजन में कोई विशेष आस्था की आवश्यकता है?

इस भजन को गाने के लिए किसी विशेष आस्था की आवश्यकता नहीं है; प्रेम और समर्पण के साथ इसे गाने से ही भक्ति का वास्तविक अनुभव होता है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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