मेरे प्यारे बांके बिहारी लिरिक्स लिरिक्स (Mere Pyare Banke Bihari Lyrics in Hindi) -
जबसे नैन मिले गिरधर से,
अकल गयी बौराए,
देख में तुझको हुआ बावरा,
बिन देखे मोहे चैन ना आए,
प्यास दरस की आखौं में,
चौखट पे रात बिताऊं,
रोज मिलन होता है स्वपन में,
कैसे ये सबको बताऊँ....
ओ मेरे प्यारे बांके बिहारी,
बस तेरे ही गुण गाऊँ,
मेरा रोम रोम तेरे नाम से महके,
मैं कृष्णमई हो जाऊँ….
कृष्ण की दीवानी राधा,
लगा प्रेम का रोग,
छोड़ के सब तेरा नाम रटू मैं,
मिलने की है होड़,
कृष्णमई हो जाऊं कान्हा,
इस संसार में,
अकल मेरी बौराई कान्हा,
तोहरे प्यार में……
पीले पीले वस्त्र तेरे,
पाँव मे पेजनिया,
मोर मुकुट साजे,
बड़ी निक लागे अखियाँ,
बांसुरी कमर पे बंधे,
श्याम रंग लाल का,
चोरी चोरी माखन खाए,
मारो गोपाल हाँ…..
ओ मेरे मन मे बसने वाले हो,
मेरे मन मे बसने वाले,
मेरे प्यारे कृष्ण कन्हैया,
उनका भी बेड़ा पार करो,
जिनकी है डूब गई नैय्या,
ओ मेरे प्यारे बांके बिहारी,
बस तेरे ही गुण गाऊँ,
मेरा रोम रोम तेरे नाम से महके,
मैं कृष्णमई हो जाऊँ…….
मैं पागल जग की रीत मे,
अपना भला समझ ना पाई,
तेरे प्रेम में सब कुछ वार दिया,
अब तुम ना करना पराई,
सौभाग्या हू जो तेरी भक्त बनी,
तेरी कृपा की दृष्टी है पाई,
तुम क्षण पल मेरे साथ रहे,
कैसी भी विपदा हो आई,
चरणों से मुझको लगा लो,
ओ प्यारे नंद के लाला,
इस जीवन का उद्धार करो,
ओ कृष्णा ओ गोपाला,
ओ मेरे प्यारे बांके बिहारी,
बस तेरे ही गुण गाऊँ,
मेरा रोम रोम तेरे नाम से महके,
मैं कृष्णमई हो जाऊँ,
हरे कृष्ण हरे कृष्ण,
कृष्ण कृष्ण हरे हरे,
हरे राम हरे राम,
राम राम हरे हरे….
*** Singers : Shivam Chaurasia, Yashi Parihar ***
🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)
यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "मेरे प्यारे बांके बिहारी लिरिक्स लिरिक्स (Mere Pyare Banke Bihari Lyrics in Hindi) - Krishna Bhajan - Bhaktilok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।
भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)
श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)
भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।
भजनों को गाने की सही विधि क्या है?
भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।
क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?
हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।
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